Cuba’s future after Nicolas Maduro Ouster in Venezuela: वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हमले में 32 क्यूबाई सुरक्षा कर्मियों की मौत के बाद क्यूबा में सोमवार को राष्ट्रीय शोक मनाया गया और झंडे आधे झुका दिए गए. इस घटना के बाद क्यूबाई समाज में यह चिंता गहराने लगी है कि वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का उनके देश के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा. क्यूबा और वेनेजुएला के रिश्ते लंबे समय से बेहद घनिष्ठ रहे हैं. क्यूबाई सैनिक और सुरक्षा एजेंट अक्सर वेनेजुएला के राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहते थे, जबकि वेनेजुएला से होने वाला पेट्रोलियम आयात वर्षों से क्यूबा की जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा बना हुआ था.
क्यूबाई अधिकारियों ने सप्ताहांत में पुष्टि की कि हमले में 32 सुरक्षा अधिकारी मारे गए, हालांकि इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मादुरो को सत्ता से हटाने से अमेरिका के एक और पुराने लक्ष्य को साधने में मदद मिलेगी और वह लक्ष्य है क्यूबा की सरकार को कमजोर करना. अमेरिका का मानना है कि क्यूबा को वेनेजुएला से अलग करना उसके नेतृत्व के लिए गंभीर और विनाशकारी साबित हो सकता है.
शनिवार को ट्रंप ने कहा कि मादुरो के सत्ता से बाहर होने के बाद क्यूबा की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था और ज्यादा खराब हो जाएगी. विश्लेषकों का कहना है कि करीब एक करोड़ आबादी वाला क्यूबा, तेल संपन्न वेनेजुएला पर असामान्य रूप से गहरा प्रभाव डालता रहा है, जबकि वेनेजुएला की जनसंख्या क्यूबा से लगभग तीन गुना अधिक है.

लंबे समय से मुश्किलों में हैं क्यूबा के लोग
इस बीच क्यूबा के आम नागरिक लंबे समय से बिजली कटौती और बुनियादी खाद्य पदार्थों की कमी से जूझ रहे हैं. हालिया घटनाक्रम के बाद वे एक ऐसे अनिश्चित भविष्य को लेकर आशंकित हैं, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. 75 वर्षीय क्यूबाई नागरिक बर्ता लूज सिएरा मोलीना ने कहा, “मैं कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हूं. मेरे पास शब्द नहीं हैं.” वहीं 63 साल की रेगिना मेंडेज ने कहा, “हमें हालात के सामने मजबूती से खड़ा रहना होगा.”
अब तक वेनेजुएला से भेजा जा रहा था तेल
क्यूबा के ऊर्जा विशेषज्ञ जॉर्ज पिनोन के अनुसार, मादुरो सरकार बीते तीन महीनों में औसतन 35,000 बैरल तेल प्रतिदिन क्यूबा को भेज रही थी, जो देश की कुल जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत है. उन्होंने सवाल उठाया, “सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यह है कि क्या अमेरिका वेनेजुएला को क्यूबा के लिए तेल निर्यात की इजाजत देगा?” पिनोन ने बताया कि एक समय मेक्सिको क्यूबा को रोजाना 22,000 बैरल तेल सप्लाई करता था, लेकिन सितंबर में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मेक्सिको सिटी दौरे के बाद यह आपूर्ति घटकर 7,000 बैरल प्रतिदिन रह गई. उनका कहना था, “मुझे नहीं लगता कि मौजूदा हालात में मेक्सिको क्यूबा की सहायता करेगा.”
वॉशिंगटन स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी के क्यूबाई अर्थशास्त्री रिकार्डो टोरेस ने कहा कि देश में लगातार बिजली कटौती हो रही है, जबकि वेनेजुएला से अब भी सीमित मात्रा में तेल आ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी, “अब जरा सोचिए, अगर निकट भविष्य में यह आपूर्ति पूरी तरह रुक गई, तो यह एक बड़ी आपदा साबित होगी.” पिनोन के मुताबिक, क्यूबा के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं. उन्होंने कहा, “इस समय क्यूबा का आखिरी बड़ा सहयोगी रूस ही बचा है.”
क्या रूस करेगा मदद?
उनके अनुसार, रूस सालाना करीब 20 लाख बैरल तेल क्यूबा को भेजता है. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा, “रूस के पास इस कमी को पूरा करने की क्षमता तो है, लेकिन क्या उसके पास इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति है, यह कहना मुश्किल है.” टोरेस ने भी इस बात पर संदेह जताया कि रूस क्यूबा की खुलकर मदद करेगा. उन्होंने कहा, “क्यूबा के मुद्दे पर दखल देने से यूक्रेन को लेकर अमेरिका के साथ रूस की बातचीत जोखिम में पड़ सकती है. ऐसे में वह ऐसा कदम क्यों उठाएगा? यूक्रेन उसके लिए कहीं ज्यादा अहम है.” टोरेस का यह भी मानना है कि क्यूबा को अपने निजी क्षेत्र और बाजार को अधिक खोलना चाहिए और सरकारी खर्च में कटौती करनी चाहिए, ताकि चीन जैसे देश उसकी मदद के लिए आगे आ सकें.
पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.
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