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दुनिया के ये 18 देश, जहां एक भी नदी नहीं बहती! जुगाड़ और तकनीक से कैसे जिंदा हैं करोड़ों लोग? जानें

16 Nov, 2025 4:47 pm
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Countries Without Rivers

नदियों के बिना देश

Countries Without Rivers: दुनिया के 18 ऐसे देशों की कहानी जहां एक भी स्थायी नदी नहीं है. मध्य-पूर्व से द्वीपीय देशों तक, ये राष्ट्र डिसेलिनेशन, बारिश के पानी और ग्राउंडवॉटर से अपनी जरूरतें पूरी करते हैं. जानिए कैसे तकनीक और जुगाड़ ने इन जगहों पर जीवन संभव बनाया.

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Countries Without Rivers: दुनिया की बड़ी-बड़ी सभ्यताएं नदियों के किनारे बसीं, लेकिन सोचिए कि ऐसे भी देश हैं जहां कोई नदी हमेशा नहीं बहती. लगभग 18 देश ऐसे हैं जो बिना स्थायी नदी के अपनी जिंदगी और शहरों को चला रहे हैं. कहीं पूरा रेगिस्तान है, कहीं छोटा-सा द्वीप, और कहीं बारिश इतनी कम होती है कि नदी बनने का सवाल ही नहीं. इसके बावजूद ये देश डिसेलिनेशन, ग्राउंडवॉटर, इम्पोर्टेड वॉटर और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की मदद से पूरी आबादी का जीवन चला रहे हैं. यही कहानी है इन देशों की, जहां पानी की कमी को इंसान ने जुगाड़ और तकनीक से मात देने की कोशिश की.

मध्य-पूर्व का सबसे बड़ा नदी-विहीन इलाका

मध्य-पूर्व के कई देशों में सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, कतर, बहरीन, ओमान और यमन में एक भी स्थायी नदी नहीं है. लाखों साल पहले यहां नदियां बहती थीं, पर आज पूरा इलाका रेगिस्तान और सूखे का प्रतीक है.

  • सऊदी अरब: यह देश दुनिया का सबसे ज्यादा पानी डिसेलिनेशन से तैयार करता है. शहरों, खेतों और उद्योगों को यही पानी बचाए हुए है.
  • ओमान और यूएई: यहां सिर्फ बारिश के बाद थोड़ी देर के लिए चलने वाली वाड़ी नाम की अस्थायी धाराएं मिलती हैं, जो जल्दी ही सूख जाती हैं.
  • कतर और बहरीन: कतर अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्टेड पानी से पूरा करता है.

बहरीन पहले प्राकृतिक झरनों पर निर्भर था, लेकिन ओवरयूज और समुद्री पानी घुसने से अब लगभग पूरा देश डिसेलिनेशन पर टिका है.

Countries Without Rivers: अफ्रीका और यूरोप छोटे देश हैं और यहां चुनौतियां भी छोटी 

अफ्रीका के लीबिया और जिबूती में भी नदियां नहीं हैं, क्योंकि यहां का मौसम बहुत सूखा और रेगिस्तानी है. यूरोप में भी कुछ देश माल्टा, मोनाको और वेटिकन सिटी अपने छोटे भू-भाग और कम बारिश के कारण नदी बनने ही नहीं देते. यहां लोग ज्यादातर ग्राउंडवॉटर और रेनवॉटर स्टोरेज पर निर्भर रहते हैं. बहामास, मालदीव, किरीबाती, मार्शल आइलैंड्स, नाउरू, टोंगा और तुवालू जैसे देश चारों तरफ पानी से घिरे हैं, लेकिन मीठा पानी बेहद कम है. ये देश रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, छोटे एक्विफर और कुछ जगह डिसेलिनेशन पर चलते हैं. मालदीव जैसे देशों को बढ़ते सी-लेवल और ग्राउंडवॉटर के खारे होने से बड़ा खतरा है.

तकनीक और समझदारी ने बचाया जीवन

नदी न होने के बावजूद रियाद, दुबई और दोहा जैसे शहर दुनिया की आधुनिक जगहों में गिने जाते हैं. सारी कहानी का राज है जैसे कि बड़े डिसेलिनेशन प्लांट, स्मार्ट शहर योजना, बारिश का सही उपयोग और पानी के सख्त नियम. यह दिखाता है कि इंसान चाहे तो पानी-रहित जमीन पर भी जिंदगी और शहर खड़े कर सकता है.

बिना स्थायी नदी वाले सभी देश में शामिल है जैसे कि सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, ओमान, यमन, लीबिया, जिबूती, मालदीव, माल्टा, मोनाको, वेटिकन सिटी, नाउरू, किरीबाती, तुवालू, मार्शल आइलैंड्स और टोंगा.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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