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चीन की खुली पोल, हॉगकांग में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए नियुक्त किया टॉप क्लास के ऑफिसर

By Prabhat khabar Digital
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हॉगकांग में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए चीन ने नियुक्त किया टॉप क्लास के ऑफिसर
हॉगकांग में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए चीन ने नियुक्त किया टॉप क्लास के ऑफिसर
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China To Expand Top Office In Hong Kong चीन ने हांगकांग की विधायी प्रक्रिया में सुधार जारी रखा है और कम्युनिस्ट देश में वैचारिक लड़ाई को जारी रखने के लिए शहरी मामलों की देखरेख करने वाली बीजिंग के शीर्ष कार्यालय का विस्तार करने का प्लान तैयार किया है. इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रोपेगेंडा को कवर करने लिए यहां दो नए विभाग बनाए जाने का निर्णय लिया गया है. नए विभाग राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए जिम्मेदार होंगे और ये हांगकांग परिषद और मकाऊ मामलों के कार्यालय अंतर्गत काम करेंगे.

एचकेएमएओ के प्रवक्ता में से एक यांग गुआंग द्वारा शहर में मीडिया आउटलेट और जनमत के प्रबंधन के लिए विभाग का नेतृत्व करने की उम्मीद है. इन्होंने पहले 2019 में हांगकांग के सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों का नारा दिया था. हांगकांग मामलों से परिचित एक स्रोत के हवाले से बताया गया है कि एजेंसी के भीतर अतिरिक्त विभागों का निर्माण इस बात के संकेत दे रहे है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के लागू होने के बाद इसे एक बड़े कार्यभार का सामना करना पड़ रहा है. वर्तमान में एचकेएमएमओ के तहत सात विभाग सचिव और प्रशासन, सामान्य मामले, नीति और अनुसंधान, संपर्क, विनिमय और सहयोग, कानून, और संस्थागत पार्टी समिति (कार्मिक) है. बताया जा रहा है कि वैचारिक सुरक्षा को बढ़ाने के लिए बीजिंग द्वारा इसका विस्तार किया गया है.

उल्लेखनीय है कि लोकतंत्र समर्थक सैकड़ों लोगों को नेशनल सिक्योरिटी कानून के तहत गिरफ्तार कर उन्हें जेल में बंद करने के बाद चीन ने हांगकांग के इलेक्टोरेल सिस्टम को पूरी तरह से बदल दिया है. चीन ने हांगकांग में हांगकांग के नेता और हांगकांग की स्वायतत्ता को खत्म करने का ऐलान कर दिया है. बीजिंग द्वारा जारी किए गये वार्षिक पॉलिटिकल सिस्टम में इन शब्दों को हटा दिया गया है. यानि, एक देश दो सिस्टम को अब चीन ने खत्म कर दिया है. इसके साथ ही हांगकांग की स्वायत्तता भी हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है.

हांगकांग में जून 2019 से ही विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है. चीन द्वारा लाए गए प्रत्यर्पण विधेयक के विरोध में हांगकांग में बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुए थे, जो बाद में हिंसक भी हो गए थे. मालूम हो कि हांगकांग ब्रिटिश उपनिवेश रहा है. साल 1997 में इसे एक देश दो सरकार सिद्धांत के तहत चीन को सौंप दिया गया था. इस सिद्धांत के तहत हांगकांग को एक तरह की स्वायत्तता मिली हुई है.

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