Canada: कनाडा ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया और महिंदा राजपक्षे समेत चार पर लगाया प्रतिबंध

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Canada: कनाडा ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया और महिंदा राजपक्षे समेत चार पर लगाया प्रतिबंध

कनाडा ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे समेत चार राज्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे का कारण बताया. दरअसल चारों पर आरोप है कि 1983 से 2009 तक हुए श्रीलंका के नागरिक संघर्ष के दौरान मानवाधिकारों का घोर और व्यवस्थित उल्लंघन किया है.

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कनाडा सरकार ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे समेत चार राज्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. दो अन्य अधिकारियों में स्टाफ सार्जेंट सुनील रत्नायके और लेफ्टिनेंट कमांडर चंदना पी हेत्तियाराचिथे शामिल हैं.

कनाडा ने श्रीलंका के चार राज्य अधिकारियों पर क्यों लगाया प्रतिबंध

कनाडा ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे समेत चार राज्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे का कारण बताया. दरअसल चारों पर आरोप है कि 1983 से 2009 तक हुए श्रीलंका के नागरिक संघर्ष के दौरान मानवाधिकारों का घोर और व्यवस्थित उल्लंघन किया है.

सूचीबद्ध व्यक्तियों की मदद पर भी प्रतिबंध

कनाडा सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार बताया गया है कि विशेष आर्थिक उपाय (श्रीलंका) विनियम सूचीबद्ध व्यक्तियों पर कनाडा और कनाडा के बाहर के कनाडाई व्यक्तियों को इन सूचीबद्ध व्यक्तियों की किसी भी संपत्ति से संबंधित किसी भी गतिविधि में संलग्न होने या वित्तीय प्रदान करने से प्रतिबंधित किया जाता है. करके किसी भी लेनदेन (प्रभावी रूप से, एक संपत्ति फ्रीज) पर रोक लगाते हैं या उनसे संबंधित सेवाएं. विनियमों की अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्तियों को भी आप्रवासन और शरणार्थी संरक्षण अधिनियम के तहत कनाडा के लिए अस्वीकार्य माना जाता है.

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कनाडा के विदेश मंत्री ने फैसले का किया स्वागत

कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जोली ने फैसले का स्वागत किया और कहा, पिछले चार दशक से श्रीलंका के लोगों ने राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का सामना किया है.

2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे

मालूम हो महिंदा राजपक्षे 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे इस दौरान गोटाबाया के पास रक्षा विभाग था. गोटाबाया दो बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री भी रहे. महिंदा भी 2004 में श्रीलंका के प्रधानमंत्री चुने गये थे. दोनों पर ही मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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