Bangladesh Osman Hadi’s activists march Dhaka: बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद न्याय की मांग तेज हो गई है, जिसके चलते राजधानी ढाका में विरोध-प्रदर्शन और रैलियों का दौर शुरू हो गया है. इस मामले ने न केवल देश की आंतरिक राजनीति को झकझोरा है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी तनाव पैदा कर दिया है. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को ढाका में उनकी पार्टी ने एक दिवसीय रैली का आयोजन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के सभी ‘वर्क परमिट’ रद्द करने समेत कई सख्त कदम उठाने की मांग की.
‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘इंकलाब मंच’ ने चार सूत्री मांगें रखीं, जिनमें उन कथित हत्यारों को वापस लाने की मांग भी शामिल है, जिनके बारे में संगठन का दावा है कि वे भारत में शरण लिए हुए हैं. मंच का कहना है कि यदि भारत आरोपियों को सौंपने से इनकार करता है, तो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए. हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि हादी के हत्यारों के भारत में घुसने का कोई सबूत नहीं मिला है और अवैध सीमा पार करने के आरोप निराधार हैं.
ढाका में प्रदर्शनकारियों ने किया मार्च
अखबार के मुताबिक, ‘न्याय के लिए मार्च’ सुबह करीब 11:30 बजे शाहबाग से शुरू हुआ. प्रदर्शनकारी पिकअप वैन और पैदल चलते हुए साइंस लैब, मोहम्मदपुर, मीरपुर-10, उत्तरा, बसुंधरा, बड्डा, रामपुरा और जात्राबारी जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरते हुए शाम को दोबारा शाहबाग लौटे. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि इस मार्च का मकसद हादी की हत्या की जांच में तेजी लाना है. उन्होंने मांग की कि हत्यारों, साजिशकर्ताओं, सहयोगियों और उन्हें शरण देने वालों समेत सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले मुकदमा चलाया जाए.
फासीवादियों सहयोगियों पर भी साधा निशाना
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “हम हादी के खून को बेकार नहीं जाने देंगे”, “मेरा भाई कब्र में है, हत्यारा आजाद क्यों?” और “लाल-हरा झंडा, इंकलाब का झंडा- आप हादी को देख सकते हैं” जैसे नारे लगाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने सेना खुफिया महानिदेशालय के भीतर मौजूद कथित “फासीवादी सहयोगियों” की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और कानून के दायरे में लाने की भी मांग की.
हादी की मौत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध और हुए खराब
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. इन हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी. हादी की 12 दिसंबर को ढाका में एक चुनावी अभियान के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों में उम्मीदवार भी थे. इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. हादी की हत्या ने बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता को हवा दी है और भारत के साथ रिश्तों में भी तनाव बढ़ा है, क्योंकि कुछ संगठनों ने इस मामले में भारत की भूमिका का आरोप लगाया है. भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है.
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