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दोस्ती नहीं, हथियारों की तैनाती! चीन और ईरान को घेरने के लिए पाकिस्तान बनेगा अमेरिका का अड्डा

Updated at : 26 Sep 2025 9:48 AM (IST)
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America Uses Pakistan Military Strategy Deployment arms to encircle China Iran

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ

America Uses Pakistan Military Strategy: अमेरिका अब पाकिस्तान को सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि अपनी सैन्य रणनीति का जरिया बना रहा है. चीन और ईरान के करीब पहुंचने के लिए ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान की भौगोलिक अहमियत का फायदा उठा रहा है. जानिए पूरी रणनीति और हालिया घटनाक्रम.

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America Uses Pakistan Military Strategy: अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के दिनों में जो गर्मजोशी देखने को मिल रही है, वह सिर्फ कूटनीतिक दोस्ती नहीं है. शिकागो विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल पोस्ट के अनुसार, अमेरिका का मकसद पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य और रणनीतिक फायदे को पक्का करना है. यानी पाकिस्तान अब सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि एक ऐसा स्टार्टिंग प्वॉइंट बन गया है, जिससे अमेरिका चीन और ईरान के करीब पहुंच सकता है.

America Uses Pakistan Military Strategy: अमेरिका का रणनीतिक गेटवे

पोस्ट ने ANI से बातचीत में बताया कि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए बेहद अहम है. उनके शब्दों में, “वे एक ऐसा साथी हैं जो हमें एक्सेस देते हैं. अगर हमारा वहां मौजूदगी है, तो हम चीन और ईरान के और करीब पहुंच जाते हैं.” यहां समझने वाली बात यह है कि अमेरिका पाकिस्तान को सिर्फ कूटनीतिक साझेदार के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि एक लॉजिस्टिक प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

ट्रंप प्रशासन और सैन्य प्राथमिकता

पोस्ट ने ट्रंप प्रशासन की सैन्य-केंद्रित नीति पर भी प्रकाश डाला. हाल ही में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस को बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ वॉर नाम देने का कदम इस सोच को दिखाता है. उनके मुताबिक, “ट्रंप प्रशासन स्पष्ट कर चुका है कि सैन्य मामलों का केंद्र सरकार की गतिविधियों में अहम रोल है.” इस नीति का असर पाकिस्तान के महत्व पर साफ दिखाई देता है. बग्राम एयरबेस की मांग जैसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि अमेरिका पाकिस्तान को चीन की ओर सैन्य पहुँच बढ़ाने के लिए अहम मानता है.

ऑपरेशन मिडनाइट हैमर- उदाहरण के तौर पर

पोस्ट ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे अमेरिकी हमले (22 जून को ईरानी न्यूक्लियर साइट्स फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फहान पर) संभव हुए. उनके अनुसार, “यह सब इसलिए हो पाया क्योंकि अमेरिका के पास उन देशों में बेस और सैन्य कर्मी मौजूद थे. इस नजरिए से, ट्रंप प्रशासन अपनी सैन्य नीति को विदेशी नीति से ऊपर रख रहा है.”

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ओवल ऑफिस की मुलाकात और मीडिया का रहस्य

हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को ओवल ऑफिस में बुलाया. लेकिन इस मुलाकात की व्हाइट हाउस से कोई आधिकारिक तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया गया. वहीं, उसी दिन ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन के साथ बैठक के बाद लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बार केवल पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने तस्वीरें साझा कीं.

अमेरिका के लिए पाकिस्तान अब सिर्फ कूटनीतिक मित्र नहीं रहा. यह देश सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय पहुंच का अहम हिस्सा बन गया है. पॉल पोस्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के लिए सैन्य दृष्टिकोण इतना केंद्रीय है कि वे पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को उसी नजरिए से देख रहे हैं, और यह दोस्ती अब पूरी तरह रणनीतिक पटल पर खेली जा रही है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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