अफगानिस्तान में ISIS-K के खिलाफ अमेरिका ने इस्तेमाल किया था यह खास मिसाइल, जानें इसके बारे में

अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम धमाकों का बदला लेते हुए अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की थी. जिसमें ISIS-K के दो आतंकी मारे गए थे. खबर है कि अमेरिका ने इस जवाबी कार्रवाई को सटीक बनाने के लिए एक खास हेलफायर मिसाइल का इस्तेमाल किया था.
अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट के बाहर हुए बम ब्लास्ट के जवाब में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों पर एयर स्ट्राइक किया था. हमले में ISIS-K के आतंकी मारे गए थे. इस हमले को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने जिस ब्रह्मास्त्र का इस्तमाल किया था, उसका नाम हेलफायर मिसाइल है.
इस्लामिक स्टेट आतंकियों पर हुई ये एयर स्ट्राइक MQ-9 रीपर ड्रोन से की गई थी. यह ड्रोन लेजर-निर्देशित हथियारों और सटीक हेलफायर फायर मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है. हालांकि इस हथियार के बारे आमजन ज्यादा नहीं जानते, तो चलिए आपको बताते है कि क्या है इस मिसाइल और ड्रोन की खासियत.
अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान पर हवाई हमले में हेलफायर मिसाइल का इस्तेमाल किया. यह सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसे काफी घातक और टारगेट को सटीक निशाना बनाने के लिए पहचाना जाता है. एयरस्ट्राइक के दौरान हेलफायर मिसाइल ब्लास्ट नहीं करती है, बल्कि उसमें से चाकू जैसे ब्लेड्स निकलते हैं जोकि आतंकियों या फिर जिसको भी टारगेट किया गया है, उसके लिए प्राणघातक साबित होते हैं. इसमें खास बात यह है कि इस मिसाइल हमला करने के दौरान नागरिकों को भी ज्यादा चोट नहीं पहुंचाती है.
इस मिसाइल में छह ब्लेड कवर के अंदर छुपे होते हैं, जो टारगेट पर पहुंचने के कुछ ही सेकंड पहले बाहर आते है. ये बाकी मिसाइल की तरह टारगेट पर पहुंचने के बाद फटती नहीं है. ये मिसाइल अपने टारगेट को छह ब्लेड से मारती है.
इस हथियार का उपयोग उच्च मूल्य के लक्ष्यों की लक्षित हत्याओं को अंजाम देने के लिए किया जाता है.पिछले तीन वर्षों में इसके उपयोग के केवल 11 पुष्ट मामले सामने आए हैं.इनमें सबसे अधिकांश इंस्तमाल सीरिया में हुआ. वहीं अब तब कथित तौर पर मिसाइल का इस्तेमाल यमन,सोमालिया, लीबिया और अफगानिस्तान में किया गया है.
R9X मिसाइल के इस्तेमाल का हाल ही में सबसे चर्चित मामला 2017 का है. अमेरिका ने अल-कायदा के डिप्टी लीडर अबु अल-खैर अल-मसरी को सीरिया के इदलिब प्रांत में इसी मिसाइल से मारा था. आतंकी गाड़ी पर ड्रोन से मिसाइल दागी गई थी. कार की छत पूरी खुल गई थी जैसे कि किसी बड़े रेजर ने धातु को काट दिया. 2017 में इस मिसाइल के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी.
इन ब्लेडों को संभवतः ‘निंजा बम’ या ‘फ्लाइंग जिन्सू’के नाम से भी जाना जाता है. इसका मतलब यह भी है कि मिसाइल के प्रभाव का दायरा कम से कम होता है.हालांकि जो इसके भीतर आते हैं, उन्हें विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ता है.
इस शक्तिशाली मिसाइल की कोई सार्वजनिक तस्वीर नहीं है, लेकिन हमले की जगहों से मिले टुकड़ों ने शोधकर्ताओं को इस बात का शिक्षित अनुमान लगाने की अनुमति दी है कि यह कैसा दिखता है. छह ब्लेड मिसाइल के मुख्य भाग से बाहर की ओर निकलते हैं और आसानी से छतों और कारों के निर्माण में सक्षम हैं.यह मिसाइल हल्का होता है, जिससे एमक्यू-9 रीपर, जिसे प्रीडेटर ड्रोन के रूप में भी जाना जाता है.
MQ9 रीपर, अपने इनबिल्ट सेंसर और रडार का इस्तेमाल करके लक्ष्य का पता लगा सकता है. इसमें 27 घंटे से अधिक की उड़ान भरने की क्षमता होती है और 6000 नॉटिकल मील की सीमा और 50,000 फीट तक की उड़ान क्षमता के साथ लगभग 1700 किलोग्राम तक का लोड ले जा सकता है. इतना ही नहीं, यह हेलफायर मिसाइल और लेजर गाइडेड बॉम्ब्स को भी ले जा सकते हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार निंजा बम का वजन सिर्फ 45 किलोग्राम है और इसे हमवीस, हेलीकॉप्टर और विमान द्वारा भी लॉन्च किया जा सकता है.
2010 के आसपास तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कहने पर R9X वेरिएंट को बनाया गया था. ओबामा का दबाव था कि अमेरिका युद्ध क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक्स के समय नागरिकों की मौत और संपत्ति को नुकसान की संभावना कम से कम करे. पारंपरिक हेलफायर मिसाइल में करीब 10 किलो का विस्फोटक वारहेड होता है. इसे आतंकियों के बड़े समूह पर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसका इम्पैक्ट एरिया बड़ा है.
Posted By Ashish Lata
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