अफगानिस्तान: महिलाओं पर प्रतिबंध का लड़कों ने कुछ यूं किया विरोध, सामने आया वीडियो

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 25 Dec 2022 4:46 PM

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वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा गया कि नंगरहार विश्वविद्यालय के छात्रों ने लड़कियों को विश्वविद्यालय में नहीं प्रवेश करने देने के तालिबान सरकार के फैसले का विरोध किया है. यहां देखें वीडियो

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अफगानिस्तान के शैक्षिक संस्थानों में महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने के तालिबान सरकार ने फरमान का विरोध जारी है. इसके विरोध में कई पुरुष अफगानिस्तान में कक्षाओं से बाहर चले गये जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों के कई प्रोफेसर भी महिलाओं के समर्थन में उतरे और कक्षा के बाहर चले गये. यहां चर्चा कर दें कि इससे पहले, तालिबान के शिक्षा मंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में महिलाओं को पढ़ने से रोकने के शासन के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि हमने लड़कियों को उचित हिजाब पहनने के लिए कहा लेकिन वो ऐसा करतीं नजर नहीं आयीं. महिलाओं ने ऐसे कपड़े पहने जैसे वे किसी शादी समारोह में जा रही हों.

वीडियो हुआ वायरल

तालिबान सरकार ने फरमान के विरोध में छात्र और प्रोफेसर भी उतर गये हैं. Afghan Peace Watch नाम के ट्विटर वॉल से एक वीडियो रिलीज किया गया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चला है. इस वीडियो में लगातार प्रतिक्रिया आ रही है और लोग महिलाओं के समर्थन में बातें करते नजर आ रहे हैं. वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा गया कि नंगरहार विश्वविद्यालय के छात्रों ने लड़कियों को विश्वविद्यालय में नहीं प्रवेश करने देने के तालिबान सरकार के फैसले का विरोध किया है. इन छात्रों ने तालिबान सरकार के प्रतिबंध का विरोध करने के लिए अपनी परीक्षा छोड़ दी.


विश्वविद्यालयों में महिलाओं पर प्रतिबंध क्यों

-तालिबानी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली महिलाएं नियम का पालन नहीं कर रहीं हैं. वो पॉपर ड्रेस कोड पहनकर नहीं आ रहीं हैं. उनके पहनावे को देखकर लगता है कि वे किसी शादी में जा रहीं हैं.

-विश्वविद्यालयों से निकलने के बाद महिलाएं हिजाब भी नहीं पहन रहीं हैं.

-विश्वविद्यालयों में पुरूष और महिलाएं फ्री होकर पढ़ाई कर रहे हैं.

Also Read: अफगानिस्तान में तालिबान को बायोलॉजी के सब्जेक्ट से है दिक्कत, अब महिलाओं के लिए आया नया फरमान

-विश्वविद्यालयों में कुछ विषय हैं जो इस्लाम के खिलाफ हैं. साइंस के कुछ सबजेक्ट हैं जो महिलाओं के लिए सुटेबल नहीं हैं. तालिबान का इशारा बायोलॉजी के सब्जेक्ट से है.

-इंजिनियरिंग, एग्रीकल्चर और कुछ दूसरे सब्जेक्ट जो हैं वो अफगान के कल्चर के खिलाफ हैं जिसे महिलाओं को पढ़ने से बचना चाहिए.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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