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शी चिनफिंग से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखवी मामले पर चिंताओं से कराया अवगत

Updated at : 09 Jul 2015 1:22 AM (IST)
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शी चिनफिंग से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखवी मामले पर चिंताओं से कराया अवगत

उफा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी को जेल से रिहा करने के मामले में पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से कार्रवाई करने के प्रस्ताव को चीन द्वारा ब्लॉक किए जाने पर भारत की गंभीर चिंता से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को अवगत कराया. ब्रिक्स और शंघाई […]

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उफा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी को जेल से रिहा करने के मामले में पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से कार्रवाई करने के प्रस्ताव को चीन द्वारा ब्लॉक किए जाने पर भारत की गंभीर चिंता से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को अवगत कराया.

ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से पहले दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट तक चली इस बैठक के दौरान मोदी ने चीन द्वारा बनाए जा रहे 46 अरब डॉलर लागत वाले आर्थिक गलियारे पर भी भारत ने चिंता जतायी. यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है.
विदेश सचिव एस. जयशंकर से जब पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री ने लखवी मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के कदम को चीन द्वारा ब्लाक किए जाने का मुद्दा उठाया तो उन्होंने हां में उत्तर दिया.मोदी-शी बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जयशंकर ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन द्वारा प्रस्ताव को ब्लाक किए जाने का मुद्दा मजबूती से उठाया. उन्होंने भारत की चिंताओं से अवगत कराया. पिछले एक वर्ष में दोनों नेताओं की यह पांचवी बैठक है.
मोदी की टिप्पणियों पर विस्तार से बात करते हुए, जयशंकर ने कहा, प्रधानमंत्री ने हमारी चिंताओं को पूरी तरह स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, मैं मान रहा हूं कि जिस स्पष्टवादिता और प्रत्यक्ष रुप से यह बात कही गयी उससे चीनी पक्ष प्रभावित है. ऐसा महसूस हुआ कि हमें उसपर बात करते रहना चाहिए. यह पूछने पर कि मुद्दे पर बातचीत का प्रारुप क्या होगा, उन्होंने कहा कि नेता जहां छोडेंगे, अधिकारी वहां से शुरू करेंगे. उन्होंने कहा, कोई विशेष तंत्र नहीं है. विदेश मंत्रालय (चीनी) दूतावास के साथ बात कर सकती है. अनेक प्रक्रियाएं हैं.
उन्होंने कहा, कोई विशेष तंत्र नहीं है. विदेश मंत्रालय (चीनी) दूतावास के साथ बात कर सकती है. अनेक प्रक्रियाएं हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की पिछले महीने हुई बैठक के दौरान भारत ने लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर लखवी को सुनवायी के दौरान रिहा किए जाने को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन चीन के प्रतिनिधि ने इस आधार पर प्रस्ताव को ब्लाक कर दिया कि भारत ने इस संबंध में समुचित सूचनाएं मुहैया नहीं करायी हैं.
चीन द्वारा दिए गए कमजोर साक्ष्यों के सिद्धांत को खारिज करते हुए, जयशंकर ने कहा, साक्ष्यों का मुद्दा नहीं है.पूरी दुनिया जानती है कि लखवी की भूमिका (26-11 हमलों) क्या थी? यदि हमारे साक्ष्य कमजोर थे तो अन्य (संयुक्त राष्ट्र में अन्य देशों) ने इसे क्यों स्वीकार किया.
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