अंतरराष्ट्रीय अदालत में 20 साल में दूसरी बार भारत से हारा पाक, चीन के जज भी गये बहुमत के साथ

Updated at : 18 Jul 2019 5:56 AM (IST)
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अंतरराष्ट्रीय अदालत में 20 साल में दूसरी बार भारत से हारा पाक, चीन के जज भी गये बहुमत के साथ

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आइसीजे) ने बुधवार को कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक बरकरार रखते हुए पाकिस्तान से इस पर पुनर्विचार करने को कहा. दो साल और दो महीने तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट के 16 जजों ने 15-1 के बहुमत से कुलभूषण की फांसी की सजा पर रोक लगा दी. […]

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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आइसीजे) ने बुधवार को कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक बरकरार रखते हुए पाकिस्तान से इस पर पुनर्विचार करने को कहा.
दो साल और दो महीने तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट के 16 जजों ने 15-1 के बहुमत से कुलभूषण की फांसी की सजा पर रोक लगा दी. 20 साल में यह दूसरा मौका है, जब पाकिस्तान की आइसीजे में हार हुई है. इससे पहले, 10 अगस्त 1999 को वायुसेना ने कच्छ में पाक नेवी के एयरक्राफ्ट एटलांटिक को मार गिराया था. इसमें सवार सभी 16 सैनिकों की मौत हो गयी थी.
पाकिस्तान का दावा था कि एयरक्राफ्ट को उसके एयरस्पेस में मार गिराया गया. उसने इस मामले में भारत से छह करोड़ डॉलर का मुआवजा मांगा. आइसीजे की 16 जजों की बेंच ने 21 जून, 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया.
तीन मार्च, 2016 को बलूचिस्तान प्रांत में ईरान की सीमा से कुछ किलोमीटर दूर मशाकेल शहर से गिरफ्तार किये गये जाधव पर पाक ने हुसैन मुबारक पटेल नाम से पाक में रहने और भारत के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया था.
भारत को इस गिरफ्तारी के बारे में इस्लामाबाद ने 25 मार्च, 2016 को सूचना दी. 10 अप्रैल, 2017 को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को पाक में जासूसी और तोड़फोड़ की गतिविधियों में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनायी. आठ मई को भारत ने पाकिस्तान सैन्य अदालत के फैसले के खिलाफ आइसीजे में अपील की. नौ मई को आइसीजे ने कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी.
2 साल 2 महीने चली सुनवाई, आइसीजे के 16 जजों ने कुलभूषण के पक्ष में 15-1 के बहुमत से फैसला सुनाया
आइसीजे में पाकिस्तान ने बोला झूठ पर झूठ, हर बार खुली उसकी पोल
हेग स्थित आइसीजे में अब तक हुई सुनवाई के दौरान भारत की दलीलों के आगे पाकिस्तान लाचार नजर आया. इस दौरान पाकिस्तान ने कई बार झूठ का सहारा भी लिया, हालांकि समय के साथ उसके झूठ की परतें खुल ही गयीं.
पहला झूठ : दक्षिण बलूचिस्तान से कुलभूषण को किया गिरफ्तार
पाक की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि भारतीय जासूस कुलभूषण को दक्षिणी बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया. अपने दावे के पक्ष में पाक कोई सबूत पेश नहीं कर पाया.
दूसरा झूठ : आइसीजे में पाकिस्तान ने कहा- जाधव के खिलाफ हैं सबूत
इंटरनेशनल कोर्ट में पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास जाधव के खिलाफ कई सबूत हैं. जाधव ने पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों से संबंधित खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान किया है. लेकिन, पाक यह कभी साबित नहीं कर पाया कि जाधव ने वहां जासूसी की थी.
तीसरा झूठ : जाधव ने स्वीकारा- विध्वसंक गतिविधियों में था शामिल
22 जून, 2017 को कुलभूषण जाधव ने पाक सैन्य प्रमुख के समक्ष दया याचिका दायर की. पाक आर्मी प्रवक्ता ने दावा किया था कि जाधव ने अपनी दया याचिका में स्वीकार किया है कि वह बलूचिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में शामिल था. हालांकि, यह दावा भी पहले की तरह ही झूठा निकला.
100 बार काउंसलर एक्सेस की मांग पाक ने ठुकरायी
पहले तो पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के मामले में एकतरफा कार्रवाई की और जबरन बयान दर्ज करवा कर उसे फांसी की सजा सुना दी. भारत ने इस दौरान करीब 20 बार कुलभूषण से मिलने की इजाजत मांगी, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार इसे अनसुना किया. यहां तक कि भारत ने करीब 100 बार काउंसलर एक्सेस देने की मांग की, लेकिन पाक ने हर बार ठुकरा दिया.
आगे क्या : सुरक्षा परिषद में जा सकता है मामला
आइसीजे के फैसले के बाद सवाल है कि क्या अब पाक कुलभूषण को रिहा करेगा और उनकी वतन वापसी हो सकेगी? हालांकि, इस मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड खराब रहा है. इतनी आसानी से उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले के बाद कुलभूषण जाधव को रिहा कर देगा. ऐसे में भारत मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी ले जा सकता है.
पाक को झटका, चीन के जज भी गये बहुमत के साथ
बीजिंग : कुलभूषण जाधव मामले में आइसीजे ने बुधवार को जो फैसला सुनाया है, उसमें चीन की न्यायाधीश बहुमत के साथ हैं. इसे पाकिस्तान के लिए एक झटका माना जा रहा है. आइसीजे में न्यायाधीश शुए हांकिन्स का मत 16 सदस्यीय पीठ में 15 न्यायाधीशों के मतों में शामिल है. इसे चीन में भारत की राजनयिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है.
एक दिन की सुनवाई में 30 लाख लेने वाले साल्वे ने सिर्फ एक रुपये में लड़ा केस
भारत के सबसे महंगे और मशहूर वकील हरीश साल्वे ने आइसीजे में कुलभूषण जाधव का केस लड़ा. कहा जाता है कि वह एक पेशी के कम-से-कम 4.5 लाख रुपये लेते हैं, तो एक दिन की उनकी फीस 30 लाख रुपये है.
उसी हरीश साल्वे ने सिर्फ एक रुपये में कुलभूषण जाधव का केस लड़ा. साल्वे ने आइसीजे को दिया धन्यवाद : कुलभूषण मामले में भारत की बड़ी जीत पर वकील हरीश साल्वे ने लंदन में कहा कि पाकिस्तान की दलील खारिज. आइसीजे का धन्यवाद. आइसीजे के फैसले से हर भारतीय खुश है. वकील के तौर पर मैं भी खुश हूं. कोर्ट के फैसले से मुझे भी राहत मिली है.
क्या हुआ अब तक
2016
03 मार्च : कुलभूषण जाधव जासूसी के आरोप में गिरफ्तार
25 मार्च : जाधव के गिरफ्तारी की पहली रिपोर्ट आयी सामने. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया
29 मार्च : भारत ने जाधव से मुलाकात के लिए पहला काउंसल एक्सेस की मांग की, पाकिस्तान ने अस्वीकार कर दिया
2017
10 अप्रैल ‍: पाक आर्मी कोर्ट ने जाधव को जासूसी और तोड़फोड़ में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनायी
08 मई : भारत ने पाकिस्तान सैन्य अदालत के फैसले के खिलाफ हेग स्थित आइसीजे में अपील दायर की
09 मई : आइसीजे ने जाधव की फांसी पर रोक लगायी
2018
03 अक्टूबर : आइसीजे ने 18 फरवरी, 2019 से चार दिवसीय जनसुनवाई करने की घोषणा की
2018
18 फरवरी : आइसीजे ने सुनवाई शुरू की, भारत-पाक में जमकर बहस हुई, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
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