इराक में हिंसा के बीच चुनाव

Published at :30 Apr 2014 5:09 PM (IST)
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इराक में हिंसा के बीच चुनाव

बगदाद : अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद आज इराक में पहले चुनाव में लोगों ने आतंकवादी हमलों को धता बताते हुए मतदान किया तथा प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने मतदान करने के बाद जीत का दावा किया. मतदान केंद्रों में सुबह से लंबी लंबी कतार लग गयी. वहां सुरक्षा के कडे प्रबंध किए गए […]

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बगदाद : अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद आज इराक में पहले चुनाव में लोगों ने आतंकवादी हमलों को धता बताते हुए मतदान किया तथा प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने मतदान करने के बाद जीत का दावा किया.

मतदान केंद्रों में सुबह से लंबी लंबी कतार लग गयी. वहां सुरक्षा के कडे प्रबंध किए गए थे. हाल में चुनाव प्रचार अभियान में काफी हिंसा देखने को मिली. पूर्वाह्न मतदान में थोडी कमी आयी लेकिन दोपहर बाद मतदान के तेज होने की संभावना है. शाम छह बजे तक वोट डाले जायेंगे. मतदाताओं के पास खराब जनसेवाओं से लेकर व्यापक भ्रष्टाचार जैसी शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन महीने भर चला चुनाव प्रचार सुरक्षा की स्थिति में भारी गिरावट पर ध्यान केंद्रित रहा. मलिकी ने बगदाद की अतिसुरक्षा वाले ग्रीन जोन के रशीद होटल में मतदान केंद्र पर वोट डाला. उन्होंने मतदाताओं को बडी संख्या में मतदान केंद्र पर पहुंचने और मतदान करने के लिए प्रेरित किया और सत्ता में वापसी के प्रति विश्वास व्यक्त किया.

मलिकी ने कहा, ‘‘आज बडी सफलता है और पिछले चुनावों से भी ज्यादा सफल , इराकी जमीन पर कोई विदेशी सैनिक नहीं है.’’उन्होंने राष्ट्रीय एकता सरकार से हटकर राजनीतिक बहुमत वाली सरकार का आह्वान किया. उन्होंने पूरे विश्वास के साथ पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारी जीत पक्की है लेकिन हम इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि हमारी जीत कितनी बडी होगी. ’’चुनाव से पहले राजधानी बगदाद और अन्य प्रमुख शहर पोस्टरों से पाट दिए गए थे. दिसंबर 2011 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यह पहला चुनाव है.

राजनीतिक दलों ने रैलियों का आयोजन किया और भावी सांसदों ने टेलीविजन पर गर्मागर्म बहस में हिस्सा लिया. हालांकि राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मतदाताओं से मुद्दों के बजाय धार्मिक, जातीय या कबीलाई आधार पर वोट मांगते नजर आए. विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि मतदाता अपनी जान जोखिम में डालने के बाद घरों में कैद रहना पसंद करेंगे. पिछले दो दिन में उग्रवादियों ने करीब 90 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. दो करोड से अधिक मतदाता संसद की 328 सीटों पर नौ हजार उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.

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