भारत में बाढ़ और सूखे का जोखिम : अध्ययन

वाशिंगटन : स्टैंफोर्ड के वैज्ञानिकों ने मॉनसून के दौरान बेहद पानी गिरने अथवा शुष्क मौसम प्रणाली में उल्लेखनीय बदलाव आने के बारे में आगाह किया है इससे मध्य भारत में बाढ़ और सूखे का जोखिम बढ़ गया है. दो भारतीय मूल के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं के अनुसार दक्षिण एशियाई मॉनसून सत्र के दौरान अत्यधिक उमस […]
वाशिंगटन : स्टैंफोर्ड के वैज्ञानिकों ने मॉनसून के दौरान बेहद पानी गिरने अथवा शुष्क मौसम प्रणाली में उल्लेखनीय बदलाव आने के बारे में आगाह किया है इससे मध्य भारत में बाढ़ और सूखे का जोखिम बढ़ गया है. दो भारतीय मूल के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं के अनुसार दक्षिण एशियाई मॉनसून सत्र के दौरान अत्यधिक उमस का मौसम और कई शुष्क दौर, दोनों की ही तीव्रता हाल के दशकों में बढ़ी है.
स्टैंफोर्ड वुड्स इंस्टीट्यूट फॉर इनवार्यन्मेन्ट में सीनियर फैलो नोह डिफेनबॉग ने कहा कि हम मौसम में बरसात के चरम स्तर को देख रहे हैं, जो कि वर्ष में कुछेक मौकों पर होता है लेकिन इसका काफी लंबा असर हो सकता है. दक्षिण एशिया में हर साल गर्मी के मौसम में हवा के जरिये बढने वाली मौसम प्रणाली ही यहां 85 प्रतिशत वर्षा के लिए जिम्मेदार है. इसका देश के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान होता है. अध्ययन टीम की प्रमुख दीप्ति सिंह ने कहा कि मॉनसून सत्र के महीनों के दौरान बरसात के अपने चरम तक पहुंचाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पानी की कुल प्राप्ति महत्वपूर्ण है.
* 24 परियोजनाएं रद्द !
पर्यावरण मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति ने उत्तराखंड में 24 बिजली परियोजनाओं को रद्द करने की सिफारिश की है. समिति ने पिछले साल उत्तराखंड में आयी बाढ़ व भूस्खलन से हुई तबाही के लिए पनबिजली संयंत्रों को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया. 23 परियोजनाओं का जैव विविधता पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
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