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West Bengal : ’बड़ो लोकेर बिटीलो ’गीत के रचयिता बीरभूम के रतन कहार को पद्मश्री

Updated at : 26 Jan 2024 4:51 PM (IST)
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West Bengal : ’बड़ो लोकेर बिटीलो ’गीत के रचयिता बीरभूम के रतन कहार को पद्मश्री

बीरभूम के भादू लोक संगीत गायक रतन कहार को जगह मिली है. जैसे ही रतन कहार के पद्मश्री के लिए चयन की खबर फैली, बीरभूम के निवासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. पद्मश्री जैसा सम्मान पाकर रतन बेहद खुश हैं.

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बीरभूम, मुकेश तिवारी : . ’बड़ो लोकेर बिटिलो लंबा लंबा चूल ..’ फेमस बंगला गीत के रचयिता बीरभूम जिले के रतन कहार (Ratan Kahar) को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है. गुरुवार रात उन्हे फोन पर यह सूचना मिली है की उन्हे पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा. यह खबर मिलते ही भादू लोक गायक रतन कहार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. हालांकि जीवन में बहुत कुछ पाने की तम्माना थी लेकिन सब कुछ नही मिल पाता . आखिर कार उनकी यह तमन्ना पूरी होने जा रही है. फोन पर यह खबर आने के बाद रतन कहार और कुछ नहीं पूछ सके. उनकी आवाज खुशी से भरी थी. मानो उस क्षण कोई अकल्पनीय घटना घट गई हो.

बीरभूम के भादू लोक संगीत गायक रतन कहार को जगह मिली

केंद्र सरकार ने इस साल कुल 34 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित करने के लिए चुना है. इनमें बीरभूम के भादू लोक संगीत गायक रतन कहार को जगह मिली है. जैसे ही रतन कहार के पद्मश्री के लिए चयन की खबर फैली, बीरभूम के निवासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. कई लोगों का कहना है कि जिंदगी के मोड़ पर आखिरकार उन्हें वह सम्मान मिल ही गया जिसके वे हकदार थे. पद्मश्री जैसा सम्मान पाकर रतन बेहद खुश हैं. अनुभवी कलाकार के शब्दों में, “मैं बहुत खुश हूं, बहुत गौरवान्वित हूं.” इतना सम्मान मिलने से पहले उन्होंने गुस्से में ये भी कहा था कि उन्हें कुछ आम लोगों के अलावा किसी से सम्मान नहीं मिला.

पुरस्कार ने रतन कहार के जीवन में एक नया अध्याय लिखा दिया है

पद्मश्री पुरस्कार ने रतन कहार के जीवन में एक नया अध्याय लिखा दिया है. रतन कहार ने लंबे समय तक भादु, टुसु, अलकाप, झुमुर जैसे लोक गीतों की रचना और प्रदर्शन किया है. उनका सबसे लोकप्रिय गाना ‘ बड़ो लोकेर बिटी लो’ है’. एक समय इस गाने को लेकर काफी विवाद हुआ था. रैप सिंगर बादशा कुछ साल पहले गाने को लेकर विवादों में थे.उन्होंने रतन कहार की अनुमति के बिना इस गाने का इस्तेमाल किया था. हालांकि, बाद में जब मामला उनके ध्यान में आया तो उन्होंने माफी मांगी और रतन कहार की आर्थिक मदद की थी.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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