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कश्‍मीर हिंसा पर बोले पीएम मोदी, संविधान के दायरे में हो वार्ता

Updated at : 23 Aug 2016 9:05 AM (IST)
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कश्‍मीर हिंसा पर बोले पीएम मोदी, संविधान के दायरे में हो वार्ता

नयी दिल्ली /श्रीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में व्याप्त स्थिति को लेकर गहरी पीड़ा जतायी और संविधान के दायरे में स्थायी समाधान निकालने के लिए वार्ता करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विपक्षी नेताओं के एक शिष्टमंडल से यह बात कही. मोदी ने कहा कि हाल की अशांति के दौरान […]

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नयी दिल्ली /श्रीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में व्याप्त स्थिति को लेकर गहरी पीड़ा जतायी और संविधान के दायरे में स्थायी समाधान निकालने के लिए वार्ता करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विपक्षी नेताओं के एक शिष्टमंडल से यह बात कही. मोदी ने कहा कि हाल की अशांति के दौरान जान गंवानेवाले देश का ही हिस्सा हैं, चाहे वे युवा हों, या फिर सुरक्षा बल के जवान या पुलिसकर्मी. इससे पूरे देश को पीड़ा होती है. आज पूरा देश जम्मू-कश्मीर के साथ खड़ा है. मोदी ने घाटी में सामान्य स्थिति बहाली की अपील की, जहां पिछले 45 दिनों से अशांति जारी है. इसके साथ ही लोगों के कल्याण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहरायी. सभी राजनीतिक दलों से कहा कि वे राज्य की समस्याओं का स्थायी व दीर्घकालिक हल निकालने के लिए साथ मिल कर काम करें. इस बीच गृह मंत्री राजनाथ िसंह ने कश्मीर के ताजा हालात की समीक्षा की.

अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद से बनेगी बात
इससे पहले नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल प्रधानमंत्री मोदी से मिला और उसने घाटी में वर्तमान संकट के समाधान के लिए एक राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने और पूर्व की गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं होने देने का आग्रह किया. शिष्टमंडल ने एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें कहा गया कि अशांति दूर करने के लिए सभी पक्षों के साथ विश्वसनीय व अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद शुरू करना चाहिए. पैलेट गन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाये. इस बीच जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विपक्ष नेताओं के पीएम मोदी से मुलाकात पर कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. सभी का इरादा घाटी में शांति लाना है.

कश्मीर : हालात का न्यायिक आदेश से नहीं, राजनैतिक तरीके से होगा समाधान : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कश्मीर में चल रही मौजूदा समस्या से राजनैतिक तौर पर निपटा जाना चाहिए और सबकुछ न्यायिक मानदंडों के भीतर नहीं संभाला जा सकता. शीर्ष अदालत ने सॉलीसीटर जनरल से कहा कि वह ऐक्टिविस्ट वकील व जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के नेता भीम सिंह की इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मुलाकात में मदद करें. प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मुद्दे के विभिन्न आयाम हैं. इसलिए इससे राजनैतिक तौर पर निपटा जाना चाहिए. इसके अलावा सबकुछ को न्यायिक मानदंडों के भीतर नहीं संभाला जा सकता. कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में राज्य की विपक्षी पार्टियों और प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात का भी जिक्र किया.

जम्मू -कश्मीर में 12 साल बाद बीएसएफ की तैनाती
श्रीनगर. सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को 12 साल के अंतराल के बाद सोमवार को जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी में तैनात किया गया. इससे पहले बीएसएफ को जम्मू-कश्मीर में 2004 में आतंकवाद रोधी अभियानों से हटा लिया गया था. 2004 के बाद यह पहली बार है, जब बीएसएफ को शहर में सक्रिय ड्यूटी के लिए बुलाया गया है. 1991 के बाद से तकरीबन 13 साल तक कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियान चलाने वाले बीएसएफ की जगह 2004 में सीआरपीएफ ने ले ली थी. इसके बाद से बीएसएफ के जवान नियंत्रण रेखा व अंतरराष्ट्रीय सीमा की हिफाजत के अपने मुख्य कर्तव्य को निभाने रहे.

कश्मीर को भारत से अलग रख कर सोचना भी नागवार : आडवाणी

जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत और कश्मीर को अलग-अलग देखना ठीक नहीं है. कश्मीर को भारत से अलग रखकर सोचना भी हमें नागवार गुजरता है. कश्मीर में अलगाववाद की आवाज बुलंद हो रही है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जायेगा. उन्होंने ये भी कहा कि कश्मीर के कुछ छोटे संगठन आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं.

वाजपेयी के समय कश्मीर मुद्दा था समाधान के निकट : भागवत

आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आगरा में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में कश्मीर मुद्दा समाधान के निकट पहुंच गया था, लेकिन बाद की सरकारों ने वाजपेयी के प्रयासों को आगे नहीं बढ़ाया. भागवत ने कहा कि कश्मीरी लोग पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते. हमें कश्मीर में लोगों के बीच राष्ट्रीयता की भावना विकसित करनी चाहिए. उन्होंने याद किया कि कैसे वाजपेयी ‘कश्मीर मुद्दे का समाधान करने के करीब पहुंच गये थे.

मोदी के बयान का समर्थन करनेवाले बलूच नेताओं पर केस

इधर, बौखलाये पाकिस्तान ने उन बलूच नेताओं के खिलाफ देशद्रोह के केस दर्ज किये हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बलूच पर दिये बयान की तारीफ की थी. पाकिस्ताने ने छात्र नेता बनुक करीमा बलूज समेत तीन नेताओं पर पांच -पांच केस दर्ज किये हैं. करीमा बलूज के अलावा हरबियार मर्री, ब्राह्मदग बुगती हैं, जिनके खिलाफ केस दर्ज किये गये हैं. 15 अगस्त को पीएम मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान के हालातों पर चिंता जतायी थी और उन्होंने बलूचिस्तान, गिलगिट और पीओके के लोगों का आभार जताने के लिए धन्यवाद जताया था.

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