US में बंदूकों की हिंसा और ओबामा के आंसू

वाशिंगटन : भावुकता और संवेदना किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करती है. चाहे वह सुपर पावर अमेरिका के राष्ट्रपति ही क्यों ना हों.आंसू भावनाओं के बहने के प्रतीक होते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उस वक्त रो पड़े जब वह बंदूकों पर लगाम लगाने की गुहार लगा रहे थे. ओबामा का मानना है कि प्रति […]
वाशिंगटन : भावुकता और संवेदना किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करती है. चाहे वह सुपर पावर अमेरिका के राष्ट्रपति ही क्यों ना हों.आंसू भावनाओं के बहने के प्रतीक होते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उस वक्त रो पड़े जब वह बंदूकों पर लगाम लगाने की गुहार लगा रहे थे. ओबामा का मानना है कि प्रति वर्ष बंदूकों से जुड़ी हिंसा की वजह से कई लोग काल के गाल में समा जाते हैं.
न्यूटाऊन में तीन साल पहले एक हिंसा में जान गंवाने वाले 20 स्कूली छात्रों की याद में आयोजित एक समारोह में ओबामा उन्हें याद करते हुए रो पड़े. राष्ट्पति का कहना था कि जब भी मैं उन बच्चों को याद करता हूं तो बहुत दुखी हो जाता हूं. इसलिए लोगों को ऐसी कांग्रेस की मांग करनी चाहिए जो हथियार की लॉबी के सामने सर उठाकर खड़ा होने की हिम्मत रखते हों.
राष्ट्रपति ओबामा ने अमेरिका के उन बंदूक लॉबी को चेतावनी दी और कठोर शब्दों में कहा कि सरकार के काम में रुकावट डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अब उनकी इतनी हिम्मत नहीं कि वे अमेरिका को बंधक बना सकें.
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