आम आदमी को डिजिटल सशक्तिकरण के जरिये देशभर में सुशासन अभियान को तीव्र गति देने के लिए केंद्र सरकार महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया सप्ताह’ की शुरुआत करने जा रही है. इस योजना को डिजिटल रूप से सशक्त भारत की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि इस योजना से देश के विकास की रफ्तार बढ़ेगी, आम आदमी की जिंदगी बेहतर व आसान हो सकेगी.
डिजिटल इंडिया को एक गेम चेंजर कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा है. केंद्र सरकार चाहती है कि देश के हर नागरिक के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बने. सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराना सरकार का मकसद है. पोस्ट ऑफिसों को कॉमन डिजिटल सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा और छोटे शहरों में भी बीपीओ खोले जायेंगे. भारतीयों के डिजिटल सशक्तीकरण के प्रयासों से इस योजना का लक्ष्य इस क्षेत्र के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इससे जोड़ना है.
डिजिटल इंडिया कार्यक्र म के तहत भारत सरकार चाहती है कि तमाम सरकारी विभाग और देश की जनता एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़ जायें, ताकि वे सभी तरह की सरकारी सेवाओं से लाभ उठा सकें और देशभर में सुशासन सुनिश्चित किया जा सके. देश के सुदूर इलाके में स्थिति किसी गांव में रहनेवाला व्यक्ति हो या किसी विकसित शहर में, दोनों को ही सभी सरकारी सेवाएं समान रूप से डिजिटली अथवा ऑनलाइन हासिल हों, यही डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है.
इस अहम सरकारी योजना को अमली जामा पहनाने के बाद आम जनता के लिए यह संभव हो जायेगा कि किस सरकारी सेवा को पाने के लिए उसे किस तरह और कहां ऑनलाइन आवेदन करना है और उससे किस तरह लाभान्वित हुआ जा सकता है.
डिजिटल इंडिया वीक के तहत देश के 600 जिलों में कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इस बीच प्रधानमंत्री ने विभिन्न शहरों में वाइ-फाइ की सुविधा को भी लॉन्च किया है. साथ ही प्रधानमंत्री ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल को भी लॉन्च किया है. इसके अलावा, केंद्र सरकार की योजना छोटे शहरों में भी बीपीओ खोलने की है.
डिजिटल इंडिया वीक के दौरान डिजिटल लॉकर सेवा का शुभारंभ भी किया गया है. इसके तहत लोग अपने प्रमाण पत्रों समेत अन्य दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरिक्षत रख सकेंगे. इसमें आधार कार्ड नंबर और मोबाइल फोन के जरिये पंजीकरण कराना होगा. डिजिटल लॉकर में सुरिक्षत रखे जानेवाले डॉक्यूमेंट्स को सरकारी एजेंसियों के लिए भी हासिल करना आसान होगा. किसी व्यक्ति के विभिन्न दस्तावेज अगर डिजिटल लॉकर में हैं, तो उसे सरकारी योजनाओं के लिए इनकी फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी.
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के उद्देश्य
डिजिटल इंडिया की प्रकृति रूपांतरकारी ह. इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि सरकारी सेवाएं नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से और ऑनलाइन उपलब्ध हों. इससे सरकारी और प्रशासनिक सेवाओं को आम लोगों के लिए सुगम बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक जवाबदेही को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के नौ प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं.
ब्रॉडबैंड हाइवेज
ब्रॉडबैंड हाइवेज के जरिये देश के समूचे भौगोलिक दायरे के भीतर एक तय समय सीमा में बड़ी संख्या में सूचनाओं को प्रेषित किया जा सकता है. ठीक उसी तरह से जैसे किसी हाइवे पर एक से ज्यादा लेन होने से उतने ही समय में ज्यादा गाड़ियां आसानी से दौड़ सकती हैं. ब्रॉडबैंड हाइवे निर्माण से देशभर के ढाई लाख पंचायतों को इससे जोड़ा जायेगा और लोगों को सार्वजनिक सेवाएं मुहैया करायी जायेंगी.
सभी को मोबाइल कनेक्टिविटी सुलभ कराना
ज्यादातर शहरी इलाकों में मोबाइल फोन आसानी से सुलभ है, लेकिन देश के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों समेत दूरदराज क्षेत्रों में नागरिकों को यह सुविधा नहीं हासिल हो पायी है. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मकसद ग्रामीण उपभोक्ताओं को इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग की सेवाएं आसानी से मुहैया कराना है.
पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम
पोस्ट ऑफिस के लिए यह दीर्घावधि विजन वाला कार्यक्रम हो सकता है. इस कार्यक्र म के तहत पोस्ट ऑफिस को मल्टी-सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा. नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं मुहैया कराने के लिए वहां अनेक तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया जायेगा.
इ-गर्वनेस यानी टेक्नोलॉजी के जरिये शासन में सुधार
इसके तहत विभिन्न विभागों के बीच सहयोग और आवेदनों को ऑनलाइन ट्रैक किया जायेगा. यह कार्यक्रम सेवाओं और मंचों के एकीकरण- यूआइडीएआइ (आधार), पेमेंट गेटवे (बिलों के भुगतान) आदि में मददगार साबित होगा. साथ ही सभी प्रकार के डाटाबेस और सूचनाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मुहैया कराया जायेगा. इसके अलावा, स्कूल प्रमाण पत्रों, वोटर आइडी कार्डस आदि की जहां भी जरूरत पड़े, वहां उसका ऑनलाइन इस्तेमाल किया जा सकता है.
इ-क्रांति यानी सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी
इसमें अनेक बिंदुओं को फोकस किया गया है. इ-एजुकेशन के तहत सभी स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने, सभी स्कूलों (करीब ढाई लाख) में वाइ-फाइ की नि:शुल्क सुविधा मुहैया कराने और डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित करने की योजना है. किसानों को वास्तविक समय में मूल्य संबंधी सूचना, मोबाइल बैंकिंग आदि की ऑनलाइन सेवा प्रदान करना भी इनमें शामिल है. इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में ऑनलाइन मेडिकल परामर्श, रिकॉर्ड और संबंधित दवाओं की आपूर्ति समेत लोगों को इ-हेल्थकेयर की सुविधा देना भी इनमें शामिल है. न्याय के क्षेत्र में इ-कोर्ट, इ-पुलिस, इ-जेल, इ-प्रोसिक्यूशन की सुविधा. वित्तीय इंतजाम के तहत मोबाइल बैंकिंग, माइक्रो-एटीएम प्रोग्राम.
सभी के लिए सूचना मुहैया कराना
इस कार्यक्र म के तहत सूचनाओं और दस्तावेजों तक ऑनलाइन पहुंच कायम की जायेगी. इसके लिए ओपन डाटा प्लेटफॉर्म मुहैया कराया जायेगा, जिसके माध्यम से नागरिक सूचना तक आसानी से पहुंच सकेंगे. नागरिकों तक सूचनाएं मुहैया कराने के लिए सरकार सोशल मीडिया और वेब आधारित मंचों पर सक्रिय रहेगी. साथ ही, नागरिकों और सरकार के बीच दोतरफा संवाद की व्यवस्था कायम की जायेगी.
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भरता
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े तमाम उत्पादों का निर्माण देश में ही किया जायेगा. इसके तहत ‘नेट जीरो इंपोर्ट्स’ का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वर्ष 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में देश आत्मनिर्भरता हासिल कर सके. इसके लिए आर्थिक नीतियों में संबंधित बदलाव भी किये जायेंगे. फैब-लेस डिजाइन, सेट टॉप बॉक्स, वीसेट, मोबाइल, उपभोक्ता और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट एनर्जी मीटर्स, स्मार्ट कार्डस, माइक्रो-एटीएम आदि को बढ़ावा दिया जायेगा.
रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी
कौशल विकास के मौजूदा कार्यक्र म को इस प्रौद्योगिकी से जोड़ा जायेगा. कौशल विकास के मौजूदा कार्यक्रमों को इस प्रौद्योगिकी से जोड़ा जायेगा. आइटी सेवाओं से जुड़े कारोबार के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जायेगा. देखा गया है कि तकनीकी कौशल आधारित नौकरियां हासिल करने में गांवों और छोटे शहरों में लोग पीछे रह जाते हैं. ऐसे में इन इलाकों में रहने वालों को आइटी से जुड़ी नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा, ताकि इन लोगों को जीवन स्तर बढ़ सके.
अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स
डिजिटल इंडिया कार्यक्र म को लागू करने के लिए पहले कुछ बुनियादी ढांचागत सुविधाएं स्थापित करनी होंगी.