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धूम्रपान छोड़ते ही फेफड़े अपने आप ठीक हो जाते हैं?

Updated at : 05 Feb 2020 12:39 PM (IST)
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धूम्रपान छोड़ते ही फेफड़े अपने आप ठीक हो जाते हैं?

<figure> <img alt="फेफड़े" src="https://c.files.bbci.co.uk/4F6C/production/_110723302_6b6d3edd-cb7c-49a2-97cf-2b35f105913a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>वैज्ञानिकों का कहना है कि आपके फेफड़ों में लगभग ‘जादुई’ क्षमता है जो धूम्रपान से हुए कुछ नुक़सान को ख़ुद-ब-ख़ुद ठीक कर देते हैं. </p><p>फेफड़ों के कैंसर को जन्म देने वाले म्यूटेशंस को स्थाई माना जाता है और धूम्रपान छोड़ने के बाद भी समझा जाता है […]

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<figure> <img alt="फेफड़े" src="https://c.files.bbci.co.uk/4F6C/production/_110723302_6b6d3edd-cb7c-49a2-97cf-2b35f105913a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>वैज्ञानिकों का कहना है कि आपके फेफड़ों में लगभग ‘जादुई’ क्षमता है जो धूम्रपान से हुए कुछ नुक़सान को ख़ुद-ब-ख़ुद ठीक कर देते हैं. </p><p>फेफड़ों के कैंसर को जन्म देने वाले म्यूटेशंस को स्थाई माना जाता है और धूम्रपान छोड़ने के बाद भी समझा जाता है कि यह वहीं रहता है. </p><p>लेकिन नेचर में छपे शोध के अनुसार, कुछ सेल्स फेफड़ों को हुए नुक़सान को ठीक कर देते हैं. </p><p>इन प्रभावों को उन मरीज़ों में भी देखा गया है जो धूम्रपान छोड़ने से पहले 40 सालों तक रोज़ाना एक पैकेट सिगरेट पिया करते थे.</p><p>धूम्रपान करते समय तंबाकू में ऐसे हज़ारों रासायन होते हैं जो फेफड़ों के सेल के डीएनए को तबदील करते हैं और उसे धीरे-धीरे स्वस्थ से कैंसर बनाते हैं. </p><p>इस शोध में यह भी पता चला है कि कैंसर होने पर भी धूम्रपान करने वाले के फेफड़ों में यह बड़े स्तर पर होता है.</p><p>धूम्रपान करने वाले शख़्स के फेफड़ों से एयरवेज़ से ऐसे सेल्स लिए गए जो तंबाकू से परिवर्तित हुए थे, इनमें 10,000 आनुवंशिक तब्दीलियां थीं. </p><p>यूसीएल की शोधकर्ता डॉक्टर केट गोवर्स कहती हैं, &quot;इनको एक छोटा बम समझा जा सकता है जो अगले क़दम का इंतज़ार कर रही हैं जो कैंसर में बदल सकते हैं.&quot;</p><p>लेकिन सेल्स का एक छोटा हिस्सा तब्दील नहीं होता है. </p><p>धूम्रपान से होने वाला आनुवंशिक बदलाव क्यों होता है यह अभी साफ़ नहीं लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि ‘वो परमाणु बंकर’ जैसे लगते हैं.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-51264819?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कोरोना वायरसः इंफ़ेक्शन से बचने के लिए क्या करें, क्या न करें</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-51247750?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कोरोना वायरस से लड़ने के लिए छह दिन में बनेगा अस्पताल !</a></li> </ul><figure> <img alt="धूम्रपान" src="https://c.files.bbci.co.uk/014C/production/_110723300_60b96e73-c6a1-4630-a046-94a145738ab4.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>हालाँकि जब कोई धूम्रपान छोड़ता है तब यह सेल्स बढ़ते हैं और फेफड़ों के नुक़सान पहुंचा चुके सेल्स को हटा देते हैं. </p><p>जो लोग धूम्रपान छोड़ चुके हैं उनके 40 फ़ीसदी सेल्स उन लोगों की तरह होते हैं जिन्होंने आज तक धूम्रपान नहीं किया है.</p><p>सैंगर इंस्टिट्यूट के डॉक्टर पीटर कैम्पबेल कहते हैं, &quot;इस अनुसंधान के लिए हम पूरी तरह तैयार नहीं थे.&quot;</p><p>वो कहते हैं, &quot;ऐसे सेल्स की संख्या है जो जादुई रूप से वायुमार्ग की परत को फिर से भर देती हैं.&quot;</p><p>&quot;40 सालों तक धूम्रपान के बाद जिस मरीज़ ने यह छोड़ा उसमें बड़े बदलाव देखने को मिले. उनके वो सेल्स फिर से जीवित हुए जो तंबाकू के संपर्क में नहीं आए थे.&quot;</p><h1>धूम्रपान छोड़ने में प्रेरणा</h1><p>शोधकर्ताओं का अभी भी यह जाँचना बाकी है कि फेफड़े कितने ठीक होते हैं. इस शोध में फेफड़ों के बड़े एयरवेज़ पर ध्यान केंद्रित किया गया है जबकि एलवेओली जैसे एयरवेज़ को शामिल नहीं किया गया है.</p><p>ब्रिटेन में हर साल फेफड़ों के कैंसर के 47 हज़ार मामले सामने आते हैं. इसमें से तक़रीबन तीन चौथाई मामले धूम्रपान के कारण होते हैं. </p><p>शोध बताता है कि फेफड़ों का कैंसर का ख़तरा उसी दिन से कम होने लगता है जिस दिन से आप धूम्रपान छोड़ते हैं. </p><p>कैंसर रिसर्च यूके की डॉक्टर रेचेल ऑरिट कहती हैं, &quot;यह वाक़ई में प्रेरणादायक विचार है कि धूम्रपान छोड़कर लोग दो प्रकार के लाभ दे सकते हैं. वो तंबाकू से नुक़सान पहुंचने वाले फेफड़ों के सेल बचा सकते हैं और अपने फेफड़े देकर नुक़सान को कम करते हुए स्वास्थ्यवर्धक सेल्स दे सकते हैं.&quot;</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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