कश्मीर: ह्यूमन राइट्स वॉच ने की भारत की आलोचना

<figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/028D/production/_108535600_384d0df3-253d-46fe-830f-436753b7d82d.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जो इंटरनेट और टेलीफ़ोन सेवाएं बंद कर रखी हैं उससे वहां की आबादी परेशान है. इस रिपोर्ट में कहा गया […]
<figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/028D/production/_108535600_384d0df3-253d-46fe-830f-436753b7d82d.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जो इंटरनेट और टेलीफ़ोन सेवाएं बंद कर रखी हैं उससे वहां की आबादी परेशान है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ज़रूरी सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं. </p><p>जम्मू-कश्मीर में पाँच अगस्त 2019 से ही ये सेवाएं बंद हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इससे यहाँ की जनता को सूचनाओं का मिलना ठप हो गया है. यहां की आबादी संवाद नहीं कर पा रही, लोगों को चिकित्सा सुविधाएं भी बमुश्किल से मिल रही हैं और इन सब के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बाधित है.</p><p>भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को मिलने वाली संवैधानिक स्वायत्तता को समाप्त करने के भारत सरकार के फ़ैसले के बाद यदि संचार सुविधाओं को चालू रखा जाता तो यहां ग़लत और उत्तेजक सूचनाओं के प्रसारित होने और उसकी वजह से हिंसक विरोध प्रदर्शन की आशंका थी, इसी के मद्देनज़र इन्हें बंद रखा गया है.</p><p>हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ लोगों की मौलिक आज़ादी पर व्यापक, अव्यवस्थित और अनिश्चित प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. साथ ही अभिव्यक्ति के अधिकार की आज़ादी और सूचनाएं देने और प्राप्त करने पर भी रोक नहीं लगाया जा सकता.</p><p>ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, ”फ़ोन और इंटरनेट के बंद होने के कारण कश्मीर के लोग परेशानी झेल रहे हैं और इसे तुरंत हटा दिया जाना चाहिए. ये प्रतिबंध वहां के लोगों में ग़ुस्सा भड़का रही है, इससे आर्थिक नुक़सान हो रहा है, और अफ़वाहें फैल रही हैं जो ख़राब मानवाधिकारों की स्थिति को और भी बदतर बना रही है."</p><figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/50AD/production/_108535602_5fcb0b12-f521-4e08-a490-47c8fa4bcd58.jpg" height="689" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h3>’क्या यह जेल नहीं है?'</h3><p>कश्मीर घाटी और अन्य मुस्लिम बहुल इलाक़ों में टेलीफ़ोन सेवाएं लगभग ठप हैं, केवल कुछ ही लैंडलाइन्स काम कर रहे हैं. कुछ सरकारी दफ़्तरों में लगी टेलीफ़ोन सुविधाओं तक लोगों की पहुँच है लेकिन कश्मीरियों को उनके इस्तेमाल के लिए कई सुरक्षा चौकियों से गुज़रने के बाद भी घंटों अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है. कश्मीर से बाहर रहने वाले अपने परिजनों की ख़बरों के लिए उतावले हो रहे हैं.</p><p>ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में कश्मीरियों ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि वे अपने दैनिक जीवन पर लगे सुरक्षा प्रतिबंधों से पड़े प्रभाव से नाराज़ और चिंतित हैं.</p><p>एक बिज़नेसमैन ने कहा, "वास्तव में, सरकार ने हम सभी को जेल में डाल दिया है." एक महिला ने कहा, "हम आज़ादी से घूम नहीं सकते. हम खुलकर बोल नहीं सकते. तो फिर क्या यह जेल नहीं है?"</p><p>एक महिला ने बताया कि उसने सुना है कि दूसरे शहर में रह रहीं उनकी मां बीमार हैं, लेकिन वो उनसे फ़ोन पर बात नहीं कर सकती और न ही वहां जा सकती हैं. वो कहती हैं, "अगर आप अपने परिवार से बात नहीं कर सकते, अपनी मां से मिल नहीं सकते तो सब कुछ सामान्य कैसे है?"</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-49503932?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कश्मीर पर पाकिस्तान ने फिर लिखी यूएन को चिट्ठी</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49502614?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">लड़का जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कश्मीर जा रहा है</a></li> </ul><h3>मेडिकल सुविधाओं पर आवाज़ उठाने पर गिरफ़्तारी</h3><p>इंटरनेट प्रतिबंध उन कश्मीरियों को अपनी आजीविका से महरूम कर रहा है जो मोबाइल मैसेजिंग ऐप या ईमेल पर निर्भर हैं.</p><p>व्यापारी ऑर्डर दे या ले नहीं सकते, टूर ऑपरेटर अपनी वेबसाइट के ज़रिए काम नहीं कर सकते, छात्र इंटरनेट के ज़रिए अपनी पढ़ाई (पाठ्यक्रम) पूरी नहीं कर सकते और पत्रकार न्यूज़ रिपोर्ट फाइल नहीं कर सकते.</p><p>एक व्यक्ति ने कहा कि वे अपना टैक्स तक नहीं भर सके हैं, "टैक्स तो अब ऑनलाइन भरना होता है. सरकार का यही आदेश है. फिर उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया. तो क्या अब सरकार मुझ पर लगे लेट पेमेंट पेनल्टी का वहन करेगी?"</p><p>एक सरकारी डॉक्टर भी श्रीनगर के विरोध प्रदर्शन में यह कहते हुए शामिल हुए कि इंटरनेट बंद करने से लोगों, ख़ास कर ग़रीबों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रहीं क्योंकि ये डिजिटल कार्ड से जुड़ी हैं और इसका लाभ उठाने के लिए इन्हें स्वाइप करके ही पहले मेडिकल रिकॉर्ड पाया जाता है और फिर इलाज किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इस डॉक्टर को गिरफ़्तार कर लिया गया है.</p><p>इंटरनेट पर व्यापक पाबंदी कश्मीर में ज़रूरी गतिविधियों और सेवाओं को प्रभावित कर रही हैं जिसमें आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, मोबाइल बैंकिंग, ई-कॉमर्स, परिवहन, स्कूल की कक्षाएं, महत्वपूर्ण घटनाओं की ख़बरें और मानवाधिकारों की पड़ताल शामिल हैं.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49492282?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">क्या मोदी ने पाकिस्तान के भीतर कश्मीर पर बहस बदल दी </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-49403587?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">इमरान ने तनाव के बीच जनरल बाजवा का कार्यकाल क्यों बढ़ाया</a></li> </ul><figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/02F1/production/_108535700_075963af-9afe-4f9b-a28e-3c13a91cca04.jpg" height="649" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h3>सोशल मीडिया पर लाल डॉट</h3><p>आर्थिक नीति थींक टैंक इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के मुताबिक़ 2017 में समूचे जम्मू-कश्मीर राज्य में 24 घंटे मोबाइल, इंटरनेट सेवाएं ठप होने से 223 मिलियन डॉलर का नुक़सान हुआ था.</p><p>वहीं अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से बीते दिनों जम्मू-कश्मीर में अफ़वाहें फैलीं जिससे वहां हिंसा हुई, लिहाज़ा वर्तमान प्रतिबंध से कई लोगों की जानें बची हैं.</p><p>सरकार के फ़ैसले का समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले, दोनों ही पक्षों ने ग़लत सूचनाएं दी हैं, लेकिन कश्मीरियों के मुताबिक़ प्रशासन ने केवल सरकार का विरोध करने वालों को अपने निशाने पर लिया. उदाहरण के लिए, जम्मू-कश्मीर के बाहर एकजुटता और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में जो लोग सोशल मीडिया पर एक लाल डॉट लगा रहे हैं, उनके अकाउंट्स को बंद किया जा रहा है.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-49470006?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कश्मीर पर इस्लामिक देश क्या करेंगे? पाकिस्तानी मंत्री का जवाब</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49084176?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">"ट्रंप जो सुबह बोलते हैं, शाम तक भूल जाते हैं"</a></li> </ul><figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/ECED/production/_108535606_2521768d-a9d4-4e6d-926a-fa057b3bed24.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h3>क्या है क़ानूनी प्रावधान?</h3><p>भारत में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने का क़ानूनी प्रावधान है. अगस्त 2017 में, भारत सरकार ने भारतीय टेलीग्राफ़ अधिनियम 1885 के तहत टेलीकॉम सेवाओं पर अस्थाई रोक लगाया था.</p><p>इस नियम के तहत राज्य या केंद्र सरकार टेलीकॉम सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर सकती हैं.</p><p>पहले, इस शटडॉउन का आदेश भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के तहत दिया गया. यह वो पुराना क़ानून है जिसके तहत सरकारें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर क़ानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने का प्रयास करती रही हैं.</p><p>इसके तहत कर्फ़्यू लगाया जाता है या बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई जाती है ताकि किसी भी गतिरोध की स्थिति से निबटा जा सके.</p><p>हालांकि इस व्यवस्था का प्रावधान आपातकाल की स्थिति में लगाए जाने के लिए किया गया था, लेकिन सरकारें इंटरनेट के शटडाउन और लोगों को शांतिपूर्ण इकट्ठा होने से रोकने में भी इसका खुला दुरुपयोग करती रही हैं.</p><p>अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून, जैसे कि नागरिक और राजनीतिक अधिकार (आईसीसीपीआर), लोगों को सभी उपलब्ध मीडिया माध्यमों के जरिए सूचनाएं और विचार लेने और देने की आज़ादी प्रदान करता है, जिसमें इंटरनेट भी शामिल है.</p><p>सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंध क़ानून पर आधारित होने चाहिए. 22 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने जम्मू-कश्मीर पर अपने एक संयुक्त बयान में कहा कि, "सरकार ने कारण बताए बिना ही लोगों के मौलिक अधिकारों के मुताबिक़ ज़रूरी इंटरनेट और दूरसंचार नेटवर्क बंद कर दिया."</p><figure> <img alt="Kashmir, कश्मीर, कश्मीर में पाबंदी, कश्मीर में संचार प्रतिबंध, सूचना प्रतिबंध, ह्यूमन राइट्स वॉच" src="https://c.files.bbci.co.uk/9ECD/production/_108535604_45428300-2954-4c7c-9780-baf3dea5cce5.jpg" height="649" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h3>यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स का क्या है कहना?</h3><p>अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के डेविड काये की 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शटडाउन से सरकारें अपने घोषित उद्देश्य को पाने की कोशिश करती हैं. </p><p>यह भी पाया गया है कि नेटवर्क कनेक्टिविटी बनाए रखना सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को कम कर सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल करने में मदद कर सकता है.</p><p>जुलाई 2016 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर उन देशों की आलोचना की जो अपनी जनता को इंटरनेट सुविधाएं और सूचना पाने से रोकती हैं और यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स और आईसीसीपीआर की धारा 19 के तहत बोलने की आज़ादी की सुरक्षा का आह्वान किया.</p><p>संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और रैपोर्टर्र ने एक संयुक्त घोषणा में कहा कि "चाहे स्थिति संघर्ष वाली क्यों न हो, संचार ‘किल स्वीच’ का उपयोग करने (यानी संचार सेवाओं के एक पूरे भाग को बंद करने) को मानवाधिकारों क़ानून में कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता है."</p><p>ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि अनिश्चितकालीन पूर्ण पाबंदी और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का दमन करने की बजाए अधिकारियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल से स्पष्ट सूचनाएं देनी चाहिए ताकि हिंसा उकसाने वाली घटनाओं को रोका जा सके और साथ ही सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार काम करना चाहिए.</p><p>गांगुली कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय क़ानून इंटरनेट समेत भाषणों पर प्रतिबंध की अनुमति देता है लेकिन इन्हें जायज लक्ष्य को लेकर बहुत कम अवधि के लिए लागू किया जाना चाहिए और वर्तमान प्रतिबंधों में यह विफल रहा है. भारत सरकार को लोगों की चिंताओं को दूर करने की ज़रूरत है, न कि वह उन्हें उनके संचार के अधिकारों की आज़ादी से काटें."</p><h3>ये भी पढ़ें:</h3> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49261947?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अनुच्छेद 370: क्या कह रहे हैं कश्मीरी- ग्राउंड रिपोर्ट </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49243095?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">’अच्छे भविष्य के लिए है फ़ैसला तो हमें बंद क्यों किया?’ – सना मुफ़्ती</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49325008?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">एक कश्मीरी लड़की की पाँच दिन की डायरी</a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a 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