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उत्तर प्रदेश : प्रयागराज में ब्राह्मणों की चुप्पी सभी दलों के लिए बड़ा सस्पेंस

Updated at : 07 May 2019 6:18 AM (IST)
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उत्तर प्रदेश : प्रयागराज में ब्राह्मणों की चुप्पी सभी दलों के लिए बड़ा सस्पेंस

कांग्रेस और भाजपा ने खेला ब्राह्मण कार्ड, महागठबंधन बना रहा त्रिकोणात्मक संघर्ष की तस्वीर प्रयागराज : इलाहाबाद सीट का भविष्य काफी हद तक बागियों के हाथ में है. भाजपा ने इस सीट पर जहां कांग्रेस में लंबी पारी खेलने के बाद 2016 में भाजपा के टिकट पर विधायक और फिर मंत्री बनने वाली रीता बहुगुणा […]

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कांग्रेस और भाजपा ने खेला ब्राह्मण कार्ड, महागठबंधन बना रहा त्रिकोणात्मक संघर्ष की तस्वीर
प्रयागराज : इलाहाबाद सीट का भविष्य काफी हद तक बागियों के हाथ में है. भाजपा ने इस सीट पर जहां कांग्रेस में लंबी पारी खेलने के बाद 2016 में भाजपा के टिकट पर विधायक और फिर मंत्री बनने वाली रीता बहुगुणा जोशी को उतारा है.
वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के ताजे-ताजे बागी योगेश शुक्ल को उनके मुकाबिल किया है. योगेश और रीता जोशी दोनों अपने-अपने पुराने दलों से इस सीट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं मिली. गठबंधन के प्रत्याशी राजेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने राजनीति की शुरुआत जनता दल से की थी. वह जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रह चुके हैं. राजेंद्र के भतीजे प्रवीण सिंह पटेल फूलपुर से भाजपा विधायक हैं. आम आदमी पार्टी ने किन्नर भवानी नाथ (भवानी मां) को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो किन्नर अखाड़े की लोकप्रियता के सहारे मैदान में हैं.
यह बात अलग है कि किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भवानी नाथ की उम्मीदवारी के बाद से इलाहाबाद ही नहीं आयीं. इलाहाबाद लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार आम चुनाव और तीन बार उपचुनाव हुए हैं. इस सीट पर 1952 से लेकर 1971 तक कांग्रेस का कब्जा रहा है. 1952 में पहली बार हुए लोस चुनाव में स्वतंत्रता सेनानी श्रीप्रकाश कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गये. इलाहाबाद में भाजपा का पहली बार खाता 1996 में खुला. भाजपा के मुरली मनोहर जोशी 1996 से 1999 तक तीन बार जीत हासिल की.
2014 का वोट समीकरण
श्यामा चरण गुप्ता, भाजपा 3,13,772 (18%)
कुंवर रेवती रमण सिंह,सपा2,51,763(15%)
केसरी देवी, बसपा 162,073 (9%)
कुंभ फैक्टर भी कम नहीं
कुंभ के आयोजन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. दोनों ने अपना खजाना कुंभ के लिए खोला. मंत्रियों ने लगातार दौरे कर यहां काम करवाये.
खूब हो रहा जोड़-तोड़
उम्मीदवारी के बाद रीता बहुगुणा जोशी को जहां अपने ही दल के असंतुष्टों का सामना करना पड़ा. वहीं, कांग्रेस से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को वह भाजपा में लाने में सफल रहीं. इस क्षेत्र के उद्योगों को पुनर्जीवित करने का वादा कर लोगों की सहानुभूति रीता जोशी हासिल कर रही हैं. इस तरह वह अन्य उम्मीदवारों से कुछ हद तक मजबूत दिख रही हैं. कांग्रेस ने भी असंतुष्ट योगेश शुक्ल को तोड़ कर युवा भाजपाइयों में सेंध तो लगायी है.
इलाहाबाद में ब्राह्मण किसके साथ
कांग्रेस और भाजपा ने ब्राह्मण कार्ड खेला है, लेकिन ब्राह्मण किसे वोट करेंगे, यह अभी सस्पेंस है. इलाहाबाद संसदीय सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, ऐसे में उन्हें रिझाने के लिए दोनों दल कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाले हैं. अभी कांग्रेसी नेता शुरुआत में सिर्फ योगेश को स्थानीय ब्राह्मण और रीता को बाहरी ब्राह्मण कह कर मुद्दा बना रहे हैं.
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