जापान से आयी बोनसाई कला

Updated at : 29 Jun 2014 12:27 PM (IST)
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जापान से आयी बोनसाई कला

हर कोई चाहता है कि उसके घर में आम-लीची के पेड़ हों, लेकिन इसे घर के अंदर लगाना आसान नहीं हो पाता. लेकिन एक ऐसी जापानी तकनीक है जिसकी सहायता से हम घर के अंदर ही अपनी पसंद के पेड़ लगा सकते हैं. इसे घर के किसी भी कोने में रख सकते हैं. इस तकनीक […]

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हर कोई चाहता है कि उसके घर में आम-लीची के पेड़ हों, लेकिन इसे घर के अंदर लगाना आसान नहीं हो पाता. लेकिन एक ऐसी जापानी तकनीक है जिसकी सहायता से हम घर के अंदर ही अपनी पसंद के पेड़ लगा सकते हैं. इसे घर के किसी भी कोने में रख सकते हैं. इस तकनीक के बारे में बता रहीं हैं पूजा कुमारी.

बोनसाई जापान की एक ऐसी कला है जिसमे बड़े-बड़े वृक्षों को छोटे-छोटे गमलों में बिल्कुल उसी रूप में लगाया जा सकता है जैसे वे अपने प्राकृतिक रूप में दिखते हैं. बोनसाई पौधों को गमलों में इस तरह उगाया जाता है, जिससे उनका प्राकृतिक रूप तो बना रहता है मगर वे आकार में छोटे यानी बौने रह जाते हैं. अगर तुम भी घर में पेड़-पौधे लगाने के शौकीन हो मगर जगह की कमी से परेशान हो, तो इस तकनीक का उपयोग कर अपने घर में हरा भरा बगीचा बना सकते हो. इन पौधों को पूरे घर में कहीं भी रखा जा सकता है.

कहां उगाएं बोनसाई
बोनसाई बनाने से पहले मूल वृक्ष को जरूर देखना चाहिए. ताकि यह पता चल जाये कि एक पूर्ण विकसित वृक्ष किस आकृति का होता है. इससे पौधे को सही रूप देने में मदद मिलेगी. बोनसाई के लिए उथले गमलों का इस्तेमाल किया जाता है. इनकी जड़ों के आसपास मिट्टी कम होती है, अत: वर्गाकार, आयताकार, गोलाकार, अंडाकार और उथले गमले इन पौधों के लिए अच्छे रहते हैं. पेंदी में अनेक छोटे छेद होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी उनसे निकल सके और जड़ों को हवा मिलती रहे. गमलों में मिट्टी, पत्ती की खाद और बालू रेत की बराबर मात्र मिला कर मिश्रण तैयार कर इसमें पौधे को लगाया जाता है.

क्या है धारणा
बोनसाई के संबंध में एक गलत धारणा यह है कि उसे कम मात्र में पोषक तत्व देने चाहिए जिससे उसका कम विकास हो. मगर असल में इसे भी किसी सामान्य पौधे के जितनी ही पोषक तत्वों की जरूरत होती है. अत: इसे खाद युक्त पानी बार-बार देते रहना चाहिए और साथ ही इसकी काट-छांट करते रहना चाहिए. कटाई-छंटाई का मुख्य उद्देश्य पौधे को आकार देना होता है. बोनसाई को लकड़ी आदि का सहारा नहीं देना चाहिए. पतली शाखाओं को सही दिशा देने के लिए तांबे या एल्यूमिनियम के तारों का इस्तेमाल किया जाता है. शाखाओं के मजबूत हो जाने के बाद इन तारों को हटा दिया जाता है. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां इसे पर्याप्त मात्र में धूप मिल सके.

कुछ साल बाद गमले की मिट्टी बदलने की जरूरत पड़ती है क्योंकि उसमें जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इस समय जड़ों के अतिरिक्त फैलाव को भी काट कर कम कर देना चाहिए. बोनसाई के शौकीन इंडियन बोनसाई एसोसिएशन के सदस्य भी बन सकते हैं. इसकी वेबसाइट www.bonsaiexperience.com पर इससे संबंधित और भी रोचक जानकारियां और फोटोग्राफ भी मौजूद हैं.

सभी पेड़ों के लिए है यह तकनीक
बोनसाई के लिए पेड़ों का चुनते समय उनकी फूलों की सुंदरता कलियों और पत्तियों का रंग-रूप आदि का विशेष ध्यान रखा जाता है. अनार, आम, अमलताश, अमरूद, नीम, आंवला, बरगद, संतरा, सेमल, गूलर, गुलमोहर, पीपल, जकरेंडा, लीची, चीड़, नीम, नींबू, केसिया प्रजाति के अलावा पतझड़ वृक्ष जैसे ओक, बेर, बर्च, देवदार, फर, नाशपती, सेमल, चमेली, बोगनवेलिया आदि सभी बोनसाई के लिए उपयुक्त हैं.

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