Lockdown: 5 महीने के बच्चे को दूध भी नसीब नहीं
Author Surajkumar thakur
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पांच महीने का मनीष जब भूख से रोता है तो रात का सन्नाटा दहल जाता है. भूख से बिलबिलाता मनीष, इस उम्मीद में चीखता है कि कोई उसके मुंह में दूध का एक कतरा डाल देगा.
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पांच महीने का मनीष जब भूख से रोता है तो रात का सन्नाटा दहल जाता है. भूख से बिलबिलाता मनीष, इस उम्मीद में चीखता है कि कोई उसके मुंह में दूध का एक कतरा डाल देगा. लेकिन कौन. उसकी मां तो उसे जन्म देते ही दुनिया छोड़ गयी. साथ में बूढ़ी दादी है. दादी, जिसकी आंखों में अविरल आंसू है. भूखे पोते का करूण कंद्रन उसे बारंबार रूला देता है. लेकिन आंसुओं से कहां पेट भरता है. शायरियों में भले ही कह देते हैं कि मैं आंसू पी गया. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. पांच महीने के मनीष को दूध चाहिये. लेकिन मिल नहीं रहा.
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