तालिबान को मिले खतरनाक हथियार, चीन और पाकिस्तान की शाबाशी के बीच भारत को कितनी चिंता?

अमेरिकी फौजों के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान हथियारों के मामले में मालामाल हो गया है. साल 2002 में अमेरिका ने अफगानिस्तान सेना के साथ मिलकर अफगान नेशनल आर्मी एयर कॉर्प्स के नाम से एक एयरफोर्स तैयार की थी. इस एयरफोर्स पर तालिबान का कब्जा हो गया है. इसमें 7000 से ज्यादा जवान हैं.
Afghanistan Crisis Update: इस बार के तालिबान को देखें तो उसने जितनी आसानी से अफगानिस्तान पर कब्जा किया, वो कहीं ना कहीं अमेरिका की उस नीति को ध्वस्त कर दिया है, जिसके आधार पर उसने दो दशक पहले दक्षिण एशिया में शांति बहाली की बात कहते हुए अफगानिस्तान पर हमले किए थे. आज चिंता कई बातों की है. सबसे बड़ी चिंता है, तालिबान के हाथों में आए अत्याधुनिक हथियारों की. तालिबान के पास करीब 90 हजार लड़ाकों की सेना है. अमेरिकी फौजों के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान हथियारों के मामले में मालामाल हो गया है. साल 2002 में अमेरिका ने अफगानिस्तान सेना के साथ मिलकर अफगान नेशनल आर्मी एयर कॉर्प्स के नाम से एक एयरफोर्स तैयार की थी. इस एयरफोर्स पर तालिबान का कब्जा हो गया है. इसमें 7000 से ज्यादा जवान हैं.
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