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Noida Twin Tower : आखिर क्यों गिराई जा रही कुतुबमीनार से ऊंची इमारत, जानें ट्वीन टॉवर की पूरी कहानी

Updated at : 28 Aug 2022 6:41 AM (IST)
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Noida Twin Tower : आखिर क्यों गिराई जा रही कुतुबमीनार से ऊंची इमारत, जानें ट्वीन टॉवर की पूरी कहानी

Noida Twin Tower ट्विन टावर ब्लास्ट को लेकर नोएडा ऑथोरिटी ने एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की है, जो इमारत ढहाने के बाद किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए है. यह कंट्रोल रूम शिकायत दर्ज कर कर्रवाई करेगा.

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नोएडा के सेक्टर-93ए में बना सुपरटेक ट्विन टावर इन दिनों काफी चर्चा में है. कल यानी रविवार को दोपहर ढाई बजे 32 मंजिला इमारत ध्वस्त हो जाएगी. इसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस लिया है. यहां न केवल पुलिस फोर्स की भारी संख्या में तैनाती होगी, बल्कि नोएडा अथॉरिटी कंट्रोल रूम के माध्यम से इस ध्वस्तीकरण अभियान पर अपनी नजर बनाए रखेगा.

ट्विन टावर ब्लास्ट को लेकर नोएडा ऑथोरिटी ने एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की है, जो इमारत ढहाने के बाद किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए है. यह कंट्रोल रूम शिकायत दर्ज कर कर्रवाई करेगा. कंट्रोल रूम 28 अगस्त की सुबह 6:00 बजे सक्रिय हो जाएगा और 30 अगस्त तक 24 घंटे काम करेगा. इतना ही नहीं, अथॉरिटी ने शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया है. 0120-2425301, 0120-2425302, 0120-2425025 11- इन नंबरों पर सूचना या शिकायत दर्ज की जा सकती है.

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क्यों गिरायी जा रही इमारत

सुपरटेक ट्विन टावर साल 2009 में बना था. इस प्रोजेक्ट में करीब 1000 फ्लैट्स बनाए जाने थे. लेकिन बाद में बिल्डिंग के प्लान में बदलाव किया गया. इसके बाद कई खरीदार साल 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए. इसमें से 633 लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे. जिनमें से 248 रिफंड ले चुके हैं, 133 दूसरे प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट हो गए, लेकिन 252 ने अब भी निवेश कर रखा है. इस मामले में 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा प्रधिकरण को फटकार लगाई और इस प्रोजेक्ट को अवैध घोषित करके ध्वस्त करने का आरोप दे दिया. इसके बाद सुपरटेक कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने तब हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे गिराने का आदेश दे दिया.

ऐसे गिरेगी इमारत

टावर सोक ट्यूब सिस्टम के तहत ध्वस्त किए जाएंगे. इस तकनीक में मलबा पानी के झरने की तरह सीधे नीचे गिरता है. टावर को गिराने के लिए अलग-अलग सेकेंड में विस्फोट किए जाएंगे. टावर गिरने की शुरुआत बेसमेंट से होगी. एक-एक कर स्लैब गिरेंगे. दोनों टावर का पहला फ्लोर एक सेकेंड और अंतिम फ्लोर सात सेकेंड में ध्वस्त हो जाएगा.

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