Bihar Tourist Destinations: भगवान महावीर का जन्म स्थल वैशाली का बनाएं ट्रैवल प्लान, इस सीजन में करें विजिट

Published by : Shaurya Punj Updated At : 12 Aug 2023 8:18 AM

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Bihar Tourist Destinations, Tourist Places in Vaishali Bihar: वैशाली कभी बिहार का सांस्कृतिक रूप से संपन्न शहर था गंडक नदी के तट पर पटना के उत्तर में स्थित, यह प्राचीन शहर लिच्छवी साम्राज्य की राजधानी था और शुरू से ही हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है.

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Bihar Tourist Destinations, Tourist Places in Vaishali Bihar: बिहार अपने धार्मिक स्थलों के कारण दुनिया भर में मशहूर है. आज हम आपको बिहार में स्थित जैन धर्म के कई पवित्र धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. जैन धर्म के तीर्थंकर के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए आपको बिहार में इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए. आज एक पुरातात्विक स्थल के रूप में प्रसिद्ध वैशाली के बारे में जानते हैं. वैशाली कभी बिहार का सांस्कृतिक रूप से संपन्न शहर था गंडक नदी के तट पर पटना के उत्तर में स्थित, यह प्राचीन शहर लिच्छवी साम्राज्य की राजधानी था और शुरू से ही हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है.

वैशाली क्यों है खास तीर्थ स्थान

महावीर की जन्म स्थली होने के कारण जैन धर्म के मतावलम्बियों के लिए वैशाली एक पवित्र स्थल है. भगवान बुद्ध का इस धरती पर तीन बार आगमन हुआ, यह उनकी कर्म भूमि भी थी. ऐसे में जैन, बौद्ध और हिन्दुओं के लिए वैशाली एक बेहद ही महत्वपूर्ण स्थान है.

वैशाली घूमने का सबसे अच्छा समय

वैशाली घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय के दौरान, तापमान आसपास की खोज के लिए काफी उपयुक्त होता है. जबकि गर्मियों के महीनों के दौरान, तापमान काफी गर्म होता है और 45 डिग्री तक जा सकता है, इसलिए सलाह दी जाती है कि विशेष रूप से गर्मी के मौसम में यहां की यात्रा न करें. वार्षिक जलवायु परिस्थितियों के आधार पर मानसून का मौसम मध्यम हो सकता है.

वैशाली का इतिहास

ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातात्विक निष्कर्षों के अनुसार, वैशाली शहर हमेशा तीन दीवारों से घिरा हुआ था जिसमें विशाल द्वार और अच्छी तरह से निर्मित प्रहरीदुर्ग थे.

दुनिया में पहला गणराज्य

शुरुआत के बाद से, यानी छठी शताब्दी ईसा पूर्व, वैशाली / वैशाली को पूर्ण होने के पहले उदाहरणों में से एक के रूप में लिया जाता है. गणतंत्र नगर. यह वह स्थान भी है जहां राजा अशोक के सबसे पुराने स्तंभ पाए जा सकते हैं, जिस पर एक शेर गर्व से बैठा है. फैक्सियन और जुआनज़ैंग जैसे कई चीनी खोजकर्ताओं के यात्रा खातों में भी इस प्राचीन शहर का जोरदार उल्लेख और प्रशंसा की गई है.

वैशाली में घूमने की जगह

कौनहारा घाट

गंडक नदी के तट पर बसे हाजीपुर शहर का यह घाट काफी महत्व रखता है, इसी जगह पर गंगा और गंडक का संगम होता है जहाँ यह नदी गंगा में समाहित हो जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी जगह पर भगवान विष्णु के हाथों गज-ग्राह को मुक्ति मिली थी जिसके बाद से यह भूमि महा-मुक्ति धाम बन गई.

नेपाली छावनी मंदिर

नेपाली छावनी मंदिर कोनहारा घाट के समीप ही स्थित है, यह एक नेपाली सेनाधिकारी मातबर सिंह थापा द्वारा 18वीं सदी में पैगोडा शैली में निर्मित कराया गया था. यह अद्वितीय मंदिर नेपाली वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. काष्ट फलकों पर बने प्रणय दृश्य का अधिकांश भाग अब नष्टप्राय है या चोरी हो गया है. कला प्रेमियों के अलावे शिव भक्तों के बीच इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है.

विश्व शांति स्तूप

विश्व शांति स्तूप का निर्माण बौद्ध विहार समाज ने जापान सरकार के सहयोग से किया था. यह एक बहुत ही सुंदर संरचना है और हमारी पारंपरिक विरासत की भव्यता को प्रदर्शित करती है. हिंदू अतीत और उसकी महिमा की छाया में अपना ख़ाली समय बिताने के लिए यह एक अद्भुत जगह है.

विशाल किला

ऐसा माना जाता है कि वैशाली के प्राचीन शहर का नाम राजा विशाल से मिला है. प्रारंभ में, यह के नाम से चला गया विशालपुरी जिसे बाद में बदलकर वैशाली या वैशाली कर दिया गया. और यहां का विशाल किला लिच्छवियों की संसद माना जाता है. कई इतिहासकारों और जानकारों का कहना है कि एक समय ऐसा था जब राजनीतिक मामलों पर चर्चा करने के लिए लगभग सात हजार प्रतिनिधि यहां इकट्ठा होते थे.

गणिनाथ धाम

यह मंदिर मधेशिया वैश्य समुदाय के कुल गुरू बाबा गणिनाथ को समर्पित है, यह मंदिर संतशिरोमणि बाबा गणिनाथ की समाधि-भूमि पावन पलवैया धाम के रूप में जाना जाता है. हर वर्ष बाबा गणिनाथ के जन्म तिथि (कृष्ण जन्माष्टमी के बाद के पहले शनिवार) के दिन उनके समुदाय के द्वारा पूजा किया जाता है एवम मेला लगता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर के मानस पुत्र के रूप में पृथ्वी पर अवतार के बाद बाबा गणिनाथ ने नैनाधोगिन नाम की राक्षसी का वध कर पूरी मानव जाति को निजात दिलायी.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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