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चेंगोना गांव का ऐसा बदनसीब परिवार, घर के छहों सदस्यों को जन्म से मिली ऐसी बीमारी

Updated at : 04 May 2020 1:04 AM (IST)
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चेंगोना गांव का ऐसा बदनसीब परिवार, घर के छहों सदस्यों को जन्म से मिली ऐसी बीमारी

बदनसीबी के तरकश से निकलने वाले लाचारी के तीर ने एक ही परिवार के छह सदस्यों की आंखों को ऐसे बेध दिया कि उनके जीवन में अंधेरे के सिवा कुछ भी नहीं बचा.

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सतीश कुमार पांडेय, नरकटियागंज : बदनसीबी के तरकश से निकलने वाले लाचारी के तीर ने एक ही परिवार के छह सदस्यों की आंखों को ऐसे बेध दिया कि उनके जीवन में अंधेरे के सिवा कुछ भी नहीं बचा. उस पर सिस्टम की लापरवाही ऐसी कि बगल में राशन की सरकारी दुकान होने के बाद भी नेत्रहीन परिवार को राशन नहीं मिल रहा. नरकटियागंज प्रखंड के चेंगोना गांव निवासी जाकिर अंसारी के पूरे परिवार की जिंदगी लॉकडाउन है. अगल-बगल के लोग मदद कर देते हैं तो दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो जाता है. अन्यथा भूखे पेट सोना पड़ता है.जाकिर अंसारी के छह बच्चे हैं और सभी नेत्रहीन हैं. खुद जाकिर अंसारी भी नेत्रहीन हैं. दो बेटियों की शादी कर दी है, जो ससुराल में हैं. बाकि बचे एनामुल अंसारी, खुशबू व नेशा अपने अब्बा व मां मोना खातून के साथ छोटे से मकान में रहते हैं.

जाकिर बताते हैं कि वह जन्म से ही दृष्टिहीन हैं. उनकी पत्नी तो देख सकती है, लेकिन बच्चे कुछ भी नहीं देख सकते. अगल-बगल के लोग मदद कर देते हैं तो दो वक्त के रोटी का जुगाड़ हो जाता है. बाकी सब ऊपरवाले के भरोसे है. राशन के लिए कई बार अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब तक राशन कार्ड नहीं बन सका. जाकिर की पत्नी मोना बताती हैं कि बगल में ही डीलर की राशन दुकान है, लेकिन कार्ड नहीं बनने से राशन नहीं मिलता. गांव के लोग नहीं रहते तो हमारी क्या दशा होती पूछिए मत.

मदद को एकजुट है गांव, प्रशासन उदासीनजाकिर अंसारी के पूरे परिवार की मदद के लिए गांव एकजुट है. कभी सांप्रदायिक तनाव को लेकर चर्चा में आये इस गांव के लोग जाकिर की मदद करने के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. ग्रामीण अखिलेश तिवारी उर्फ पिंटू तिवारी बताते हैं कि हम लोगों से जो बन पड़ता है वो करते हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर जो मदद मिलनी चाहिए, उससे यह परिवार वंचित है.

खासकर लॉकडाउन के समय में इस परिवार की मदद के लिए अब तक कोई भी अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि या समाजिक संगठन से जुड़े लोग यहां नहीं पहुंच सके हैं.पत्नी करती है मजदूरीजाकिर की पत्नी मोना खातून मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं. उनके इस काम में बच्चे व जाकिर भी मदद करते हैं, लेकिन अंधेपन का शिकार होने के कारण वो ठीक तरीके से काम नहीं कर पाते.

फिर भी मां के इशारे पर बच्चे व खुद जाकिर भी कोई काम करने से पीछे नहीं हटते.कोट :प्रखंड प्रशासन की ओर से लॉकडाउन में सभी तबके के लोगों की मदद की जा रही है. सूचना मिली है. नेत्रहीन परिवार को प्रशासन की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी. राघवेंद्र त्रिपाठी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, नरकटियागंज

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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