Solar Energy Policy : रिन्युएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार बनायेगी भूमि बैंक
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 09 Jul 2022 4:45 PM
सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सोलर पार्क, पावर ग्रिड आदि बनाने होंगे और इसे लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होगी. झारखंड जैसे आदिवासी बहुल इलाके में किसी नीति के लिए जमीन का आवंटन एक बड़ी चुनौती है.
झारखंड सरकार ने पांच जुलाई को सौर ऊर्जा नीति 2022 की घोषणा की है. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर झारखंड सरकार इस नीति को किस तरह कारगर बनायेगी. झारखंड सरकार की सौर नीति का उद्देश्य रिन्युएबल एनर्जी के क्षेत्र में झारखंड को लीडर बनाना है. सरकार ने अगले पांच साल के लिए इस नीति की घोषणा की है.
झारखंड सरकार ने 2022-23 से 2026-27 तक सौर ऊर्जा के जरिये 4 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सोलर पार्क, पावर ग्रिड आदि बनाने होंगे और इसे लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होगी. झारखंड जैसे आदिवासी बहुल इलाके में किसी नीति के लिए जमीन का आवंटन एक बड़ी चुनौती है.
सरकार की सोलर नीति में सौर ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जो प्रावधान किये गये हैं वे इस प्रकार हैं. सरकार ने लक्ष्य प्राप्ति के लिए तीन मुख्य प्रावधान किये हैं- 1. भूमि आवंटन 2. परियोजना को प्रोत्साहन और 3. राज्यों की जरूरत के अनुसार बिजली की खरीद.
सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए जमीन का आवंटन सबसे जरूरी है, इसके लिए सबसे पहले भूमि की पहचान की जायेगी, फिर उनकी लिस्टिंग होगी और भूमि का विकास करने के बाद उसका आवंटन होगा. इस योजना के तहत सरकारी भूमि, निजी भूमि और पानी पर स्थापित किए जाने वाले सौर संयंत्रों की परिकल्पना की गयी है.
भूमि आवंटित करने से पहले सरकारी और निजी भूमि की पहचान होगी और उन्हें भूमि बैंकों में परिवर्तित किया जायेगा. उसके बाद जेरेडा इन भूमि पर सोलर एनर्जी प्लांट लगाने का काम करेगी. यह व्यवस्था राज्य के सोलर नीति में की जायेगी. खासकर बंजर भूमि का चयन इस भूमि बैंक के लिए किया जायेगा. सरकारी विभागों को इस संबंध में जानकारी देने के लिए कहा गया है. उसके बाद जेरेडा जिस जिले में जमीन है उसे उपायुक्त के साथ मिलकर काम करेगा और भूमि का आवंटन किया जायेगा.
निजी जमीनों के मालिकों को सोलर प्लांट लगाने के लिए अपनी जमीन देने के लिए प्रेरित करने के लिए जेरेडा ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट‘ जारी करेगा. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने सीएनटी और एसपीटी एक्ट के तहत आने वाली जमीन को इस नीति के तहत शामिल नहीं करने की घोषणा की है.
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सौर ऊर्जा नीति के तहत सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को औद्योगिक गतिविधि माना जाएगा. इसलिए इस कार्य के लिए भूमि का हस्तांतरण सीएनटी अधिनियम की धारा 49 और धारा 241 और एसपीटी अधिनियम की धारा 53 के तहत किये जाने की अनुमति भी दी गयी है. सौर ऊर्जा के लिए भूमि का अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनःस्थापन अधिनियम, 2013 के तहत किया जायेगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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