Sarhul 2022 LIVE: पारंपरिक विधि व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है सरहुल पर्व, निकली भव्य शोभायात्रा
Sarhul 2022 LIVE Updates: प्रकृति पूजा का पर्व सरहुल जिले में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा हैचैत्र शुक्ल पक्ष तृतीय के अवसर पर मनाया जानेवाला यह त्योहार धरती एवं सूर्य के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। करमा त्योहार के साथ सरहुल का त्योहार आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है.
दिखी आदिवासी लोक संस्कृति की झलक
शोभायात्रा को लेकर विभिन्न खोड़हा दलों में विशेष उत्साह देखा गया. पारंपरिक वेशभूषा में विभिन्न गांवों के लोग अलग-अलग दल में बंटकर शोभायात्रा में शामिल हुए. प्रत्येक खोड़हा दल एक-दूसरे से बेहतर प्रस्तुति देने को तत्पर था. शहर की सड़कों पर लय स्वर एवं ताल के साथ सरहुली गीत गूंज रहे थे. आनंद के इस उत्सव में शामिल हर सरना धर्मावलंबी मस्त था. धरती और सूरज के इस विवाह उत्सव को यादगार बनाने के लिए सभी अपनी- अपनी तरफ से प्रयत्नशील थे. मांदर की मधुर थाप, नगाड़े की गूंज तथा शंख ध्वनियों से वातावरण के मंगलमयी होने का संदेश दिया जा रहा.
गुमला शहर में निकली सरहुल पर्व पर शोभायात्रा
गुमला शहर में सरहुल पर्व पर शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें 20 हजार से अधिक लोग पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिए, महिलाएं जहां लाल पाड़ी साड़ी तो पुरुष धोती कुर्ता पहने हुए मांदर, नगाड़ा की थाप पर नाचते गाते नजर आये, सांसद सुदर्शन भगत सहित कई लोग भाग लिए,

गुमला शहर में निकली सरहुल पर्व पर शोभायात्रालोहरदगा में पारंपरिक विधि विधान व हर्षोल्लास के साथ मना प्रकृति पर्व सरहुल, निकली भव्य शोभायात्रा
प्रकृति पूजा का पर्व सरहुल जिले में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया. चैत्र शुक्ल पक्ष के तृतीय के अवसर पर मनाया जानेवाला यह त्योहार धरती एवं सूर्य के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है. करमा त्योहार के साथ सरहुल का त्योहार आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. सोमवार को सरहुल त्योहार के मौके पर शहर की सड़कें गुलजार थीं. जिले के दूर-दराज से आए हुए ग्रामीणों से शहर की शहर की गलियां पट गयीं. सड़कों व चौक चौराहों पर आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा नजर आ रही थी. सरहुल के मुख्य अनुष्ठान का प्रारंम्भ एमजी रोड स्थित झखरा कुंबा से समारोहपूर्वक हुआ. समारोह के मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया.झखरा कुंबा में पारंपरिक पूजन के बाद केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष मनी उरांव व अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में दोपहर बाद शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी.
सरहुल पर्व पर 62 सालों से गुमला में निकल रहा जुलूस
प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर आदिवासी समाज द्वारा गुमला में विगत 62 सालों से जुलूस निकाला जा रहा है. गुमला में सबसे पहले सन 1961 में जुलूस निकाला गया था. तब और अब में अंतर यह है कि तब लगभग 500 लोग जुलूस में शामिल होते थे और अब जुलूस में शामिल होने वाले लोगों की संख्या एक लाख तक है. जुलूस में आदिवासी समाज की कला, संस्कृति, पंरपरा और वेशभूषा देखने को मिलती है. इस संबंध में प्रभात खबर प्रतिनिधि ने पूर्व विधायक बैरागी उरांव से खास बातचीत की. श्री उरांव ने बताया कि 1961 से पहले 1960 तक गांव के सरना स्थल पर पूजा के बाद वहीं पास नाच-गाना होता था. उस समय जुलूस निकालने की परंपरा नहीं थी. पूजा के बाद सरना स्थल पर ही नाच-गाना होता था. जो रातभर चलता था.
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सरहुल पर्व की शुभकामनाएं दी
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने करम टोली स्थित आदिवासी बालक – बालिका छात्रावास में आयोजित सरहुल पर्व महोत्सव -2022 में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने पूजा स्थल पहुंच कर सभी को सरहुल पर्व की शुभकामनाएं दी.
खरसावां के आनंदडीह में धूमधाम के साथ मनाया गया सरहुल पर्व
खरसावां के आनंदडीह गांव में सोमवार को प्रकृति का पर्व सरहुल धूमधाम के साथ मनाई गई. मौके पर सरना स्थल में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा की गयी. पुजारी नरसिह उरांव, जागनाथ उरांव, जगदीश उरांव व बैसगु उरांव ने सरना स्थल पर विधिवत पूजा अर्चना की. पूजा में सखुआ का फूल, सिंदूर, जल व दूब घास चढ़ाया गया. पूजा समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं के बीच सखुआ के फूलों को ही प्रसाद के रुप में वितरित किया.
शचिंद्र कुमार दाश, सरायकेला-खरसावां
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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