काल भैरव मंदिर में जब पीएम मोदी पहुंचे, तो क्यों उतारी गई नजर? क्या है काशी कोतवाल के दर्शन की ये परंपरा

Kashi Vishwanath Corridor: पीएम मोदी ने काल भैरव बाबा की आरती करने के बाद उनकी चौखट पर अपना मत्था टेका और मंदिर की फेरी लगाते हुए निकास द्वार से बाहर निकले. पीएम मोदी का इस दौरान मंदिर में नजर उतारा गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. सोमवार की सुबह बाबतपुर एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से होते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी के कोतवाल काल भैरव का दर्शन करने पहुंचे. पीएम मोदी करीब 11:00 बजे मंदिर में प्रवेश किया और 11: 15 बजे तक बाबा काल भैरव का विधि विधान से पूजन अर्चन किया.
इस अवसर पर काल-भैरव मंदिर व्यवस्थापक नरेंद्र गिरी ने प्रधानमंत्री के पूजन को लेकर बताया कि आज मन्दिर में विश्व कल्याण पूजन कराया गया. क्योंकि देश में आएविपत्ति को दूर करने के लिए इस पूजन को एकमात्र देश के बारे में सोचने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है. उन्होंने आगे बताया कि आज काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण कर के उन्होंने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया.
इस दौरान पुजारियों के द्वारा काल भैरव अष्टकम मंत्र का जाप कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दर्शन पूजन कराया गया. इसके बाद पुजारियों के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रुद्राक्ष की माला, गजरा, केशरी रंग का साल, स्मृति चिन्ह और प्रसाद भेंट किया गया. वहीं सरसों के तेल से पीएम मोदी का काल भैरव मंदिर में नजर उतारा गया.
पीएम मोदी ने काल भैरव बाबा की आरती करने के बाद उनकी चौखट पर अपना मत्था टेका और मंदिर की फेरी लगाते हुए निकास द्वार से बाहर निकले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मंदिर से बाहर निकले तो आसपास रहने वाले लोगों ने हर हर महादेव का नारा लगाकर उनका स्वागत किया.
पीएम मोदी ने भी हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया और राजघाट की ओर निकल गए. इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री थे.
परंपरा के बारे में जानिए- बाबा काल भैरव मंदिर के अंदर पीएम के ऊपर से तेल उतार कर उनकी छाया दान कराया गया. पीएम पर से तेल को उतार के फूल की कटोरी में उनकी छाया दान कराया गया, जिससे किसी प्रकार का ग्रह भी दूर हो जाए. तेल को निछावर करने के पीछे मान्यता है कि 9 ग्रह में में कोई भी ग्रह आप पर हावी होता है, तो काल का आगमन होता है.
वहीं काशी के कोतवाल के यहां नजर उतारने के बाद बाबा काल भैरव के सामने काल का भी नही चलता है. बताया जाता है कि किसी भी प्रकार की बाधा हो, किसी भी प्रकार का षड्यंत्र करता हो, यहां पर नजर उतारने से उसका सर्वनाश हो जाता है.
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रिपोर्ट : विपिन सिंह
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