Pitru Paksha 2023 की आज से हो रही है शुरूआत, यहां जानें फल्गु तीर्थ जाकर तर्पण करने का महत्व

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Pitru Paksha 2023 की आज से हो रही है शुरूआत, यहां जानें फल्गु तीर्थ जाकर तर्पण करने का महत्व

Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष की शुरुआत आज 29 सितंबर 2023 से हो रही है, जो अगले महीने 14 अक्‍टूबर 2023 तक चलेगी. पितृपक्ष में श्राद्धकर्म करना पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. पिंडदान व श्राद्ध कर्म करने के लिए देशभर में 55 स्थान हैं, लेकिन उनमें बिहार का गया तीर्थ सर्वोपरि है.

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Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष की शुरूआत आज 29 सितंबर से हो रही है. पितृ पक्ष हर साल भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से शुरू हो जाती है. इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत आज 29 सितंबर 2023 से हो चुकी है, जो अगले महीने 14 अक्‍टूबर 2023 तक चलेगी. पितृपक्ष में श्राद्धकर्म करना पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को शक्ति मिलती है और वह शक्ति पितर को परलोक पहुंचाने में मदद करती है. पिंडदान व श्राद्ध कर्म करने के लिए देशभर में 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन उनमें बिहार का गया तीर्थ सर्वोपरि है.

गया में क्यों करते हैं पिंडदान

पितृ पक्ष में वैसे तो देश के कई स्थानों पर पिंडदान और तर्पण किए जाने की परंपरा है लेकिन गया (बिहार) में पिंडदान का अलग-अलग महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से 108 कुल और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

  • ब्रह्मा जी ने गयासुर को वरदान दिया था, जो भी लोग गया में पितृपक्ष के अवधि में इस स्थान पर अपने पितर को पिंडदान करेगा उनको मोक्ष मिलेगा.

  • श्रीराम जी के वन जाने के बाद दशरथ जी का मृत्यु हो गयी थी. इस दौरान सीता जी ने गया में ही दशरथ जी की प्रेत आत्मा को पिंड दिया था. उस समय से यह स्थान को पिंडदान करने तथा तर्पण करने से दशरथ जी ने माता सीता का दिया हुआ पिंडदान स्वीकार किया था.

  • गया में पुत्र को जाने तथा फल्गु नदी में स्पर्श करने से पितर का स्वर्गवास होता है.

  • गया क्षेत्र में तिल के साथ समी पत्र के प्रमाण पिंड देने से पितर का अक्षयलोक को प्राप्त होता है. यहां पर पिंडदान करने से ब्रह्महत्या सुरापान इत्यादि घोर पाप से मुक्त होता है.

  • गया में पिंडदान करने से कोटि तीर्थ तथा अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है. यहां पर श्राद्ध करने वाले को कोई काल में पिंड दान कर सकते है. साथ ही यहां ब्राह्मणों को भोजन करने से पितर की तृप्ति होती है.

गयाजी से अच्छे संदेश लेकर जाएं इसीलिए रखते ख्याल

विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभुलाल बिट्ठल बताते हैं कि यात्रियों के गया आगमन पर उन्हें कर्मकांड के साथ-साथ कोई असुविधा न हो इसका ख्याल जिला प्रशासन और समिति द्वारा रखा जाता है. ताकि वे गयाजी से अच्छे संदेश लेकर जाएं. यह प्रयास समिति ही नहीं पूरे गयावासियों का होता है. पितृपक्ष के दौरान जो महत्वपूर्ण पिंडवेदियों पर तीर्थयात्री कर्मकांड को जाते हैं उनमें सीताकुंड, अक्षयवट है.

फल्गु तीर्थ जाकर तर्पण करने का महत्व..

वायुपुराण में कहा गया फल्गु तीर्थ सभी तीर्थों से श्रेष्ठ होने से सर्व प्रथम फल्गु तीर्थ जाकर तर्पण श्राद्ध करना चाहिए. वहां श्राद्ध करने से पितरों की मुक्ति तथा करने वालों का तरण होता है. ब्रह्मा जी की प्रार्थना से भगवान विष्णु फल्गु रूप धारण किये. दक्षिणाग्नि में ब्रह्मा जी के द्वारा हवन किये जाने पर फल्गु तीर्थ की उत्पति हुई. अखिल ब्रह्मांड में जितने भी तीर्थ हैं, वे सब देवताओं के साथ फल्गु तीर्थ में नित्य स्नान करने आते हैं.

यहां जानें श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां

  • 29 सितंबर 2023 दिन शुक्रवार- पूर्णिमा श्राद्ध

  • 29 सितंबर 2023 दिन शुक्रवार- प्रतिपदा श्राद्ध

  • 30 सितंबर 2023 दिन शनिवार- द्वितीया श्राद्ध

  • 01 अक्टूबर 2023 दिन रविवार- तृतीया श्राद्ध

  • 02 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार- चतुर्थी श्राद्ध

  • 03 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार- पंचमी श्राद्ध

  • 04 अक्टूबर 2023 दिन बुधवार- षष्ठी श्राद्ध

  • 05 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार- सप्तमी श्राद्ध

  • 06 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार- अष्टमी श्राद्ध

  • 07 अक्टूबर 2023 दिन शनिवार- नवमी श्राद्ध

  • 08 अक्टूबर 2023 दिन रविवार- दशमी श्राद्ध

  • 09 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार- एकादशी श्राद्ध

  • 11 अक्टूबर 2023 दिन बुधवार- द्वादशी श्राद्ध

  • 12 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार- त्रयोदशी श्राद्ध

  • 13 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार- चतुर्दशी श्राद्ध

  • 14 अक्टूबर 2023 दिन शनिवार- सर्व पितृ अमावस्या

इ-पिंडदान का जानिए तरीका..

इ-पिंडदान के लिए तीर्थयात्रियों को ब्राह्मण दक्षिणा, कर्मकांड की वीडियो रिकॉर्डिंग समेत आवासन, भोजन, पूजन सामग्री, यातायात और अन्य सभी सुविधाओं के लिए प्रति तीर्थयात्री 23,000(तेइस हजार) रुपए भुगतान करने होंगे. इन सुविधाओं को www.bstdc.bihar.gov.in या [email protected] के माध्यम से संपर्क करके दे सकते हैं.

इ-पिंडदान कैसे करते हैं..

इ-पिंडदान स्थानीय स्तर पर एक प्रतिनिधि रखकर कराया जाता है. पिंडदान से जुड़े सामान की खरीदारी, पिंडदान व कर्मकांड समेत अन्य सभी काम की वीडियोग्राफी करवाकर कॉरपोरेशन के माध्यम से पिंडदान कराने वाले तीर्थयात्री के पासे इसे भेज दी जाती है. इस कर्मकांड के लिए किसी को भी प्रतिनिधि बनवाया जा सकता है. इसकी जानकारी इ-पिंडदान पैकेज के अधिकृत पंडा सुनील कुमार ने दी.

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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