Nirjala Ekadashi 2022:11 जून को है निर्जला एकादशी व्रत,एक दिन पहले ही शुरू हो जाते हैं व्रत के नियम,जानें

Nirjala Ekadashi 2022: इस बार निर्जला एकादशी व्रत 11 जून को रखा जा रहा है और व्रत का पारण 12 जून को होगा. इस व्रत को भक्त निर्जला रह कर पूर्ण करते हैं साथ ही व्रत के एक दिन पहले संध्या के समय से ही एकादशी व्रत के नियम शुरू हो जाते हैं. डिटेल जानने के लिए आगे पढ़ें.
Nirjala Ekadashi 2022: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत (Ekadashi) का विशेष महत्व है भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के प्रसन्न करने के लिए यह व्रत किया जाता है. यह व्रत शुभ फलदाई मानी जाती है महीने में कुल दो एकादशी मनाया जाता है. साल में 24 एकादशी मनाया जाता है. ज्येष्ठ मास की एकादशी को निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2022) के नाम से जाना जाता है. इसे भीमसेनी एकादशी (Bhimsen Ekadashi) भी कहते हैं इस व्रत को करने वाले निर्जल रहकर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं. मान्यता है कि इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होता है लम्बी आयु तथा स्वास्थ ठीक रहता है. यह व्रत पाप का नाश करने वाला माना गया है.
जो लोग बारह मास का एकादशी व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें निर्जला एकादशी व्रत जरूर करना चाहिए. इस व्रत को करने से भी 24 एकादशी व्रत का पुण्य मिल जाता है. निर्जला एकादशी विधि व्रत के नियम जानें.
(1 ) जिस दिन व्रत करना है उसके एक दिन पहले संध्याकाल से इस व्रत के नियम शुरू हो जाते हैं. स्वस्छ रहें और संध्या काल के बाद भोजन नहीं करें.
(3 )व्रत के दिन सुबह में स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का पूजन करें पीला वस्त्र धारण करें.
(4 )पूजन के बाद कथा सुनें.
(5 )इस दिन जो व्रत करते हैं उनको विशेष दान (शरबत ) करना चाहिए. मिट्टी के पात्र में जल भरकर उसमें गुड़ या शक्कर डाले तथा सफेद कपड़ा से पात्र को ढक कर दक्षिणा के साथ ब्रह्मण को दान दें.
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व्रत का मुहूर्त :
11 जून 2022, दिन शनिवार
पारण का मुहूर्त :
12 जून, 2022, दिन रविवार सुबह 05:00 से 7 :00 बजे तक है
महाभारत के समय एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने महर्षि वेद व्यास जी से पूछा- ‘’हे मुनिवर! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं व मुझे भी व्रत करने के लिए कहते हैं. लेकिन मैं भूखा नहीं रह सकता हूं अत: आप मुझे कृपा करके बताएं कि बिना उपवास किए एकादशी का फल कैसे प्राप्त किया जा सकता है.’’ भीम के अनुरोध पर वेद व्यास जी ने कहा- ‘’पुत्र तुम निर्जला एकादशी का व्रत करो, इसे निर्जला एकादशी कहते हैं. इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना पड़़ता है. जो भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीये रहता है और सच्ची श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे वर्ष में जितनी एकादशी आती हैं उन सब एकादशी का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है.’’ महर्षि वेद व्यास के वचन सुनकर भीमसेन निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने लगे और पाप मुक्त हो गए. इसके बाद से निर्जला एकादशी मनाई जाती है.
संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847
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