Nag Panchami 2023 Date: नाग पंचमी पूजा आज, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय समेत संपूर्ण डिटेल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Aug 2023 7:35 AM
Nag Panchami 2023 Date: सावन महीने की पंचमी तिथि नाग देवता के पूजन के लिये विशेष माना जाता है. इस दिन को नाग पंचमी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन नाग देव को दूध से स्नान कराने और पूजन करने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है. धन, सुख, समृद्धि में वूद्धि होती है. जानें नाग पंचमी 2023 कब है?
Nag Panchami 2023 Date: सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी त्योहार के रूप में मनाया जाता है. इस दिन नाग देवता की विशेष पूजा होती है. इस पूजा में नाग देवता को दुध अर्पित किया जाता है. इस विशेष दिन पर महिलाएं अपने भाइयों तथा परिवार की सुरक्षा के लिये नाग देवता से प्रार्थना करती हैं. धार्मिक रूप से श्रावण माह की पंचमी तिथि को नाग देवताओं के पूजन के लिये बहुत विशेष माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन नाग देव की पूजा से धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि हाेती है. पंडित कौशल मिश्रा के अनुसार जानें इस बार नागपंचमी कब है? पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र समेत अन्य जरूरी डिटेल जानने के लिए आगे पढ़ें.
नाग पंचमी 21 अगस्त 2023, सोमवार को
नाग पंचमी पूजा मुहूर्त – प्रातः 05:53 बजे से प्रातः 08:30 बजे तक
अवधि – 02 घंटे 36 मिनट
पंचमी तिथि आरंभ – 21 अगस्त 2023 को 12:21 पूर्वाह्न
पंचमी तिथि समाप्त – 22 अगस्त 2023 को प्रातः 02:00 बजे
नोट: (तिथि और मुहूर्त दृक पंचांग के अनुसार)
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नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नानादि करके स्वच्छ कपड़े धारण करें. पूजा सामग्री लेकर पास के मंदिर जायें.
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नाग देवता को हल्दी, रोली (लाल सिंदूर), चावल, दूध, फूल और दीप अर्पित करें.
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अब कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर नाग देवता को अर्पित करें.
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पूजा के बाद आरती करें.
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पूजा के अंत में नाग पंचमी की कथा सुनें.
धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देव की पूजा करने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है. ज्योतिष के अनुसार इस दिन चांदी के बने नाग-नागिन का जोड़ा किसी मंदिर में दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. कहते हैं कि यदि नागपंचमी के दिन नाग के दर्शन हो जाएं तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है. नाग के काटने का डर भी नहीं रहता है.
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
पौराणिक हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्पों को पौराणिक काल से ही देवता के रूप में पूजनीय माना गया है. नाग पंचमी के दिन नाग देव की विशेष पूजा का विशेष महत्व है. ऐसी भी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने वाले व्यक्ति को सांप के डसने का भय नहीं होता. ऐसा माना जाता है कि इस दिन सर्पों को दूध से स्नान कराने और पूजन करने और दूध पिलाने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन घर के प्रवेश द्वार पर नाग चित्र बनाने की भी परम्परा है. ऐसा करने से घर नाग कृपा से सुरक्षित रहता है.
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