जामताड़ा : जगवाडीह गांव में एक मोहली परिवार में है पांच बेटियां, अब तक नहीं देख पायी स्कूल

Updated at : 05 Jan 2024 4:07 AM (IST)
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जामताड़ा : जगवाडीह गांव में एक मोहली परिवार में है पांच बेटियां, अब तक नहीं देख पायी स्कूल

अमृत मोहली ने कहा कि हमारे परिवार में 15 सदस्य है. परिवार का राशनकार्ड तो है, लेकिन उसमें आधार कार्ड जुड़ा नहीं होने के कारण महज दो यूनिट ही चावल मिलता है. सरकार की योजनाओं से भी वंचित है.

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जामताड़ा : सरकार लोगों को रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा मुहैया कराने की दावा तो करती है, लेकिन अगर किसी परिवार में पांच बेटियां आज तक स्कूल नहीं देखी हो तो इसे क्या कहेंगे? क्या सरकार के बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा अब शिक्षा विभाग में कुर्सीतोड़ बाबुओं की वजह से दम तोड़ने लगा है. ऐसा ही दर्द भरी दास्तां नारायणपुर प्रखंड की टोपाटांड पंचायत अंतर्गत जगवाडीह गांव का है, जहां विश्वनाथ मोहली और अमृत मोहली का परिवार बदहाली में जीने को मजबूर हैं. विश्वनाथ मोहली को पांच बेटी है, जिनमें किरण कुमारी (12), संजोती कुमारी (नौ), लक्ष्मी कुमारी (सात), चांदनी कुमारी (पांच) व आरती कुमारी (दो) वर्ष). वहीं विश्वनाथ मोहली के भाई अमृत मोहली को भी एक पुत्री है, जिसका नाम पूनम कुमारी (सात) है. विश्वनाथ मोहली ने बताया कि मेरी पांच बेटियां हैं, जिनमें चार विद्यालय जाने के लायक है. आधार कार्ड नहीं होने से नामांकन नहीं हो रहा है. मेरे भाई का भी एक पुत्री है जो सात वर्ष का है उसका भी आधार कार्ड नहीं है. वह भी विद्यालय जाने से वंचित है. कहा कि हम लोगों ने बच्चों का आधार कार्ड बनाने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन नहीं बन पाया. बच्चियों को पढ़ने की इच्छा है, लेकिन विद्यालय में नामांकन नहीं हो रहा है.

परिवार के 15 सदस्यों में मात्र दो यूनिट मिलता है चावल

अमृत मोहली ने कहा कि हमारे परिवार में 15 सदस्य है. परिवार का राशनकार्ड तो है, लेकिन उसमें आधार कार्ड जुड़ा नहीं होने के कारण महज दो यूनिट ही चावल मिलता है. सरकार की योजनाओं से भी वंचित है. यही कारण है कि आज भी टूटे फूटे कच्चा मकान में रहते हैं. बारिश के समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कुल मिलाकर इस मोहली परिवार की स्थिति ऐसी है कि उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं. घर के समीप एक चापाकल है उस चापाकल से पानी निकासी के लिए किसी सरकारी मुलाजिम ने नाली तो बना दिया, लेकिन गंदा पानी उसी के आंगन से होकर गुजरता है, जहां पांच मिनट भी खड़ा होना दूभर है, बेबस परिवार इस गंदी नाली के सामने बैठकर दिन भर का काम कर रहा है. अमृत मोहली और विश्वनाथ मोहली ने बताया कि हम लोग बांस की सामग्री बनाकर जैसे तैसे परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं. अब इसकी भी बाजार में मांग कम हो गयी है. यह परिवार अपने बेटियों को पढ़ाना चाह रहा है, लेकिन उनकी बेबसी गरीबी सामने आ रहा है. इस परिवार का कहना है कि सरकार हमारी मदद करे हम अपनी बेटियों को पढ़ायेंगे. हालांकि बच्चियों के स्कूल में नामांकन नहीं होने के कई कारण शिक्षा विभाग के मुलाजिम बता देंगे. विगत दिनों बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए प्रयास कार्यक्रम भी चलाया गया था. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रयास कार्यक्रम में क्या यह पांचों बच्ची नहीं आयी.

कहते हैं डीएसइ

मामला मेरे संज्ञान में अभी आया है. आधार कार्ड नहीं होने के कारण बच्चियों का नामांकन नहीं होगा ऐसा नियम नहीं है. पोषक क्षेत्र में आने वाले विद्यालय के शिक्षक शिशु पंजी तैयार करते हैं. ऐसी भूल नहीं होनी चाहिए, इसकी जांच की जायेगी एवं बच्चियों को तुरंत विद्यालय से जोड़ा जायेगा.

– दीपक राम, डीएसइ, जामताड़ा

बोले बीडीओ

मामला मेरे संज्ञान में आया है. किन कारणों से पांचों बच्चियां विद्यालय में नामांकन से अभी तक वंचित रही, इसकी जानकारी ली जायेगी. परिवार की हर संभव मदद की जायेगी. आधार कार्ड बनाने के लिए अविलंब पहल किया जायेगा.

– मुरली यादव, बीडीओ, नारायणपुर

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