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Happy Kojagiri Purnima: कोजागर लक्ष्मी पूजा आज, यहां देखें व्रत विधि,मुहूर्त और शुभ योग

Updated at : 19 Oct 2021 10:46 AM (IST)
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Happy Kojagiri Purnima: कोजागर लक्ष्मी पूजा आज, यहां देखें व्रत विधि,मुहूर्त और शुभ योग

Happy Kojagiri Purnima: शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा के अवसर को माता लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. आश्विन मास की शरद पूर्णिमा इस वर्ष 19 अक्तूबर को मनाई जा रही है. कोजागरी पूजा को भारत के अधिकांश हिस्सों में शरद पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है.

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शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा के अवसर को माता लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. आश्विन मास की शरद पूर्णिमा इस वर्ष आज यानी 19 अक्तूबर को मनाई जा रही है. कोजागरी पूजा को भारत के अधिकांश हिस्सों में शरद पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है. मंगलवार का दिन हनुमान जी को भी समर्पित है. माना जाता है कि इस दिन पवनपुत्र के पूजन से जीवन से सारे कष्ट दूर होते हैं.

शरद पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा तिथि आरंभ – 19 अक्टूबर शाम 07 बजे से

शरद पूर्णिमा तिथि समाप्त – 20 अक्टूबर रात 08 बजकर 20 मिनट तक

कोजागरी व्रत विधि :

नारद पुराण के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को प्रातः स्नान कर उपवास रखना चाहिए. इस दिन पीतल, चांदी, तांबे या सोने से बनी लक्ष्मी प्रतिमा को कपड़े से ढंककर विभिन्न विधियों द्वारा देवी पूजा करनी चाहिए. इसके पश्चात रात्रि को चंद्र उदय होने पर घी के 100 दीपक जलाने चाहिए. दूध से बनी हुई खीर को बर्तन में रखकर चांदनी रात में रख देना चाहिए.

कुछ समय बाद चांद की रोशनी में रखी हुई खीर का देवी लक्ष्मी को भोग लगाकर उसमें से ही ब्राह्मणों को प्रसादस्वरूप दान देना चाहिए. अगले दिन माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का पारणा करना चाहिए.

खीर का है खास महत्व

इस दिन रात के समय जागरण या पूजा करना चाहिए, क्योंकि कोजागर या कोजागरी व्रत में एक प्रचलित कथा है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात के समय भ्रमण कर यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है. जो जागता है उसके घर में मां अवश्य आती हैं.

माता लक्ष्मी की व्रत विधि

  • शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की प्रतिमा को कपड़े से ढककर पूजा करें

  • सुबह माता लक्ष्मी कि पूजा करने के बाद चंद्रोदय के समय पुनः पूजा करें

  • रात्रि में माता लक्ष्मी के सामने घी के 100 दीपक जला दें

  • इसके बाद लक्ष्मी मंत्र, आरती और विधिवत पूजन करें

  • उसके उपरांत शरद पूर्णिमा की खीर का देवी लक्ष्मी को भोग लगाकर उसमें से ही ब्राह्मणों को प्रसाद स्वरूप दान दें

  • अगली सुबह माता लक्ष्मी की पूजा करके व्रत का पारण करें

Posted By: Shaurya Punj

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