झारखंड की युवा कवयित्री डाॅ पार्वती तिर्की को मिला प्रलेक नवलेखन सम्मान, कहा-यह मेरे जीवन का पहला सम्मान

Edited by Rajneesh Anand
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सम्मान मिलने के बाद प्रभात खबर से बात करते हुए पार्वती तिर्की ने कहा कि यह मेरे जीवन का पहला सम्मान है जो मेरे पहले काव्य संग्रह के लिए दिया जा रहा है. बहुत खुशी हो रही है.

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प्रलेक न्यास द्वारा वर्ष 2023 का प्रलेक नवलेखन सम्मान सर्वसम्मति से युवा कवयित्री डाॅ पार्वती तिर्की को दिये जाने की घोषणा हुई है. इस संबंध में न्यास ने सूचना दी है. प्रलेक नवलेखन सम्मान पार्वती तिर्की के प्रथम काव्य संग्रह ‘फिर उगाना’ के लिए दिया जा रहा है.

सम्मान मिलने पर बहुत खुश हूं : पार्वती तिर्की

सम्मान मिलने के बाद प्रभात खबर से बात करते हुए पार्वती तिर्की ने कहा कि यह मेरे जीवन का पहला सम्मान है जो मेरे पहले काव्य संग्रह के लिए दिया जा रहा है. बहुत खुशी हो रही है. मेरा पहला काव्य संग्रह आदिवासी जीवन, संस्कृति, लोककथाओं और लोक जीवन से जुड़ा है. बहुत खुश हूं.

समाज का यथार्थ बताती कविताएं

सम्मान दिये जाने की सूचना के साथ ही न्यास की ओर से यह भी कहा गया है कि पार्वती तिर्की की कविताएं समाज का यथार्थ तो बताती ही हैं साथ ही साथ भविष्य की संभावनाओं को भी दर्शाती हैं. भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए न्यास की ओर से कहा गया है कि आने वाले समय में पार्वती की कविताएं समझ का मार्गदर्शन करेंगी.

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मूलत: गुमला की रहने वाली हैं पार्वती

डाॅ पार्वती तिर्की मूलत: झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली हैं. वे वर्तमान में रांची के राम लखन सिंह यादव काॅलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी स्कूली शिक्षा गुमला के जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई है. मात्र 29 साल की पार्वती तिर्की की यह बड़ी उपलब्धि

सोशल मीडिया में मिल रही बधाई

प्रलेक नवलेखन सम्मान की घोषणा होने के बाद सोशल मीडिया में उन्हें बधाई दी जा रही है. झारखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार महादेव टोप्पो ने भी उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए हार्दिक अभिनंदन लिखा है. पार्वती टोप्पो ने प्रलेक न्यास को सोशल मीडिया पर ही धन्यवाद दिया है. उर्वशी गहलोत लिखती हैं-वाह बहुत मुबारक पारो. मुझे पहले से तुम पर नाज है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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