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Jharkhand Mini Lockdown Impact : लंबी दूरी की बसें नहीं चलने से स्टेट हाइवे के किनारे संचालित ढाबा और होटल बंदी के कगार पर, सुध लेने की अपील

Updated at : 07 Jun 2021 9:10 PM (IST)
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Jharkhand Mini Lockdown Impact : लंबी दूरी की बसें नहीं चलने से स्टेट हाइवे के किनारे संचालित ढाबा और होटल बंदी के कगार पर, सुध लेने की अपील

Jharkhand News (इटखोरी, चतरा) : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण ने कई लोगों के धंधा को मंदा कर दिया है. सवारी बसों व अन्य वाहनों के नहीं चलने से स्टेट हाइवे के किनारे संचालित ढाबा व होटल बंद होने के कगार पर है. दूसरों को भोजन कराने वाले ढाबा संचालक खुद भुखमरी के कगार पर है. ग्राहक नहीं आने के कारण मंदी का सामना करना पड़ रहा है. ढाबा संचालक ने राज्य सरकार से इस दिशा में भी विशेष पहल करने की मांग की है, ताकि इनकी जिंदगी में भी पहले की तरह से चल सके.

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Jharkhand News (इटखोरी, चतरा) : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण ने कई लोगों के धंधा को मंदा कर दिया है. सवारी बसों व अन्य वाहनों के नहीं चलने से स्टेट हाइवे के किनारे संचालित ढाबा व होटल बंद होने के कगार पर है. दूसरों को भोजन कराने वाले ढाबा संचालक खुद भुखमरी के कगार पर है. ग्राहक नहीं आने के कारण मंदी का सामना करना पड़ रहा है. ढाबा संचालक ने राज्य सरकार से इस दिशा में भी विशेष पहल करने की मांग की है, ताकि इनकी जिंदगी में भी पहले की तरह से चल सके.

ढाबा संचालक अर्जुन दांगी ने कहा कि जब स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के कारण जबसे सवारी गाड़ी का परिचालन बंद हुआ है तब से नुकसान उठाना पड़ रहा है. बाहरी ग्राहक नहीं आते हैं. पहले जहां 1500 रुपये रोजाना की बिक्री होती थी, वहीं अब किसी तरह 400 रुपये की ही बिक्री हो पाती है. आमदनी नहीं होने से घर से ही नुकसान हो रहा है. बिक्री नहीं होने के कारण बना हुआ भोजन फेंकना पड़ता है.

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प्रकाश होटल के संचालक सुरेंद्र कुमार केसरी ने कहा कि वर्तमान हालत ऐसा हो गया है कि जीविकोपार्जन चलाना भी मुश्किल है. केवल अपने लिए भोजन बनाना पड़ रहा है. सवारी गाड़ियों के नहीं चलने से काफी परेशानी झेलना पड़ रहा है. बिक्री नहीं होता है. केवल समय बिता रहे हैं.

मनोज पासवान ने कहा कि पहले 1200 से 1500 रुपये रोजाना बेचते थे, लेकिन अभी 300 रुपये बेचते हैं. किसी तरह अपने घर का खर्चा निकाल रहे हैं. कभी-कभी तो पूंजी भी नहीं लौटता है. जबतक बाहरी ग्राहक नहीं आयेंगे तबतक ढाबा चलाने में नुकसान होते रहेगा. इसके अलावा स्टाफ का खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है.

Posted By : Samir Ranjan.

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