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झारखंड के श्रमिक बॉर्डर पर देंगे चीन को ‘चुनौती’, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गृह मंत्री अमित शाह कर चुके हैं बात

Updated at : 06 Jun 2020 6:48 PM (IST)
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झारखंड के श्रमिक बॉर्डर पर देंगे चीन को ‘चुनौती’, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गृह मंत्री अमित शाह कर चुके हैं बात

Indian Railways News, Jharkhand News: Lockdown के दौरान लद्दाख में फंसे झारखंड के 60 प्रवासी श्रमिकों (Migrant Labours) को हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की सरकार ने पिछले दिनों एयरलिफ्ट किया. दुमका (Dumka News) जिला के इन श्रमिकों की घर वापसी कराने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अगुवाई वाली हेमंत सोरेन की सरकार ने 8 लाख रुपये खर्च किये. फिर अंडमान निकोबार से लोगों को विमान से रांची और फिर उनके घर पहुंचाया गया. अब दुमका जिले से बड़ी संख्या में लोगों को लेह-लद्दाख, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड स्पेशल ट्रेन से भेजा जायेगा. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. ये लोग सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए देश के दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क बनाने जायेंगे.

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Indian Railways News, Jharkhand News: रांची : भारत और चीन के सीमा विवाद के बीच ड्रैगन को ‘चुनौती’ देने के लिए झारखंड के श्रमिक बॉर्डर पर जाने वाले हैं. पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने जब झारखंड के मुख्यमंत्री से लॉकडाउन पर चर्चा की, उसी दौरान उन्होंने हेमंत सोरेन से श्रमिकों को सीमा पर भेजने के बारे में भी बात की. बताया जा रहा है कि प्रदेश से जो लोग सीमा पर भेजे जायेंगे, उनमें अधिकतर दुमका जिला से ही हैं.

गृह मंत्री अमित शाह ने 22 मई को भारतीय रेलवे को इस संबंध में चिट्ठी भी लिख दी. हालांकि, झारखंड के श्रम मंत्री के हवाले से यह खबर चली थी कि प्रदेश के श्रमिकों को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का काम करने के लिए नहीं भेजा जायेगा, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसका खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि इस संबंध में अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है.

बहरहाल, रिपोर्ट है कि दारबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी (डीएस-डीबीओ), रोहतांग टनल और मनाली एवं जंस्कार घाटी को लेह से जोड़ने वाली सामरिक महत्व की एक और सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) को सौंपी है. यह सड़क लद्दाख सेक्टर में बननी है.

रक्षा मंत्रालय ने चाहता है कि जल्द से जल्द 11,815 श्रमिकों को सड़क निर्माण के क्षेत्र में पहुंचा दिया जाये. इसलिए गृह मंत्रालय ने भारतीय रेलवे से आग्रह किया है कि वह श्रमिकों को चीन की सीमा से सटे निर्माण स्थलों (जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश) पर पहुंचाने के लिए 11 स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था करे, ताकि निर्माण कार्य में तेजी आये.

चीन की सीमा से सटे इलाकों में भारत सरकार ने सड़कों का जाल बिछाने का फैसला किया है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बीआरओ को सामरिक महत्व की 61 सड़कों का निर्माण करने के लिए बीआरओ को कहा गया है. इसके तहत भारतीय सीमा में 3,409 किलोमीटर लंबी सड़क बननी है. इनमें से 981.17 किलोमीटर लंबी 28 सड़कों का निर्माण वर्ष 2018 में ही पूरा हो चुका है. शेष 27 सड़कों को एक-दूसरे से जोड़ा जा चुका है.

इस वक्त बीआरओ पूर्वोत्तर की बेहद अहम परियोजनाओं पर काम कर रहा है. खासकर सेला टनल पर. यह टनल ब्रह्मपुत्र नद में भारतीय रेल की मदद से बीआरओ बनायेगा, जो असम और अरुणाचल को जोड़ेगा. इस टनल का निर्माण पूरा हो जाने के बाद असम के गुवाहाटी और अरुणाचल प्रदेश के तवांग के बीच सालों भर लगातार संपर्क बना रहेगा. इसे ऑल वेदर टनल कहा जा रहा है.

ज्ञात हो कि पिछले दिनों भारत की सीमा में तीन किलोमीटर अंदर तक घुस आयी चीन की सेना लद्दाख के गालवां क्षेत्र में भारत सरकार की ओर से बनायी जा रही 255 किलोमीटर लंबी दारबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी रोड से सकते में आ गयी है. यह सड़क देश के आखिरी सैनिक पोस्ट काराकोरम पास तक जाती है. यह सड़क अक्साई चिन के करीब है और चीन को डर है कि इस सड़क की मदद से भारतीय सेना ल्हासा-काशगर हाइवे के जरिये उसे चुनौती दे सकती है.

भारतीय सेना 17 हजार फुट की ऊंचाई पर इस सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद महज 6 घंटे में लेह से दौलत बेग ओल्डी तक पहुंच जायेगी. इस वक्त सेना को यहां पहुंचने में दो दिन का वक्त लग जाता है. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि इतनी ऊंचाई पर कुछ ही दिनों तक काम हो पाता है. लद्दाख के इस दुर्गम क्षेत्र में मई से नवंबर तक ही काम हो पाता है. सामरिक महत्व के इस क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका बेहद अहम होती है.

भारत सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है, जब भारतीय और चीनी सैनिक लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आमने-सामने आ गये. चीन ने लद्दाख सेक्टर में विवादित सीमा के पास 5,000 सैनिकों और तोपों की तैनाती की है. लद्दाख प्रशासन ने 15 मई को बीआरओ को लिखा था कि उसे आगे के क्षेत्रों में काम के लिए शामिल किये जा रहे श्रम बल से कोई आपत्ति नहीं है.

इसमें कहा गया है कि 14 दिन तक लद्दाख पहुंचने के बाद मजदूरों को छोड़ दिया जायेगा और निर्माण कार्य के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का सख्ती से पालन किया जायेगा. प्रवासी श्रमिक बीआरओ के कार्यबल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में सामरिक महत्व की सड़कों के निर्माण में शामिल हैं.

इस विषय में पूरी जानकारी के लिए prabhatkhabar.com ने श्रम एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री सत्यानंद भोक्ता एवं श्रम सचिव राजीव अरुण एक्का से बात करने के लिए उन्हें फोन किया, लेकिन किसी ने इसका जवाब देना उचित नहीं समझा.

Posted By : Mithilesh Jha

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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