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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: MJPRU को मातृभाषा की तलाश, हिंदी नहीं, जर्मन पढ़ते हैं स्टूडेंट

Updated at : 21 Feb 2023 10:08 PM (IST)
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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: MJPRU को मातृभाषा की तलाश, हिंदी नहीं, जर्मन पढ़ते हैं स्टूडेंट

Bareilly: विश्व आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मना रहा है. हिंदी भाषा राज्य उत्तर प्रदेश की महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली में मातृभाषा हिंदी का विभाग नहीं है. यहां के स्टूडेंट को हिंदी नहीं पढ़ाई जाती.

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Bareilly: विश्व आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मना रहा है. हिंदी भाषा राज्य उत्तर प्रदेश की महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली में मातृभाषा हिंदी का विभाग नहीं है. यहां के स्टूडेंट को हिंदी नहीं पढ़ाई जाती. इसको लेकर लंबे समय से मांग चल रही है. लेकिन यह आगे नहीं बढ़ी. हालांकि यूनिवर्सिटी में चीनी, जर्मन आदि भाषाओं को पढ़ाया जा रहा है.

पिछले शैक्षिक सत्र से एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) में चीनी भाषा भी पढ़ाई जा रही है. इसके साथ ही 41 पाठ्यक्रम को राज्‍यपाल की ओर से 8 अगस्त, 2022 को मंजूरी दी गई थी. उनमें चीनी भाषा का डिप्‍लोमा पाठ्यक्रम भी शामिल है. लेकिन हिंदी नहीं है. स्टूडेंट काफी समय से हिंदी विभाग के साथ ही डिप्लोमा पाठ्यक्रम की मांग कर रहे हैं. यूनिवर्सिटी की स्थापना के करीब 48 वर्ष बाद भी हिंदी विभाग की स्थापना नहीं हुई है.

विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीर नहीं

एक प्रोफेसर ने दबीं जुबां से बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन चाहे, तो शिक्षा परिषद और कार्य परिषद में प्रस्ताव अनुमोदित कराकर हिंदी विभाग खोल सकता है. क्योंकि, सेल्फ फाइनेंस में कोई भी विभाग यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक खोलने की अनुमति विश्वविद्यालय को है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन सेल्फ फाइनेंस में यह विभाग नहीं खोलना चाहता.

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वह इसको यूजीसी की ग्रांट हासिल करके संचालित करना चाहता है, जो आसान नहीं है. इसके लिए यूजीसी को विश्वविद्यालय का निरीक्षण करके सारे संसाधन देखने होंगे, लेकिन इसके लिए कोई मजबूत पैरवी हो जाए तभी यह संभव है. सच यह भी है कि हिंदी विभाग के लिए यहां के जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं हैं.

क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

दुनिया में 21 फरवरी को भाषाई, सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता फैलाने और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है. भारत सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों का घर है.

रिपोर्ट मुहम्मद साजिद बरेली

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