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सैन्य सम्मान के साथ कैप्टन अंशुमान सिंह को दी गई अंतिम विदाई, माथे को चूमकर पत्नी ने कहा- शहादत पर है गर्व

Updated at : 22 Jul 2023 1:12 PM (IST)
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सैन्य सम्मान के साथ कैप्टन अंशुमान सिंह को दी गई अंतिम विदाई, माथे को चूमकर पत्नी ने कहा- शहादत पर है गर्व

पठान कोट के होशियारपुर की रहने वाली इंजीनियर सृष्टि सिंह से कैप्टन अंशुमान सिंह की शादी इसी वर्ष फरवरी में हुई थी. गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पार्थिव शरीर के पास पहुंची सृष्टि ने अंशुमान सिंह की शहादत पर गर्व जताया और पति को सैल्यूट किया.

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Gorakhpur: लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में सेना के बंकर में आग लगने से बलिदान हुए कैप्टन अंशुमान सिंह को सैन्य सम्मान के साथ उनके देवरिया जनपद स्थित पैतृक गांव में अंतिम विदाई दी गई.

पति को सैल्यूट करने के बाद फफक पड़ी सृष्टि

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पार्थिव शरीर के पास पहुंची पत्नी इंजीनियर सृष्टि सिंह ने शहीद पति अंशुमान के माथे को चूमते हुए कहा कि मेरे हीरो आपकी शहादत पर मुझे गर्व है, आपको दिल से सैल्यूट. आप ने मां भारती की रक्षा की है. इसके बाद वह फफक पड़ी. यह देख किसी तरह शहीद की मां मंजू देवी ने उन्हें संभालते हुए ढांढस बंधाया.

अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद सभी की आंखे नम हो गईं. लद्दाख के सियाचिन में बुधवार की तड़के सेना के बंकर में आग लगने से बलिदान हुए कैप्टन अंशुमान सिंह को देवरिया के भागलपुर में सरयू नदी के तट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. देवरिया जनपद के लार के बरडीहा दलपत गांव में जब कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा तो वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी.

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लेह एयरबेस से गोरखपुर लाया गया पार्थिव शरीर

भारत माता की जय और अंशुमान सिंह अमर रहे के नारे पूरे गांव और क्षेत्र में गुंजायमान होते ही सभी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर लेह एयरबेस से सेना के विशेष विमान से गोरखपुर लाया गया. इसके बाद पूर्व यूपी एवं एमपी सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल सिंह बैंसला और जीआरडी कमांडेंट बी संतोष के साथ अन्य अधिकारियों व जवानों ने श्रद्धांजलि अर्पित की.

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मंत्रियों ने पुष्पांजलि की अर्पित

प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही व राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने भी कैप्टन अंशुमान सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. गोरखपुर के जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश व एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने उनके स्वजन से मुलाकात की और उनको हिम्मत प्रदान की. गोरखपुर से सेना के वाहन से कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव देवरिया जनपद के बरडीहा दलपत के लिए रवाना हुआ. इससे पहले से ही अंशुमान सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए लोग गांव पहुंचने लगे थे.

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मुख्यमंत्री का पत्र परिजनों को सौंपा

अंशुमान सिंह का पार्थिक शरीर जैसे ही उनके गांव पहुंचा. भारत माता की जय और अंशुमान सिंह अमर रहे का नारा गूंजयमान हो उठा. मंत्रियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से 50 लाख रुपए दिए जाने का पत्र उनके सवजन को सौंपा. इसके साथ ही लार थाना के पास से बरडीहा दलपत होकर लार और रेलवे स्टेशन तक मार्ग का नामकरण बलिदानी अंशुमान सिंह के नाम से किए जाने की जानकारी दी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैप्टन अंशुमान सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए इसकी घोषणा की थी. उन्होंने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी. इसके साथ ही जनपद की एक सड़क का नामकरण शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के नाम पर करने को कहा.

शोक की घड़ी में साथ है सरकार

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में प्रदेश सरकार उनके साथ है. प्रदेश सरकार की ओर से शहीद के परिवार को हर संभव मदद प्रदान की जाएगी. वहीं भाजपा की ओर से कहा गया कि सियाचिन ग्लेशियर पर हुई हृदय विदारक दुर्घटना में लखनऊ निवासी मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह मातृभूमि पर सर्वोच्च बलिदान देकर शहीद हो गए हैं. वीर शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह को शत शत नमन है.

कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर जैसे उनके घर पहुंचा दरवाजे पर अंशुमान सिंह की पत्नी बहन और पिता के विलाप से हर कोई भावुक हो गया. कैप्टन अंशुमान सिंह को जिस समय अंतिम विदाई दी जा रही थी, कालीचरण घाट पर भारत माता की जय, अंशुमान सिंह अमर रहे के नारे लगते रहे.

बताया जा रहा है कि गोला बारुद के बंकर में शार्ट सर्किट की वजह से आग लग गई और कई टेंट जल गए. 26 वर्षीय डॉ. अंशुमान सिंह रेजिमेंटल मेडिकल अफसर थे. आग लगने पर वे अपने साथियों को बचाने में जुट गए. इस दौरान गंभीर रूप से झुलस गए. उनके साथ अन्य साथी भी हादसे में झुलस गए.

सेना के प्रवक्ता के मताबिक, आग लगने की घटना में मेडिकल ऑफिसर गंभीर रूप से झुलस गए, जिससे उनका निधन हो गया. तीन अन्य कर्मियों को धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ हुई और वे झुलस गए. उन्हें तत्काल इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया गया. घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है.

लखनऊ में रहते हैं माता-पिता

डॉ. अंशुमान सिंह के माता पिता लखनऊ में आलमनगर मोहान रोड स्थित एमरल्ड ग्रीन निवासी हैं. आलमनगर क्षेत्र में सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त होने वाले रवि प्रताप सिंह के घर में इस घटना की जानकारी आने के बाद पूरा परिवार शोकाकुल दिखा. चार महीने पहले जिस बेटे की शादी की शहनाइयां बज रही थी, जिसकी दुल्हन आने के बाद सभी लोग बेहद खुश थे और सपने संजो रहे थे, अब अचानक उसके दुनिया के चले जाने का समाचार सुनकर परिजनों को यकीन नहीं हुआ.

अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह को फोन पर सेना की ओर से इसकी जानकारी दी गई. इसके बाद उन्होंने पत्नी को घटना के बारे में बताया. बेटे के बलिदान होने की जानकारी के बाद से मां बेहद सदमे में चली गईं. कुछ देर बाद किसी तरह हिम्मत करके उन्होंने अंशुमान की पत्नी सृष्टि को फोन करके इसकी सूचना दी.

सृष्टि पंजाब के पठानकोट की रहने वाली है और वह अंशुमान की बहन डॉ. तान्या सिंह के साथ नोएडा में थीं. परिवार में अंशुमान का छोटा भाई घनश्याम है, जो कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, सभी इस घटना से शोकाकुल हो गए.

रवि प्रताप का परिवार मूलरूप से देवरिया के गांव बरडिहादलपत थाना लार का रहने वाला है. शहीद कैप्टन अंशुमान के चाचा अनुज प्रताप सिंह पैरामिलिट्री में सिपाही हैं. गांव में शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के दादा सत्य नारायण सिंह, चाचा हरि प्रकाश सिंह, भानू सिंह, सूर्य प्रताप सिंह आदि रहते हैं.

उनको परिजनों के जरिए जैसे ही घटना की सूचना मिली तो सभी सकते में आ गए. परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. चाचा हरि प्रकाश ने बताया कि अंशुमान तीन वर्ष पहले गांव आए थे, सभी लोग उन्हें बेहद पंसद करते थे. अंशुमान के बलिदान पर पूरे परिवार को क्षेत्र को गर्व है.

रिपोर्ट–कुमार प्रदीप,गोरखपुर

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