हजारीबाग के बड़कागांव में युवाओं की टोली ने श्रमदान से बनाये 4 किमी सड़क, दूध मटिया नदी पर लकड़ी की पुलिया का निर्माण

Jharkhand News (बड़कागांव, हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव प्रखंड के आंगों पंचायत का एक गांव है पचंडा. यह गांव आज भी सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर है. गांव तक सड़क और पुलिया नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाएं अपने मायके चली जाती है. कारण है प्रसव पीड़ा के दौरान वाहनों की उपलब्धता नहीं होना.
Jharkhand News (संजय सागर, बड़कागांव, हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव प्रखंड के आंगों पंचायत का एक गांव है पचंडा. यह गांव आज भी सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर है. गांव तक सड़क और पुलिया नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाएं अपने मायके चली जाती है. कारण है प्रसव पीड़ा के दौरान वाहनों की उपलब्धता नहीं होना.
पचंडा गांव बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर स्थित है. यहां 100 घर से अधिक संताली परिवार निवास करते हैं, लेकिन बिडंबना है कि झारखंड अलग राज्य निर्माण होने के 20 साल बाद भी पुल नहीं बन पाया और ना ही सड़कें बन पायी. लोग पगडंडियों के सहारे से आना-जाना करते थे.
इस परेशानी को देख कांग्रेस के युवा नेता दीपक करमाली के नेतृत्व में कई युवा श्रमदान के लिए आगे आये. श्रमदान कर जहां चलने लायक 4 किलोमीटर पचंडा से झिकझोर तक सड़क का निर्माण किया. ग्रामीण युवाओं ने 4 दिन में किमी सड़क का निर्माण किया. वहीं दूध मटिया में लकड़ी पुलिया का भी निर्माण किया.
इस संबंध में कांग्रेस के युवा नेता दीपक करमाली ने बताया कि जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया. लेकिन, ना तो सड़क का निर्माण हुआ और ना ही पुलिया की ही निर्माण हो सकी. सबसे अधिक परेशानी बारिश के दिनों में होती है. इस दौरान नदी में पानी अधिक होने से उसे पार करने में परेशानी होती थी.
इतना ही नहीं, सड़क और पुल नहीं रहने के कारण लोग बाजार व अस्पताल तक नहीं जा पाते थे. इस कारण कई लोगों की असामयिक मौत हो जाती थी . सड़क और पुल- पुलिया के नहीं रहने से गर्भवती महिलाएं अपने मायके जाने को विवश होती थी. इसी परेशानी को देखते हुए ग्रामीण युवाओं की टोली ने श्रमदान को ठाना और निजी खर्चें से सड़क और लकड़ी का पुलिया बना दिया.
इस संबंध में बीडीओ प्रवेश कुमार साव का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा श्रमदान से सड़क बनाया गया है. यह प्रेरणादायक है. प्रशासन की ओर से सड़क को और मजबूत बनाया जायेगा. दूसरी ओर, मुखिया प्रतिनिधि महादेव मरांडी ने बताया कि ग्रामीण युवाओं के श्रमदान से सड़क बनाया गया है. हालांकि, इस दौरान मेरी ओर से मदद नहीं हो पाया, लेकिन भविष्य में हमारा सहयोग अवश्य रहेगा.
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सड़क निर्माण में मुनेश्वर गंझू, वार्ड सदस्य विनोद बेसरा, मोतीलाल मांझी, देव राम मांझी, मोनू राम मरांडी, दिनेश बेसरा, निरसा मरांडी, सेजुल मुर्मू, एतवा बेसरा और अजय बेसरा ने सहयोग किया.
Posted By : Samir Ranjan.
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