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कोलकाता में डॉ बीपी कश्यप को विट्रियो रेटिना के क्षेत्र में मिली FAICO की मानद उपाधि

Updated at : 21 Mar 2024 9:54 PM (IST)
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honorary degree of FAICO to Dr BP Kashyap in field of Vitreo Retina

डॉ बीपी कश्यप को FAICO की मानद उपाधि से सम्मानित करते रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के सचिव स्वामी नित्याकामानंद महाराज एवं समिति के अध्यक्ष डॉ हरबंस लाल.

FAICO का मतलब फेलो ऑल इंडिया कॉलेजियम ऑफ ऑपथैल्मोलॉजी होता है. यह बहुत ही प्रतिष्ठित सम्मान है. रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के सचिव स्वामी नित्याकामानंद ने डॉ कश्यप को यह सम्मान दिया.

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झारखंड के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ बीपी कश्यप को विट्रियो रेटिना के क्षेत्र में फाइको (FAICO) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है. उनको यह सम्मान कोलकाता में आयोजित अखिल भारतीय नेत्र सोसाइटी के 82वें वार्षिक सम्मेलन में प्रदान किया गया.

क्या है FAICO का मतलब

FAICO का मतलब फेलो ऑल इंडिया कॉलेजियम ऑफ ऑपथैल्मोलॉजी होता है. इसे बहुत ही प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है. रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के सचिव स्वामी नित्याकामानंदा के द्वारा डॉ कश्यप को यह सम्मान प्रदान किया गया.

झारखंड-बिहार में सबसे पहले शुरू की रेटिना ट्रीटमेंट

गौरतलब हो कि वर्ष 1984 में डॉ बीपी कश्यप ने झारखंड (तब बिहार) में पहली बार रेटिना ट्रीटमेंट की शुरुआत की थी. उस समय वह बिहार के इकलौते रेटिना सर्जन थे. वर्ष 1984 से वर्ष 2004 तक वह झारखंड-बिहार के इकलौते रेटिना सर्जन रहे.

आंखों के इलाज की अत्याधुनिक सुविधाओं की शुरुआत की

झारखंड में रेटिना के क्षेत्र में नयी तकनीक, मशीन, ट्रीटमेंट पद्धति, रिसर्च और प्रशिक्षण में भी इनका योगदान रहा है. इसके अलावा वर्ष 2003 में प्रीमैच्योर बच्चों की आंखों की रेटिना का इलाज शुरू करने, वर्ष 2009 में रेटिना की सर्जरी के लिए कॉन्स्टेलशन मशीन लाने, रेटिना के इलाज के लिए इंट्राविट्रियल इंजेक्शन की शुरुआत वर्ष 2006 में करने का श्रेय भी डॉ बीपी कश्यप को ही जाता है.

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रेटिना की दवाइयों का पहला क्लिनिकल ट्रायल करने का भी है श्रेय

वहीं, झारखंड में वर्ष 2018 में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मशीन और वर्ष 2021 में रेटिना की दवाइयों का झारखंड में पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की उपलब्धि भी इनके नाम पर है. वर्ष 2022 में राज्य के पहले रेटिना का राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण शुरू करना भी इनकी उपलब्धियों में शामिल है.

डॉ बीपी कश्यप की उल्लेखनीय उपलब्धियां

  • डॉ बीपी कश्यप ने वर्ष 1984 में रांची (तब बिहार, अब झारखंड) में पहली बार रेटिना ट्रीटमेंट की शुरुआत की.
  • 1984 से लेकर 2004 तक यानी दो दशक तक डॉ बीपी कश्यप झारखंड-बिहार के इकलौते रेटिना सर्जन थे.
  • झारखंड में रेटिना के क्षेत्र में जितनी नई तकनीक, मशीनें, ट्रीटमेंट पद्धति, रिसर्च, प्रशिक्षण आदि मौजूद हैं, उनको झारखंड में लाने का श्रेय डॉ कश्यप को जाता है.
  • डॉ बीपी कश्यप के उल्लेखनी कार्य
  • वर्ष 2003 में प्रीमैच्योर बच्चों की आंखों की रेटिना का इलाज शुरू किया.
  • वर्ष 2006 में रेटिना के इलाज के लिए इंट्राविट्रियल इंजेक्शन की शुरुआत की.
  • वर्ष 2009 में रेटिना की सर्जरी की दुनिया की सबसे आधुनिक कॉन्स्टेलशन मशीन झारखंड लाए.
  • वर्ष 2018 में रेटिना के इलाज की सबसे आधुनिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मशीन झारखंड में लाए. यह राज्य की एकमात्र मशीन है.
  • वर्ष 2021 में रेटिना की दवाइयों का झारखंड में पहला और अब तक का पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया.
  • वर्ष 2022 में झारखंड के पहले और एकमात्र राष्ट्रीय मान्यताप्राप्त प्रशिक्षण सुविधा की शुरुआत की.

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क्यों दी जाती है FAICO की मानद उपाधि?

FAICO की मानद उपाधि देश के चुनिंदा विट्रियो-रेटिना सर्जन को दी जाती है. यह उपाधि उस डॉक्टर को रेटिना के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों की वजह से सम्मान स्वरूप दी जाती है

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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