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Holi 2022 Puja Vidhi Live: 18 और 19 मार्च दोनों दिन मनाई जा रही होली, जानें पूजा विधि और परंपराएं

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Holi 2022 Puja Vidhi, Muhurat Live: होली पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस बार रंग गुलाल होली 19 मार्च 2022, शनिवार को है. लेकिन कुछ लोग 18 मार्च को भी होली मना रहे हैं.

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Holi 2022: जानें कौन-सा रंग क्या कहता है

गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक

सफेद रंग शांति और सौम्यता का प्रतीक

नीलापन जीवन के विस्तार का प्रतीक

जामुनी रंग ज्ञान के आलोक का प्रतीक

लाल रंग क्रोध का प्रतीक

हरा रंग जलन का प्रतीक

भगवा रंग त्याग का प्रतीक

पीला रंग खुशी का प्रतीक

Holi 2022: झारखंड बिहार में 19 मार्च को मनाई जाएगी होली

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर यानी 17 मार्च को होलिका दहन हुई, अगले दिन यानी आज 18 मार्च को होली मनाई जाएगी. वहीं 18 मार्च को चैत्र माह शुरू हो जाएगा. प्रतिपदा तिथि की शुरुआती 18 मार्च को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से हो जाएगी. ऐसे में 18 मार्च ही होली मनाई जाएगी. वैदिक कैलेंडर के अनुसार उदयातिथि पर ही हर एक तिथि की गणना शुरू होती है. इस तरह से 19 मार्च को चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि लग जाएगा और समापन इस दिन सुबह 11 बजकर 37 मिनट पर होगी. इस आधार पर कई जगहों पर होली 19 मार्च का मनाई जाएगी.

Holi 2022: देश में अलग-अलग नामों से प्रसिद्ध है होली

देश में विभिन्न हिस्सों में होली के अलग-अलग नाम, कहीं ब्रज की होली, कहीं लठमार, धुलंडी, रंग पंचमी, होरी, भगोरिया, फगुआ आदि नाम से है प्रसिद्ध.

Holi 2022: राजस्थान में होती है ऐसी होली

राजस्थान की होली खास निराली होती है. राजस्थान के अलग-अलग शहरों में आपको होली के अलग-अलग रंग देखने को मिल जाएंगे. यहां कहीं लोग रंगों के साथ-साथ फूलों से तो कहीं लट्ठमार होली का लुत्फ उठाते नजर आते हैं. जयपुर में गोविंददेव जी के मंदिर में भी होली का पावन पर्व बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यहां ब्रज की तर्ज पर लाल पीली पंखुड़ियों से होली खेली जाती है. अजमेर के पुष्कर में लोग गीत-संगीत की धुनों पर थिरकते हुए कपड़ाफाड़ होली खेलते हैं, तो वहीं शेखावाटी में होली का अलग ही हुडदंग होता है.

Holi 2022: जानें क्यों मनाते हैं होली

शास्त्रों में इस दिन होली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथा दी गई है। लेकिन इन सबमें सबसे ज्यादाभक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कहानी प्रचलित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बुराई पर अच्छाई की जीत को याद करते हुए होलिका दहन किया जाता है.

इस बार खेलें ऑर्गेनिक होली

मिलावट मुक्त मनाएं होली. ऑर्गेनिक तथा हर्बल रंग का करें प्रयोग. संभव हो तो घर पर ही बनायें मिठाइयां.

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