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1960 के दशक में तहलकेबाज थी ये विंटेज कार! ऑल्टो और बाइक के पार्ट्स बन गईं Electric car

Updated at : 06 Dec 2023 8:27 AM (IST)
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1960 के दशक में तहलकेबाज थी ये विंटेज कार! ऑल्टो और बाइक के पार्ट्स बन गईं Electric car

1960 के दशक में विंटेज कार फोर्ड कैडिलेक की काफी धूम थी. यह उस समय फोर्ड मॉडल में आती थी. इस मॉडल की कार को 1930 में डिजाइन किया गया था. आज के जमाने में यह कार बाजार से गायब हो चुकी है.

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Antique Cars in India : देश-दुनिया में लग्जरी और महंगी कारों की डिमांड हमेशा रही है. पुराने जमाने में कुछ खास लोगों के पास ही कारें हुआ करती थीं. ये कारें काफी डिजाइनदार और आकर्षक हुआ करती थीं, जिसे देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाते. ऐसी पुरानी विंटेज कारें आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. कुछ कारें ऐसी थीं, जो 1960 के दशक में भारत में तहलका मचाती थीं. अब वे मार्केट से गायब हो गई हैं, लेकिन कुछ उत्साही और इनोवेटिव लोग हैं, जिन्होंने तहलकेबाज पुरानी कारों को जुगाड़तंत्र के माध्यम से इलेक्ट्रिक कार के रूप में तब्दील कर दिया है. अब वे कारें पुराने डिजाइन लेकिन इलेक्ट्रिक अवतार में नजर आ रही हैं. इन्हीं विंटेज कारों में से एक फोर्ड कैडिलैक है, जो 1960 के दशक में तहलका मचाती रही है. अब हरियाणा के सिरसा स्थित ग्रीन मास्टर कंपनी ने मारुति ऑल्टो और मोटरसाइकिलों के कल-पुर्जों का इस्तेमाल करते हुए इस कार को इलेक्ट्रिक कार बना दिया. आइए जानते हैं इस कार के बारे में…

1930 मॉडल के फोर्ड कैडिलैक को बना दिया इलेक्ट्रिक कार

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, 1960 के दशक में विंटेज कार फोर्ड कैडिलेक की काफी धूम थी. यह उस समय फोर्ड मॉडल में आती थी. इस मॉडल की कार को 1930 में डिजाइन किया गया था. आज के जमाने में यह कार बाजार से गायब हो चुकी है. किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह कार अपने पुराने अवतार में इलेक्ट्रिक इंजन लेकर एक बार फिर सामने आ जाएगी. हरियाणा के सिरसा स्थित ग्रीन मास्टर कंपनी के उत्साही लोगों ने जुगाड़ तंत्र के माध्यम से इसे इलेक्ट्रिक कार बना दिया.

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ग्रीन मास्टर ने 2022 में फोर्ड कैडिलैक का बनाया इलेक्ट्रिक कार

रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा के सिरसा स्थित चत्तरगढ़ में स्थापित ग्रीन मास्टर स्टार्टअप ने साल 2022 में मारुति ऑल्टो और मोटरसाइकिल के पार्ट्स से फोर्ड कैडिलैक को इलेक्ट्रिक कार के रूप में तब्दील कर दिया. इस कार में एलॉय व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है. ये व्हील्स रॉयल एनफील्ड की बुलेट मोटरसाइकिल के व्हील्स की तरह दिखाई देते हैं. इसके अलावा, इसमें लगाया गया रियरव्यू मिरर भी रॉयल एनफील्ड का एहसास कराता है. हालांकि, यह बताना थोड़ा मुश्किल है कि ग्रीन मास्टर ने इस कार में मारुति ऑल्टो के किन-किन पार्ट्स का इस्तेमाल किया है.

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फोर्ड कैडिलैक इलेक्ट्रिक कार की मोटर और बैटरी

ग्रीन मास्टर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कैडिलैक के फोर्ड मॉडल कार में 1000 किलोवॉट की क्षमता वाली एक मोटर लगाई गई है और 48 वोल्ट की एक लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, 1 एचपी की पावर और 2.2 एनएम का टॉर्क जेनरेट करती है. स्टार्टअप कंपनी का दावा है कि इसकी टॉप स्पीड करीब 35 किमी प्रति घंटा है और यह फुल चार्ज होने पर करीब 100 किलोमीटर का माइलेज देने में सक्षम है. इसकी बैटरी को फुल चार्ज होने में करीब चार से पांच घंटे का समय लगता है.

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फोर्ड कैडिलैक कार की कीमत

ग्रीन मास्टर की विंटेज कार फोर्ड कैडिलैक इलेक्ट्रिक की बॉडी को हाथ से बनाया गया है. इसकी फिनिशिंग अच्छी है. हालांकि, कंपनी की ओर से व्यस्ततम सड़कों पर चलाने के लिए अभी तक उतारा नहीं गया है. ग्रीन मास्टर की इस टू सीटर कार की कीमत करीब 1.45 लाख रुपये से 2.45 लाख रुपये के बीच है. हालांकि, कंपनी इसे सड़क पर चलाने के बजाय फैंसी रिजॉर्ट कॉम्प्लैक्स के छोटे ट्रांसपोर्टर तौर पर पेश किया है, जिसका इस्तेमाल कम दूरी तक सवारियों केा लाने और ले जाने के लिए किया जा सके.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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