झारखंड में शुरू हुआ एनर्जी मिक्सिंग का दौर, सोलर विलेज के जरिये किया जायेगा जस्ट ट्रांजिशन

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झारखंड में शुरू हुआ एनर्जी मिक्सिंग का दौर, सोलर विलेज के जरिये किया जायेगा जस्ट ट्रांजिशन

झारखंड सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ा दिये हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि अभी लंबा रास्ता तय करना है क्योंकि अभी झारखंड में सोलर एनर्जी के जरिये मात्र 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन ही होता है.

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झारखंड एक ऐसा राज्य है जो बिजली के लिए पूरी तरह कोयले पर निर्भर है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए केंद्र सरकार की ओर से जो बजट पेश किया गया है उसमें ग्रीन गोथ पर भरपूर फोकस किया गया है. सरकार की कोशिश यह है कि ग्रीन गैस उत्सर्जन को कम करके भारत को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में विश्व गुरु बनाया जाये. इस राह पर चलते हुए झारखंड सरकार ने भी रिन्यूएबल एनर्जी खासकर सोलर एनर्जी पर अपना ध्यान केंद्रित किया है.

शुरू हुआ एनर्जी मिक्सिंग का दौर

भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें राज्य सरकारों की भूमिका अहम होगी. इस बात को समझते हुए झारखंड सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ा दिये हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि अभी लंबा रास्ता तय करना है क्योंकि अभी झारखंड में सोलर एनर्जी के जरिये मात्र 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन ही होता है, जबकि खपत लगभग 2000 मेगावाट की है. लेकिन एनर्जी मिक्सिंग का दौर शुरू हो चुका है, जिसे शुभ संकेत कह सकते हैं.

कोयले पर निर्भरता अभी कम नहीं होने वाली : हरिश्वर दयाल

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल ने इस मामले पर कहा-वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए सरकार ने जो बजट पेश किया है, उसमें रिन्यूएबल एनर्जी पर बात की गयी है. सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह एनर्जी ट्रांजिशन को लेकर गंभीर है और इसकी शुरुआत हो चुकी है. लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि कोयले पर निर्भरता निकट भविष्य में कम नहीं होने वाली है.

रिन्यूएबल एनर्जी का सोर्स बढ़ाया जायेगा

जेरेडा (JREDA, झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश प्रसाद ने बताया कि निकट भविष्य में कोयले पर निर्भरता कम नहीं होने वाली है क्योंकि राज्य में बिजली की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है. इसलिए कोयले की जरूरत तो है, लेकिन हमारी कोशिश यह है कि हम रिन्यूएबल एनर्जी के सोर्स को बढ़ाकर एनर्जी मिक्सिंग का दौर लायें जहां कोयला आधारित ऊर्जा के साथ-साथ सोलर एनर्जी से भी बिजली का उत्पादन किया जाये.

सोलर पाॅलिसी से मिला लाभ

मुकेश प्रसाद ने बताया कि झारखंड सरकार की सोलर पाॅलिसी आने के बाद से हमें काम करने का सही डायरेक्शन मिल गया है और हम यह जान चुके हैं कि क्या करना है और कैसे करना है. इसी आधार पर हम अगले 5-6 साल के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं. हमारा फोकस अभी मिनीग्रिड लगाकर बिजली का उत्पादन करना है. इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए हम चांडिल डैम में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगा रहे हैं, जिसकी क्षमता 600 मेगावाट की होगी और इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिल गयी है.

निजी कंपनियों के लिए एसओपी तैयार

इसके साथ ही हमारी यह कोशिश है कि सोलर एनर्जी के क्षेत्र में हम निजी निवेश को बढ़ायें, ताकि सोलर एनर्जी के जरिये बिजली का उत्पादन बढ़े और जलवायु पर संकट क��छ कम हो. प्राइवेट कंपनियों के लिए हमने एसओपी तैयार कर ली है और उसे उद्योग मंत्रालय के पास भेजा गया है, जैसे ही वहां से स्वीकृति मिलेगी, प्राइवेट इंवेस्टर्स का रास्ता सुगम हो जायेगा.

1000 सोलर विलेज का लक्ष्य रोजगार सृजन

झारखंड सरकार ने यह तय किया है कि अगले पांच साल में 1000 सोलर विलेज बनाये जायेंगे, इसके लिए भी हमने कार्य शुरू कर दिया है. इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि इसे जस्ट ट्रांजिशन से जोड़कर देखा जा सकता है. इस प्रोजेक्ट के तहत ना सिर्फ गांवों में सौर ऊर्जा की व्यवस्था की जायेगी, बल्कि गांव वालों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराये जायेंगे. इसमें प्रोजेक्ट के तहत गांव में स्कील डेवलपमेंट सेंटर बनाया जायेगा और फिर ग्रामीणों को ट्रेनिंग दी जायेगी. सोलर विलेज का प्रोजेक्ट माइनिंग प्रभावित क्षेत्रों से ही शुरू होगा, जहां कोयले का उत्पादन बंद हो चुका है और रोजगार की समस्या लोगों के सामने है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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