Flood 2021: सरकारी व्यवस्था शून्य, मोतिहारी के कई इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी, भोजन-पानी पर भी आफत

बिहार में मानसून की दस्तक के बाद प्रदेश के कइ जिलों में जमकर बारिश हो रही है. वहीं पिछले कई दिनों से नेपाल सहित पूरे चंपारण में लगातर मूसलाधार बारिश हो रही है. वहीं नेपाल से छोड़े जा रहे पानी से मोतिहारी जिले में बाढ़ के हालात हो चुके हैं. जिले के कई इलाके अब जलमग्न हो चुके हैं. निचले इलाके के लोगों को अब सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है. लेकिन सरकारी व्यवस्था इस कदर ध्वस्त है कि लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. वहीं रिंग बांध के मरम्मति पर मनरेगा के तहत लाखो रुपए का खर्च दिखाया तो गया लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग रही. बाढ़ के पानी ने सारी हकीकतों पर से पर्दा हटा दिया है.
बिहार में मानसून की दस्तक के बाद प्रदेश के कइ जिलों में जमकर बारिश हो रही है. वहीं पिछले कई दिनों से नेपाल सहित पूरे चंपारण में लगातर मूसलाधार बारिश हो रही है. वहीं नेपाल से छोड़े जा रहे पानी से मोतिहारी जिले में बाढ़ के हालात हो चुके हैं. जिले के कई इलाके अब जलमग्न हो चुके हैं. निचले इलाके के लोगों को अब सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है. लेकिन सरकारी व्यवस्था इस कदर ध्वस्त है कि लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. वहीं रिंग बांध के मरम्मति पर मनरेगा के तहत लाखो रुपए का खर्च दिखाया तो गया लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग रही. बाढ़ के पानी ने सारी हकीकतों पर से पर्दा हटा दिया है.
सुगौली प्रखंड में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. बगही, करमवा रघुनाथपुर, उत्तरी व दक्षिणी मनसिंघा, माली, सुकुलपाकड सहित नप के वार्ड 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12, 18 में अब भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. कई पंचायत के गांवो में चारों ओर से बाढ़ से घिरे है. लोगों के घरों में पानी जमा है. रास्ता अवरुद्ध है. जहां पहले बाढ़ का पानी पहुंचा वहां की हालत और खराब है.
सुगौली में जलस्तर में हर रोज उतार-चढ़ाव हो रहा है. इधर प्रशासन के द्वारा बाढ़ पीड़ित शरणार्थियों को राहत व सामुदायिक किचन नही चलाये जाने से खाने-पीने का संकट हो गया है. बच्चों को भूख से बिलबिलाते देख माता-पिता रोने लगते है. पानी के भारी दबाव के कारण कई जगह सड़क बह गया है. जबकि जनता चौक- फुलवार पथ पर कई फिट तक पानी बहने लगा है.
प्रखंड में हो रही भारी बारिश से सिकरहना (बूढ़ी गंडक) नदी उफान पर है. बाढ़ का पानी दोनों बांध के बीच के इलाके के गांवों में लगातार चौथे दिन भी प्रवेश करता रहा. सिकरहना नदी से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे लोग बाल-बच्चों और मवेशियों संग एनएच- 527 डी के किनारे आशियाना बना लोगों के परिवार संग डेरा डाल डाले है. हालांकि यहां भी उनकी परेशानी कम नहीं हो रही है. अबतक उन्हें सरकारी राहत मुहैया नही कराई जा सकी है.
बाढ़ पीड़ितों में एनएच पर शरण लिये लोगो ने बताया कि नदी में पानी ज्यादा होने के कारण पूरे परिवार के साथ सड़क पर आ गयी हूं. 24 घन्टे तेज वाहन की आवाज और सिकरहना नदी के शोर के दहशत में रात का खाना नहीं बना सकी. अगल-बगल के लोगों ने खाना पहुंचाया, तब पेट की आग शांत हुई.
Posted By: Thakur Shaktilochan
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