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प्राइवेट अस्पतालों पर भड़के बीजेपी सांसद पीएन सिंह, बोले-मैं डॉक्टर नहीं, जो आला लेकर अस्पताल-अस्पताल जाऊं, जांच से खुलेंगे कई राज

Updated at : 22 May 2021 1:20 PM (IST)
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प्राइवेट अस्पतालों पर भड़के बीजेपी सांसद पीएन सिंह, बोले-मैं डॉक्टर नहीं, जो आला लेकर अस्पताल-अस्पताल जाऊं, जांच से खुलेंगे कई राज

Coronavirus In Jharkhand, धनबाद न्यूज (संजीव झा) : मैं कोई डॉक्टर नहीं हूं. जो आला लेकर अस्पतालों घूम-घूम कर मरीजों को देखूं. एक जन प्रतिनिधि का काम जनता को मदद करना है और कराना है. यह काम मैं लगातार कोरोना काल में कर रहा हूं. धनबाद, बोकारो की जनता जानती है कैसे 24 घंटे उन्हें मदद कर रहे हैं. मुझे बदनाम करने की विरोधियों की साजिश सफल नहीं होगी. सच्चाई सब जानते हैं. यह कहना है धनबाद के बीजेपी सांसद पशुपति नाथ सिंह का.

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Coronavirus In Jharkhand, धनबाद न्यूज (संजीव झा) : मैं कोई डॉक्टर नहीं हूं. जो आला लेकर अस्पतालों घूम-घूम कर मरीजों को देखूं. एक जन प्रतिनिधि का काम जनता को मदद करना है और कराना है. यह काम मैं लगातार कोरोना काल में कर रहा हूं. धनबाद, बोकारो की जनता जानती है कैसे 24 घंटे उन्हें मदद कर रहे हैं. मुझे बदनाम करने की विरोधियों की साजिश सफल नहीं होगी. सच्चाई सब जानते हैं. यह कहना है धनबाद के बीजेपी सांसद पशुपति नाथ सिंह का.

प्रभात खबर से खास बातचीत में बीजेपी सांसद पीएन सिंह ने विभिन्न सवालों का खुल कर जवाब दिया. एक तरफ जहां धनबाद उपायुक्त उमाशंकर सिंह की पीठ थपथपाते हुए उन्हें उत्साहित अधिकारी बताया. वहीं प्रशासनिक टीम को निशाने पर लिया. बोकारो जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाये. पेश है बातचीत के मुख्य अंश.

सवाल : आप पर आरोप है कि कोरोना काल में लोगों का हालचाल नहीं ले रहे हैं. एक बार भी किसी कोविड अस्पताल का दौरा नहीं किया ?

जवाब : देखिये कोविड प्रोटोकॉल कहता है कि कोविड अस्पताल में सभी को नहीं जाना चाहिए. मैं सांसद हूं, कोई डॉक्टर नहीं जो आला लेकर अस्पतालों में घूमूं. सांसद के फीजिकल एक्टिविटी की जरूरत नहीं. बल्कि जनता को जरूरत के अनुसार उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना है. यह काम कोरोना के पहले व दूसरे लहर में कर रहे हैं. सांसद का आवासीय कार्यालय 24 घंटे चालू है. व्हाट्सएप पर भी जनता के सवालों का जवाब दे रहे हैं. कुछ लोगों को मास्क, राशन बांट कर फोटो खींचवाने से किसी की समस्या नहीं खत्म होती.

सवाल : जनता का आरोप है कि कोरोना के पीक पर पीड़ितों को बेड, ऑक्सीजन तक नहीं मिल पाया. आप प्रशासन या सरकार के रवैये से कितना संतुष्ट हैं?

जवाब : यह बात सही है कि कोरोना की दूसरी लहर में बेड, ऑक्सीजन की दिक्कत हुई. समय पर तैयारी नहीं होने से कुछ दिनों तक यह परेशानी बरकरार रही. फिर भी धनबाद में सरकारी अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन दिलाने का भरसक प्रयास किया. इसमें यहां के उपायुक्त उमाशंकर सिंह की अच्छी भूमिका रही, लेकिन यहां उनकी टीम ने बहुत ईमानदार प्रयास नहीं किया. यहां के बड़े एवं छोटे निजी अस्पतालों ने धनबाद में आपदा को लूट में बदल दिया. निजी अस्पतालों में मरीजों से दो से चार लाख रुपये वसूले गये. कुछ बड़े निजी अस्पतालों में तो लाश के लिए भी राशि ली गयी. मेरा मानना है कि कई कोविड पीड़ित तो अस्पतालों के ओवर बीलिंग से मर गये. डीसी ने डेथ ऑडिट के लिए जो टीम बनायी है उस टीम को पीड़ितों तथा उनके परिजनों से पूछताछ करनी चाहिए. इससे सच्चाई सामने आयेगी.

सवाल : कांग्रेस पार्टी की तरफ से यहां कोविड सहायता केंद्र खोला गया है. भाजपा की तरफ से कुछ नहीं हो रहा है?

जवाब : कांग्रेस जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह पहले यह बतायें कि पिछले लोकसभा चुनाव में लड़े पार्टी प्रत्याशी यहां कितने दिन आये हैं. कांग्रेस प्रत्याशी को साढ़े तीन लाख से अधिक वोट मिला था. कांग्रेस से ऐसे लोगों का विश्वास टूटा है. अलग से नियंत्रण या सहायता कक्ष खोलने की बजाय कांग्रेस पार्टी के नेता सरकारी कंट्रोल रूम को दुरुस्त करवाते. वहां देखें कि लोगों को सही तरीका से सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं.

बोकोरो में सरकारी बेड खाली रहते हुए मरीजों को भेजा निजी अस्पताल

सांसद ने कहा कि बोकारो जेनरल अस्पताल में जिला प्रशासन ने दो हॉल में कोविड अस्पताल खोला है. यहां शर्त थी कि सिविल सर्जन से अनुमति के बाद ही गैर बीएसएल कर्मियों का कोविड उपचार होगा. रिकॉर्ड जांच हो तो पता चलेगा कि हमेशा कोविड अस्पताल में बेड खाली रहा. गरीब मरीजों को भी जान-बूझ कर निजी अस्पतालों में भेजा गया. यह एक बड़ा खेल हुआ है. राज्य सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए. किसके इशारे पर यह खेल हुआ.

सवाल : जब निजी अस्पताल लूट मचा रहे थे, तब आपने सांसद होने के नाते क्या किया ?

जवाब : मैंने सीएम हेमंत सोरेन के साथ बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया. डीसी से कई बार शिकायतें की. डीसी ने निजी अस्पतालों में दंडाधिकारी तैनात किया, लेकिन दंडाधिकारियों ने कभी बीलिंग पर ध्यान नहीं दिया. कई निजी अस्पतालों में मरीजों को जाली बिल तक दिया गया. निजी अस्पताल वाले मेरा फोन नहीं उठा रहे थे. इस मामले को आगे भी उठायेंगे.

सवाल : धनबाद के कोविड अस्पतालों में मैन पावर की भारी कमी है. इसके निराकरण के लिए सांसद होने के नाते क्या सुझाव देना चाहेंगे?

जवाब : धनबाद में बीसीसीएल के पास डॉक्टर्स, पारा मेडिकल स्टॉफ हैं. इनमें से बहुत सारे डॉक्टर्स, पारा मेडिकल स्टॉफ एरिया अस्पतालों में तैनात हैं. डीसी को चाहिए कि बीसीसीएल प्रबंधन पर दबाव बनाकर सभी डॉक्टरों, पारा मेडिकल स्टॉफों की ड्यूटी कोविड अस्पतालों, केयर सेंटरों में लगायें. किसी तरह की सिफारिश को नहीं मानें. बीसीसीएल के कुछ चिकित्सक यहां के जन प्रतिनिधियों से भी नाम कटवाने के लिए सिफारिश करवा रहे हैं. इससे यहां कोविड की तीसरी लहर से लड़ने में भी मदद मिलेगी. इसी तरह इसीएल, डीवीसी के डॉक्टरों, कर्मियों को ड्यूटी लगानी चाहिए.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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