धनबाद : जिला बनाने की मांग को लेकर पहली बार चल रहा इतना लंबा धरना और किया गया बेरमो बंद

नावाडीह व गोमिया प्रखंड के लोगों को 60 किमी की दूरी तय कर तेनुघाट आना पड़ता है. सुदूरवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को इसके कारण काफी समस्याएं होती हैं. बेरमो को जिला बनने से इन लोगों को काफी सुविधाएं मिलेगी.
धनबाद : लगभग 16 लाख की आबादी वाले बेरमो अनुमंडल को जिला बनाने की मांग को लेकर यह पहला मौका है, जब 55 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है और बेरमो बंद किया गया. मालूम हो कि बेरमो अनुमंडल का सृजन छह दिसम्बर 1972 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय की सरकार द्वारा किया गया था. बेरमो अनुमंडल का मुख्यालय 1975 में गिरिडीह से स्थानांतरित होकर तेनुघाट आया. 1981 में सिविल कोर्ट गिरिडीह से स्थानांतरित होकर तेनुघाट आया. बेरमो को जिला बनाने की मांग दशकों से की जा रही है. लोकसभा व विधानसभा चुनावों के समय पार्टी, प्रत्याशी व नेता इस मांग को पूरा करने का वादा करते रहे हैं. चुनावी घोषणा पत्र में भी इसे शामिल करते रहे हैं. लेकिन चुनाव के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. पूर्व मंत्री स्व. जगरनाथ महतो, गोमिया विधायक लंबोदर महतो, पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल सिंह, पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद भी समय-समय पर बेरमो को जिला बनाने की मांग उठाते रहे हैं. मालूम हो कि बेरमो अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित एशिया का सबसे बड़ा अर्थ डैम है. तीन थर्मल पावर स्टेशन हैं. बेरमो में कोयला का अकूत भंडार है और सीसीएल के तीन एरिया कथारा, बोकारो-करगली और ढोरी एरिया की कई खदानाें से उत्खनन हो रहा है. बेरमो अनुमंडल में पानी, बिजली और कोयला प्रचुर मात्रा में है. गोमिया में सबसे पुराना बारूद कारखाना आइएएल ओरिका है. एसआरयू भंडारीदह में है. कई पर्यटक स्थल हैं, जिसमें ललपनिया लुगु पहाड़, कसमार के मृगी खोह, ढोरी माता मंदिर, हथिया पत्थर उल्लेखनीय हैं.
बेरमो अनुमंडल के सभी प्रखंड उग्रवाद प्रभावित हैं. गोमिया के झूमरा से लेकर सेवाती घाटी तथा हिसिम-केदला तक की दूरी वर्तमान बोकारो जिला मुख्यालय से काफी दूर है. बेरमो अनुमंडल में 14 थाना, चार ओपी तथा सात प्रखंड पेटरवार, कसमार, बेरमो, नावाडीह, चंद्रपुरा, जरीडीह ,गोमिया हैं. बेरमो अनुमंडल के उत्तरी व पश्चिमी भाग जिला मुख्यालय से काफी दूर है. नावाडीह व गोमिया प्रखंड के लोगों को 60 किमी की दूरी तय कर तेनुघाट आना पड़ता है. सुदूरवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को इसके कारण काफी समस्याएं होती हैं. बेरमो को जिला बनने से इन लोगों को काफी सुविधाएं मिलेगी.
ऐसे चला बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति का आंदोलन
25 अप्रैल 2023 : कसमार प्रखंड मुख्यालय में धरना
23 मई 2023 : पेटरवार प्रखंड मुख्यालय में धरना
13 जून 2023 : बेरमो प्रखंड मुख्यालय में धरना
4 जुलाई 2023 : गोमिया प्रखंड मुख्यालय में धरना
8 अगस्त 2023 : चंद्रपुरा प्रखंड मुख्यालय में धरना
5 सितंबर 2023 : नावाडीह प्रखंड मुख्यालय में धरना
3 अक्टूबर 2023 : जरीडीह प्रखंड मुख्यालय में धरना
10 अक्टूबर 2023 : चंद्रपुरा प्रखंड मुख्यालय में धरना
17 अक्टूबर 2023 : नावाडीह प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम स्मार पत्र सौंपा गया.
7 नवंबर 2023 : अनुमंडल मुख्यालय, तेनुघाट के समक्ष धरना
21 नवंबर 2023 : जिला मुख्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन
28 व 29 नवंबर 2023 : आयुक्त हजारीबाग व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया.
26 जुलाई 2023 : अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट से 111 से ज्यादा लोग पदयात्रा पर निकले और 31 जुलाई को रांची विधानसभा पहुंचे.
1 अगस्त 2023 : रांची में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया.
6 दिसंबर 2023 : बेरमो अनुमंडल की 51वीं वर्षगांठ पर अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में महाजुटान हुआ और बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक संतोष नायक ने एसडीओ कार्यालय के समक्ष अनश्चितकालीन धरना शुरू किया.
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By Prabhat Khabar News Desk
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