कोरोना : कई मंदिरों के बंद हुए कपाट, भक्त निराश
Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Mar 2020 4:22 AM
पश्चिम मेदिनीपुर व झाड़ग्राम प्रशासन ने 20 मार्च से पश्चिम मेदिनीपुर जिला के खड़गपुर ग्रामीण थाना अंतर्गत जकपुर और मादपुर रेलवे स्टेशन के बीच महिषा व गोटगेड़िया में स्थित मां मनसा मंदिर व झाड़ग्राम जिला प्रशासन ने जामबनी थाना अंतर्गत चिलकीगढ़ में स्थित कनकदुर्गा मंदिर को 15 अप्रैल तक बंद करने का निर्देश दिया है.
जितेश बोरकर, खड़गपुर : कोरोना वायरस का आतंक दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए और सावधानी बरतने के लिए पहले ही पश्चिम मेदिनीपुर व झाड़ग्राम जिला प्रशासन स्कूल, कॉलेज, पार्क, प्रतियोगिताएं, बैठक और रैली पर पाबंदी लगाने का फरमान पहले ही जारी कर चुका है. अब पश्चिम मेदिनीपुर व झाड़ग्राम प्रशासन ने 20 मार्च से पश्चिम मेदिनीपुर जिला के खड़गपुर ग्रामीण थाना अंतर्गत जकपुर और मादपुर रेलवे स्टेशन के बीच महिषा व गोटगेड़िया में स्थित मां मनसा मंदिर व झाड़ग्राम जिला प्रशासन ने जामबनी थाना अंतर्गत चिलकीगढ़ में स्थित कनकदुर्गा मंदिर को 15 अप्रैल तक बंद करने का निर्देश दिया है.
गौरतलब है कि 31 मार्च को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महिषा व गोटगेडिया में मनसा पूजा का आयोजन किया गया था. मनसा महोत्सव के दौरान इलाके में मेला आयोजित किया जाता है. मनसा पूजा वर्षिक महोत्सव के दौरान लाखों की संख्या में भक्तों का समागम होता है, लेकिन जिस तरह से कोरोना का कहर बढ़ रहा है. इसे देखते हुए प्रशासन की ओर वार्षिक महोत्सव और पूजा-पाठ पर फिलहाल रोक लगा दी गयी है. मंदिर के गेट को बंद रखने को कहा गया. दूसरी और झाड़ग्राम के चिलकीगढ़ स्थित कनकदुर्गा मंदिर में काफी संख्या में लोग देवी दर्शन और पूजा पाठ के लिए आते है. कोरोना के मद्देनजर मंदिर को बंद रखने का आदेश दिया है. मंदिर बंद होने व वार्षिक महोत्सव रद्द होने के कारण भक्तों में मायूसी का माहौल है.
क्या कहते हैं भक्त
विपत्ति और दु:ख के समय भगवान ही लोगों का सहारा होते हैं. लोग मंदिर में जाकर भगवान के सामने अपने दुख-दर्द कहते हैं कि मुश्किल की घड़ी में उनकी रक्षा करें, लेकिन कोरोना ने तो भक्त और भगवान के बीच जैसे दीवार ही खड़ी कर दी है. मंदिर के गेट पर ताले लग रहे हैं. अब बतायें कि भगवान भी इस परिस्थिति में अपने भक्तों को कैसे संभालें.
क्या कहना है मंदिर प्रशासन का
मंदिर प्रशासन का कहना है कि मंदिर में भगवान की पूजा अवश्य होगी, लेकिन मंदिर परिसर में मौजूद दुकानें बंद रहेंगी. मेले का आयोजन नहीं होगा. लोगों की भीड़ नहीं रहेगी तो कोरोना वायरस का प्रकोप भी ना के बराबर रहेगा. परिस्थिति सामान्य होते ही फिर से मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया जायेगा.
क्या है कहना डीएम का
पश्चिम मेदिनीपुर की डीएम रश्मि कमल और झाड़ग्राम की डीएम आयशा रानी ने बताया कि लोगों की सावधानी के लिए मंदिरों को बंद किया गया है और मेले पर रोक लगायी गयी है, जिससे लोग कोरोना की चपेट में आने से बच सकें.
दीघा व तमलुक में भी बंद हुए मंदिर
हल्दिया. कोरोना वायरस के आतंक देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से दीघा के पर्यटन क्षेत्र में चडुईभाती (पिकनीक) व तमलुक के वर्ग मंदिर को बंद करने का फैसला लिया गया है. पुलिस प्रशासन की ओर से दीघा समुद्र तट पर लोगों के जमावड़े पर रोक लगा दी गयी है. इस दौरान दीघा में स्नान करने पर्यटक नहीं उतरे, इसके लिए खास इंतजाम किये गये हैं.
पर्यटकों पर 31 मार्च तक के लिए रोक लगायी गयी है. इसके साथ ही दीघा के पर्यटन स्थल मेरिन एक्योरियम, साइंस सेंटर व अमरावती पार्क के अलावा सभी पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया है. नतीजतन स्कूल-काॅलेजों में छुट्टी होने के बावजूद दीघा में भीड़ नहीं है. पर्यटकों से भरा रहनेवाला दीघा इन दिनों खाली है. इसका असर दीघा के होटल व्यवसाय व अन्य व्यापारिक संस्थानों पर सीधा असर पड़ा है.
विभिन्न होटल की ओर से प्रशासन के आदेश को देखते हुए पर्यटकों की बुकिंग कैंसिल की जा रही है. दीघा के अस्पताल में दो बेड वाला आइसोलेशन वार्ड शुरू किया गया है. पश्चिम बंगाल व ओड़िशा सीमा पर विशेष नजरदारी रखी जा रही है. 23 मार्च से थोक मछली का बाजार बंद हो रहा है. बंदी का आलम 15 अप्रैल तक चलेगा. पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारी पार्थ घोष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिया गया दिशानिर्देश 31 मार्च तक सख्ती से पालन किया जायेगा. इसके अलावा प्राचीन वर्ग मंदिर में पुष्पांजलि, भोग और पूजा-अर्चना को बंद रखा गया है.
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