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कांग्रेस का खुला खाता, सागरदिघी उपचुनाव में बायरन विश्वास ने तृणमूल के देबाशीष बनर्जी को 22,986 वोट से हराया

Updated at : 02 Mar 2023 5:29 PM (IST)
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कांग्रेस का खुला खाता, सागरदिघी उपचुनाव में बायरन विश्वास ने तृणमूल के देबाशीष बनर्जी को 22,986 वोट से हराया

कांग्रेस के बायरन विश्वास को 16 राउंड की मतगणना के बाद कुल 87,667 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के देबाशीष बनर्जी को 64,681 मत हासिल हुए. तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिलीप साहा रहे. इन्हें 25,815 वोट मिले.

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Sagardighi By Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा में कांग्रेस का भी खाता खुल गया है. जी हां, अब कांग्रेस का विधायक भी विधानसभा में होगा. पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 में हुए चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था. लेकिन, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के गृह जिले मुर्शिदाबाद में सागरदिघी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उसके उम्मीदवार बायरन विश्वास ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के देबाशीष बनर्जी को 22,986 वोट से पराजित कर दिया है. बायरन बिस्वास ने वाम दलों के समर्थन से चुनाव लड़ा था.

बायरन विश्वास को मिले 87,667 वोट

कांग्रेस के बायरन विश्वास को 16 राउंड की मतगणना के बाद कुल 87,667 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के देबाशीष बनर्जी को 64,681 मत हासिल हुए. तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिलीप साहा रहे. इन्हें 25,815 वोट मिले. इस तरह देखें, तो कांग्रेस को सबसे ज्यादा 47.35 फीसदी वोट मिले. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को 34.94 फीसदी और भाजपा को 13.94 फीसदी मत प्राप्त हुए.

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भाजपा के दिलीप साहा रहे तीसरे नंबर पर

पोस्टल वोट में भी बायरन, देबाशीष और दिलीप साहा क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. बायरन को कुल 56 पोस्टल वोट मिले, जबकि देबाशीष बनर्जी को 50 और दिलीप साहा को 22 वोट प्राप्त हुए. कुल 1,85,142 मतदाताओं ने इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जिसमें से 1,337 ने इनमें से किसी को नहीं (NOTA) का विकल्प चुना. इन तीनों के अलावा 6 और उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन किसी को 1 फीसदी भी वोट हासिल नहीं हुआ.

सुब्रत साहा के निधन से खाली हुई थी सागरदिघी सीट

अधीर रंजन के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गयी थी, क्योंकि वर्ष 2021 के चुनाव में उनके नेतृत्व में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पायी थी. इससे पहले ही बायरन विश्वास ने कहा था कि उन्हें अपनी जीत का भरोसा है. यहां के लोग भ्रष्टाचार और तृणमूल के कुशासन से तंग आ चुके हैं. तृणमूल के तीन बार के विधायक एवं राज्य के मंत्री सुब्रत साहा के निधन के बाद सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया. पिछले साल दिसंबर में सुब्रत साहा का निधन हो गया था.

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2011 से जीत रही थी तृणमूल कांग्रेस

बता दें कि टीएमसी वर्ष 2011 से इस सीट पर जीतती रही थी. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में उसने 50,000 से अधिक मतों के अंतर से यहां पर जीत दर्ज की थी. अल्पसंख्यक बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.3 लाख मतदाता हैं. 60 प्रतिशत से अधिक मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. ग्रामीण क्षेत्र में करीब 18.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) और 6.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी है. इस निर्वाचन क्षेत्र में 27 फरवरी को मतदान हुआ था, जिसमें 73 प्रतिशत से अधिक मत पड़े.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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