गुजरात चुनाव 2022: यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर सकती है बीजेपी सरकार, समिति गठित करने की तैयारी

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 29 Oct 2022 2:06 PM

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**EDS: VIDEO GRAB** New Delhi: Sparks in the aircraft during take-off of a Bengaluru-bound IndiGo flight, at the Indira Gandhi International airport in New Delhi, Friday, Oct. 28, 2022. The aircraft had to be grounded at the Delhi airport after one of its engines suspected to have caught fire. (PTI Photo)(PTI10_28_2022_000196B)

गुजरात सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए, उत्तराखंड की तरह, एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तहत एक समिति गठित करने का प्रस्ताव पेश कर सकती है.

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गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 से ठीक पहले बीजेपी सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर रही है. ऐसी खबर आ रही है कि गुजरात की बीजेपी सरकार इसके लिए एक कमेटी गठित कर सकती है.

उत्तराखंड की तरह समिति गठित कर सकती है गुजरात सरकार

सूत्रों के हवाले से खबर है कि गुजरात सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए, उत्तराखंड की तरह, एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तहत एक समिति गठित करने का प्रस्ताव पेश कर सकती है.

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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

समान नागरिक संहिता का मतलब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून. यानी विवाह, धर्म, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे को लेकर सभी के लिए समान कानून. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होंगे, चाहे वो किसी भी जाति और धर्म से क्यों ने हों. मालूम हो उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू किया गया है.

गुजरात चुनाव में बीजेपी की दांव से आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका

गुजरात चुनाव में पहली बार अपनी किस्मत आजमाने जा रही आम आदमी पार्टी के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड बड़ा झटका साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आम आदमी पार्टी हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी से दो कदम आगे निकले की तैयारी कर रही है. लेकिन अगर बीजेपी सरकार समान नागरिक संहिता लागू कराने में सफल रहती है, तो यह आप के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. अगर आप इसका समर्थन करती है, तो बीजेपी की जाल में फंस जाएगी. अगर विरोध करती है, तो तब भी जाल में फंस जाएगी.

कई नेताओं ने यूसीसी का किया समर्थन

कई नेताओं ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन किया, तो कई ने इसका विरोध किया है. ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसका विरोध किया है. यूनिफॉर्म सिविल कोड को असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोध करार दिया है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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