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'बाल विवाह कानूनन अपराध, रुक जाता है बच्चों का शारीरिक विकास', गढ़वा में कार्यशाला का आयोजन

Updated at : 29 Mar 2023 1:10 AM (IST)
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Child Marriage Case in Kishanganj

उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के पूर्णतया अनुपालन कराने को कहा. डीआरडीए निदेशक दिनेश सुरीन ने कहा कि बाल विवाह से कम शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात लोगों को सामाजिक बुराइयों का भी सामना करना पड़ता है. हमें इस मुहिम को जन जागरूकता का रूप देने की जरूरत है.

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गढ़वा. जिला समाज कल्याण विभाग (बाल संरक्षण इकाई) ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 विषय पर जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया. जिला परिसदन भवन में आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त (डीडीसी) राजेश कुमार राय ने की. उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर विषय है. हमें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बच्चों के माता-पिता को बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में बताने एवं उन्हें समझाने की आवश्यकता है. उन्हें यह बताना होगा कि कैसे उनके बच्चे बाल विवाह के कारण अशिक्षित रह जा रहे हैं एवं उनका शारीरिक विकास रुक जा रहा है. साथ ही वे सामाजिक कुरीतियों का भी शिकार हो रहे हैं.

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के पूर्णतया अनुपालन कराने का निर्देश

उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के पूर्णतया अनुपालन कराने को कहा. डीआरडीए निदेशक दिनेश सुरीन ने कहा कि बाल विवाह से कम शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात लोगों को सामाजिक बुराइयों का भी सामना करना पड़ता है. हमें इस मुहिम को जन जागरूकता का रूप देने की जरूरत है.

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गत वर्ष बाल ववाह के 25 मामले सामे आए

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी पूर्णिमा कुमारी ने कहा कि साल 2022 में गढ़वा जिले में बाल विवाह के 25 मामले सामने आये. इसे लोगों के सहयोग से रुकवाया गया है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है तथा इसके लिए सजा का प्रावधान है. मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी रंका राम नारायण सिंह, एसडीपीओ गढ़वा अवध कुमार यादव, सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार व कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद सुशील कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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